प्रकाशितवाक्य 10
पाठ
बाइबल की उस पुस्तक में, जिसका पूरा काम लिखना है, अचानक एक आवाज़ कहती है: "मत लिख।" सात गर्जन बोलते हैं, यूहन्ना कलम उठाता है, और स्वर्ग उसका हाथ रोक देता है। इससे पहले एक शक्तिशाली स्वर्गदूत बादल ओढ़े उतरता है, सिर पर मेघधनुष, मुँह सूर्य जैसा, पाँव आग के खम्भे जैसे; एक पाँव समुद्र पर, दूसरा पृथ्वी पर। वह हाथ स्वर्ग की ओर उठाकर सृष्टिकर्ता की शपथ खाता है: "अब और देर न होगी।" और अंत में यूहन्ना को एक छोटी खुली पुस्तक खानी पड़ती है, मुँह में मीठी, पेट में कड़वी, ताकि वह "बहुत से लोगों, जातियों, भाषाओं, और राजाओं के विषय में फिर भविष्यद्वाणी" कर सके।
मर्म
यह अध्याय परमेश्वर के बारे में दो बातें एक साथ कहता है, और वे दोनों हमें असहज करती हैं। पहली: वे सचमुच सृष्टिकर्ता हैं। शपथ में स्वर्ग, पृथ्वी और समुद्र, तीनों का नाम आता है, "और जो कुछ उसमें है"। यह इतिहास किसी अंधी शक्ति के हाथ में नहीं है; जो न्याय करने आ रहे हैं, वे ही हैं जिन्होंने सब बनाया, और इसलिए उन्हें अपनी सृष्टि पर अधिकार है। दूसरी: वे सब कुछ हमें नहीं बताते। सात गर्जन बोले, और उनकी बात मुहरबंद रह गई। प्रकाशन का अर्थ पूर्ण जानकारी नहीं है। परमेश्वर उतना खोलते हैं जितना विश्वास में चलने के लिए आवश्यक है, और उतना छिपा रखते हैं जितना हमें उनके सामने छोटा बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यह कंजूसी नहीं, अनुग्रह है।
सूत्र
"परमेश्वर का वह रहस्य पूरा हो जाएगा, जिसका सुसमाचार उसने अपने दास भविष्यद्वक्ताओं को दिया था।" यह वाक्य पूरी बाइबल को एक धागे में बाँध देता है। रहस्य कोई पहेली नहीं, बल्कि परमेश्वर की वह छिपी योजना है जो सदियों तक भविष्यद्वक्ताओं के मुँह से टुकड़ों में बोली गई और मसीह में खुली: कि परमेश्वर एक राज्य स्थापित करेंगे जिसमें हर जाति और भाषा के लोग शामिल होंगे, और यह क्रूस पर मारे गए मेम्ने के द्वारा होगा। ध्यान दें कि यहाँ "पूरा होना" तुरही की सातवीं आवाज़ के साथ जुड़ा है, यानी न्याय के साथ। सुसमाचार और न्याय दो अलग विभाग नहीं हैं। वही अनुग्रह जो पापी को गले लगाता है, बुराई को समाप्त भी करता है। जो अनुग्रह बुराई को नहीं तोड़ता, वह अनुग्रह नहीं, उदासीनता है।
दर्पण
"अब और देर न होगी" उस व्यक्ति के लिए कहा गया है जिसे लगता है कि बहुत देर हो चुकी है। आपने वर्षों प्रार्थना की उस बेटे के लिए जो अब फ़ोन नहीं उठाता; आपने ईमानदारी चुनी और उसकी कीमत तनख़्वाह में चुकाई; आपने शरीर की उस रिपोर्ट को पढ़ा जो बदलती नहीं। और स्वर्ग चुप लगता है। यह अध्याय उस चुप्पी को झूठा नहीं कहता, वह उसे सीमित कहता है। साथ ही यह हमारे उस घमंड को भी नंगा करता है जो सब समझना चाहता है। हम भविष्यवाणी के चार्ट बनाते हैं, तारीख़ों का हिसाब लगाते हैं, हर दुख का कारण जानना चाहते हैं। सात गर्जन कहते हैं: कुछ बातें आपकी नहीं हैं। आपका काम बंद पुस्तक का अनुमान लगाना नहीं, खुली पुस्तक को खाना है।
प्रश्न
क्यों बोलें और फिर मुहर लगा दें? अगर गर्जन की बात लिखी नहीं जानी थी, तो सुनाई क्यों दी? इसका कोई साफ़ उत्तर पाठ नहीं देता, और मैं गढ़ना नहीं चाहता। पर एक बात दिखती है: यूहन्ना को अनुभव हुआ कि परमेश्वर के पास और भी बहुत कुछ है जो उसके पन्ने पर नहीं आया। जो प्रकाशन उसे मिला वह अधूरा नहीं है, पर वह सम्पूर्ण भी नहीं है। यह हमें एक तनाव में छोड़ता है जिसे सुलझाना नहीं, ओढ़ना है: हमारे हाथ में जो शब्द है वह भरोसेमंद है, फिर भी परमेश्वर उससे बड़े हैं। इस मुहर के साथ जीने का अर्थ है यह मानना कि विश्वास ज्ञान की पूर्णता पर नहीं, वक्ता की विश्वसनीयता पर टिका है।
एक बारीकी
"यह तेरा पेट कड़वा तो करेगी, पर तेरे मुँह में मधु जैसी मीठी लगेगी।" खाना, पढ़ना नहीं। परमेश्वर का वचन जानकारी नहीं जो सिर में रखी जाए, वह भोजन है जो पूरे शरीर में उतरता है और आपको बदल देता है। और क्रम पर ध्यान दें: मिठास पहले, कड़वाहट बाद में। पहली मुलाक़ात में सुसमाचार शहद है, क्षमा, अपनापन, आशा। फिर वह पेट में उतरता है, और वहाँ इसका दूसरा स्वाद खुलता है: यह वचन न्याय की भी बात करता है, उन लोगों के विषय में जिनसे आप प्यार करते हैं। जो भी परमेश्वर का संदेश सचमुच लेकर चलता है, वह दोनों स्वाद जानता है। जिस प्रचारक के पेट में कभी कड़वाहट नहीं उठी, उसने संदेश निगला ही नहीं, बस चखकर थूक दिया।
अंतर्पाठ
यहेजकेल 3 में परमेश्वर भविष्यद्वक्ता से कहते हैं कि वह पुस्तक खाए, और वह उसके मुँह में मीठी लगती है; वहाँ भी संदेश एक विद्रोही लोगों के लिए भारी था। यूहन्ना जानबूझकर उसी दृश्य में खड़ा होता है: वह नई किस्म का नबी नहीं, उसी परंपरा का उत्तराधिकारी है, फ़र्क़ यह कि उसका दायरा एक जाति नहीं, "बहुत से लोगों, जातियों, भाषाओं, और राजाओं" तक फैला है। और मेघधनुष का लौटना कोई सजावट नहीं: उत्पत्ति 9 में वह चिह्न परमेश्वर ने वाचा के रूप में दिया था कि वे सृष्टि को नष्ट नहीं करेंगे। न्याय की घोषणा करने आया दूत उस वाचा के चिह्न को अपने सिर पर पहने हुए है। परमेश्वर अपने वादे भूलकर न्याय नहीं करते।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन सी बात है जिसे परमेश्वर ने अब तक "मुहरबंद" रखा है, और क्या आप उसे न जाने हुए भी उन पर भरोसा रखने को तैयार हैं?
पिछली बार कब परमेश्वर के वचन ने आपके पेट में कड़वाहट पैदा की, और आपने उसका क्या किया: उसे टाल दिया या उसे लेकर बोलने लगे?
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Revelation 10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
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प्रकाशितवाक्य 10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
प्रकाशितवाक्य 10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Revelation 10 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आपकी आवाज़ सिंह की गरज जैसी है, कमज़ोर या दबी हुई नहीं। जब वह स्वर्गदूत पुकारा तो सात गर्जनों ने उत्तर दिया, और मेरे डर भी आपकी आवाज़ के सामने चुप हो जाते हैं। धन्यवाद कि आप आज भी बोलते हैं और सुनाई देते हैं।
पिता, आप समुद्र और भूमि दोनों पर खड़े हैं, कोई जगह आपके अधिकार से बाहर नहीं। मेरा छोटा सा जीवन भी आपके हाथ में खुली हुई पुस्तक है। जहाँ मैं डगमगाता हूँ, वहाँ आप स्थिर हैं। मुझे भरोसा दीजिए कि जो आपने ठाना है, वही पूरा होगा।
पिता, धन्यवाद कि आपकी पुस्तक बंद नहीं, खुली हुई है, और आप कहते हैं, "जा, ले ले।" धन्यवाद कि आपका वही शब्द जो स्वर्ग से सुनाई दिया, फिर से मुझसे बातें करता है। आप अपना वचन छिपाते नहीं, मेरे हाथों में थमा देते हैं।
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