प्रकाशितवाक्य 2:4
पाठ
इफिसुस की कलीसिया की लंबी प्रशंसा के ठीक बीच में एक वाक्य आता है जो सब कुछ रोक देता है: "पर मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तूने अपना पहला सा प्रेम छोड़ दिया है।" इससे पहले की पंक्तियों में प्रभु ने उनके काम, परिश्रम और धीरज को गिनाया है, यह भी कि उन्होंने झूठे प्रेरितों को परखकर पहचान लिया और उनके नाम के लिए दुःख उठाते-उठाते थके नहीं। और फिर, इस पूरी सूची के बाद, एक शिकायत। वे सब कुछ करते रहे, पर जिस प्रेम से यह सब शुरू हुआ था, वह उनके हाथ से छूट गया। सही काम बने रहे; उनके भीतर धड़कता हुआ कारण चुपचाप विदा हो गया।
मर्म
यह वाक्य हमारी धार्मिकता की माप को उलट देता है। हम मानते हैं कि परमेश्वर हमारे कामों को देखते हैं, और वे देखते भी हैं, बड़ी बारीकी से। पर वे उससे भी गहरे देखते हैं: क्या वहाँ अब भी प्रेम है? यहाँ एक कलीसिया है जो सिद्धांत में खरी है, थकान में भी वफ़ादार, झूठ के प्रति सजग, और फिर भी मसीह असंतुष्ट हैं। क्यों? क्योंकि परमेश्वर वस्तुएँ नहीं, संबंध चाहते हैं। वाचा का पूरा स्वभाव यही है: प्रेम करनेवाले का प्रेम पाने की चाह। आश्चर्य यह है कि मसीह इसे छोटी बात कहकर टालते नहीं। वे इसे "तेरे विरुद्ध" कहते हैं, मानो कोई ठेस पहुँची हो। क्या परमेश्वर को ठेस पहुँच सकती है? यह पद उस प्रश्न को खुला छोड़ता है, और हमें उसके सामने चुप खड़ा कर देता है।
कथा का धागा
"पहला सा प्रेम" कोई नई शब्दावली नहीं है। पुराने नियम में परमेश्वर बार-बार अपने लोगों से उनकी शुरुआत की याद दिलाते हैं: जंगल में चलती हुई दुल्हन की तरह इस्राएल, जब कुछ भी सुरक्षित नहीं था पर स्नेह जीवित था। यिर्मयाह के दूसरे अध्याय में परमेश्वर ठीक इसी दर्द से बोलते हैं, और होशे की पूरी पुस्तक उसी घाव के इर्द-गिर्द घूमती है। तो इफिसुस को कही गई यह बात अचानक नहीं आती; यह परमेश्वर की सबसे पुरानी शिकायत है, जो अब मसीह के मुँह से निकल रही है। और यहीं सूत्र जुड़ता है: जो वाचा का दूल्हा पुराने नियम में रोता था, वही अब दीवटों के बीच चल रहा है। क्रूस पर जो प्रेम दिया गया, वह प्रेम माँगता भी है। क्या यह अनुचित है? या यही प्रेम का स्वभाव है, कि वह लौटकर आना चाहता है?
दर्पण
आप शायद पंद्रह साल से रविवार की कक्षा पढ़ा रहे हैं। आप वही व्यक्ति हैं जिसे सब फोन करते हैं जब कोई बीमार पड़ता है। आपका बाइबल पढ़ने का समय नियमित है, नाश्ते से पहले, बिना चूके। और फिर भी कभी-कभी, गाड़ी चलाते हुए, एक खाली-सा सवाल उठता है: मैं यह सब किसके लिए कर रहा हूँ? वही सवाल विवाह में भी उठता है, जहाँ दोनों अपना काम करते हैं, बिल भरे जाते हैं, बच्चे स्कूल पहुँचते हैं, पर बातें खत्म हो चुकी हैं। मसीह यहाँ आपकी सेवा पर हमला नहीं कर रहे; वे आपको उसके पीछे छिपने नहीं दे रहे। यह पद हमारी सबसे सुरक्षित पनाह में सेंध लगाता है: व्यस्त वफ़ादारी। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह क्षण लिखिए जब मसीह का प्रेम पहली बार आपको सचमुच छू गया था, जितना याद हो उतनी जगह और समय के साथ, और फिर उसे ज़ोर से पढ़कर उन्हें धन्यवाद दीजिए।
शास्त्र की गूँज
यूहन्ना के सुसमाचार के आखिरी अध्याय में झील किनारे यीशु पतरस से तीन बार पूछते हैं कि क्या वह उनसे प्रेम रखता है। वे उसकी हिम्मत, उसकी सेवा या उसके उपदेश की क्षमता नहीं पूछते। वही प्रश्न यहाँ पूरी कलीसिया से पूछा जा रहा है, और उत्तर में सन्नाटा है। दूसरी गूँज पौलुस के उस अध्याय से आती है जहाँ वह कहता है कि बिना प्रेम के भविष्यवाणी, ज्ञान, दान, यहाँ तक कि शहादत भी शून्य है। इफिसुस वही जीवित प्रमाण है: सब कुछ ठीक, और फिर भी कुछ मूलभूत गायब। शास्त्र यहाँ खुद को समझाता है, और कुछ बेरहमी से।
एक बारीकी
"छोड़ दिया है।" यूनानी में यहाँ क्रिया है ἀφῆκες (अफ़ेकेस), जिसका अर्थ है जाने देना, हाथ खोल देना। यह वही शब्द है जो क्षमा करने के लिए भी इस्तेमाल होता है, यानी किसी चीज़ को छोड़ देना। ध्यान दीजिए: पाठ यह नहीं कहता कि प्रेम खो गया या चुरा लिया गया। कहीं कोई दुर्घटना नहीं हुई। किसी ने, किसी बिंदु पर, पकड़ ढीली कर दी। और शायद यही सबसे बेचैन करने वाली बात है, क्योंकि पकड़ ढीली करना एक घटना नहीं होती, वह वर्षों तक चलने वाली अनगिनत छोटी अनुपस्थितियाँ होती हैं। कब छोड़ा? कौन बता सकता है।
मुख्य पात्र
जो बोल रहे हैं, वे दीवटों के बीच फिरते हैं। यह चित्र पहले ही बता देता है कि यह दूर से की गई टिप्पणी नहीं है। वे वहीं हैं, कमरे में, और उन्होंने गिनती की है कि क्या बचा और क्या गया। उनकी आवाज़ में क्रोध से ज़्यादा कुछ और है, कुछ जो ठगे जाने जैसा लगता है। और फिर भी वे शिकायत पर नहीं रुकते: अगली साँस में कहते हैं, "स्मरण कर, कि तू कहाँ से गिरा है, और मन फिरा और पहले के समान काम कर।" यह किसी न्यायाधीश की भाषा नहीं, लौटने के लिए रास्ता खोलनेवाले की भाषा है। वे जानते हैं कि कहाँ से गिरना हुआ, और वे चाहते हैं कि हम भी याद करें।
चिंतन के प्रश्न
जिस चीज़ को मैंने वर्षों से "वफ़ादारी" कहा है, क्या उसके नीचे अब भी प्रेम धड़क रहा है, या सिर्फ़ आदत?
अगर मसीह इसी कमरे में चल रहे हों और मुझसे कहें "स्मरण कर, कि तू कहाँ से गिरा है", तो मेरी स्मृति मुझे किस दिन पर ले जाएगी?
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Revelation 2:4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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प्रकाशितवाक्य 2:4 का क्या अर्थ है?
प्रकाशितवाक्य 2:4 किस विषय में है?
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प्रकाशितवाक्य 2:4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
प्रकाशितवाक्य 2:4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Revelation 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिरगमुन की कलीसिया बाहर के दबाव में डटी रही, अन्तिपास ने जान तक दे दी। फिर भी यीशु कहते हैं, "वैसे ही तेरे यहाँ भी ऐसे लोग हैं, जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं।" बाहर की लड़ाई जीतकर भी भीतर कुछ चुपचाप पलता रह सकता है। जिसे तू "बस थोड़ा सा है" कहकर सहता आया है, प्रभु उसे देख रहे हैं।
पिता, जब मैं भीतर से खाली और थका होता हूँ, तू मुझे वह छिपा हुआ भोजन दे जो दुनिया नहीं दे सकती। लोग मुझे जिन नामों से पुकारते हैं, वे मुझे थका देते हैं। तू मेरा असली नाम जानता है, और यही मेरे लिए काफ़ी है। मुझे अंत तक थामे रख।
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