बाइबल व्याख्या

रोमियों 12:4

बाइबल

पाठ

रोम की किसी तंग सीढ़ीदार इमारत में, तेल के दीये की गंध और नीचे गली के शोर के बीच, पौलुस का पत्र ऊँची आवाज़ में पढ़ा जा रहा है, और अचानक एक वाक्य आता है जो वहाँ बैठे हर व्यक्ति को अपने ही शरीर की ओर देखने पर मजबूर करता है: "क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही जैसा काम नहीं।" पौलुस कोई नई बात गढ़ नहीं रहे; वे एक साधारण, सबके अनुभव में आने वाली सच्चाई उठाते हैं। एक शरीर, अनेक अंग, और हर अंग का काम अलग। अगली आयत में वे इसे मसीह की देह पर लागू करेंगे, पर यहाँ वे बस चित्र टाँग रहे हैं, ताकि वह सबकी आँखों के सामने रहे।

मूल बात

यह उपमा उस समय की रोमी दुनिया में निर्दोष नहीं थी। शासक वर्ग यही चित्र इस्तेमाल करता था ताकि मज़दूर और दास अपनी जगह पर चुप बैठे रहें: पेट ऊपर है, पैर नीचे, यही व्यवस्था है। पौलुस वही चित्र उठाते हैं और उसकी धार पलट देते हैं। आयत 3 में वे पहले ही कह चुके हैं कि कोई अपने आपको "जैसा समझना चाहिए, उससे बढ़कर" न समझे। यानी अंगों की भिन्नता ऊँच-नीच का औचित्य नहीं, बल्कि अहंकार का इलाज है। परमेश्वर ने आपको वह नहीं बनाया जो दूसरा है, और यह कमी नहीं, रचना है। अनुग्रह हमें एक जैसा नहीं बनाता; वह हमें एक करता है, और भिन्न रहने की स्वतंत्रता देता है।

साझा सूत्र

पौलुस यह चित्र हवा में नहीं टाँगते। इसी अध्याय की पहली आयत में वे कह चुके हैं: "अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ।" पहले आपका अपना शरीर वेदी पर जाता है, फिर वह शरीर एक बड़ी देह का अंग बनकर पाया जाता है। यह क्रम महत्वपूर्ण है: समर्पण के बिना संगति केवल संगठन है। और जो देह बनती है, वह किसी विचारधारा के इर्द-गिर्द नहीं बनती, बल्कि उस एक के इर्द-गिर्द जिसकी देह वास्तव में तोड़ी गई। आयत 5 इसे खोलती है: "हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर।" पुराने नियम में परमेश्वर ने एक बिखरे हुए परिवार को बारह गोत्रों का एक राष्ट्र बनाया, हर गोत्र अपनी सीमा और अपने बोझ के साथ। वही परमेश्वर अब यहूदी और अन्यजाति को, दास और स्वतंत्र को, एक क्रूस के नीचे जोड़कर वही काम फिर कर रहे हैं, पर अब खून के रिश्ते से नहीं, अनुग्रह से।

दर्पण

आप जानते हैं कि तुलना कहाँ चुभती है। रविवार को कोई आपसे बेहतर बोलता है, और आप घर आकर चुपचाप तय कर लेते हैं कि आपकी सेवा शायद गिनी ही नहीं जाती। या उल्टा: आप ही हैं जो सब सँभालते हैं, और भीतर एक बारीक तिरस्कार पलता है उन लोगों के लिए जो केवल कुर्सियाँ लगाते हैं या रसोई में रहते हैं। दोनों ही बीमारियाँ एक ही जड़ से आती हैं, यह भूल जाना कि अंग होना पद नहीं, स्थान है। घर में भी यही है: जो कमाता है वह सोचता है कि वही परिवार चला रहा है, और जो बीमार माँ को नहलाता है उसका काम किसी रिपोर्ट में नहीं आता। परमेश्वर की गिनती अलग है।

आज ही, दस मिनट में: उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिसकी सेवा आपकी सेवा से बिल्कुल अलग है और जिसे आप अक्सर अनदेखा करते हैं, और उसे एक छोटा संदेश भेजकर ठीक-ठीक बताइए कि उसका काम मण्डली में क्या पूरा करता है।

मुख्य पात्र

इस आयत में असली कर्ता दिखाई नहीं देता, पर वह आयत 3 में खड़ा है: "परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बाँट दिया है।" परमेश्वर यहाँ बाँटने वाले हैं, और बाँटना हमेशा असमान होता है। वे किसी को अधिक विश्वास, किसी को कम, किसी को वाणी, किसी को धैर्य देते हैं, और इस असमानता में कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक शिल्पी का इरादा है। एक देह बनाने वाला जानता है कि दस आँखों और किसी पैर के बिना कोई नहीं चल सकता। यह परमेश्वर हमें बराबर नहीं, उपयुक्त बनाते हैं। और यही उनकी दया का वह रूप है जिसे स्वीकार करना सबसे कठिन है, क्योंकि इसका अर्थ है कि मुझे वह बनना छोड़ना होगा जो मैं कभी नहीं था, और वह होना पड़ेगा जो मुझे दिया गया है।

श्रोताओं का चेहरा

रोम की मण्डलियाँ भव्य भवनों में नहीं, किराए के कमरों और कारीगरों की दुकानों के पिछवाड़े में मिलती थीं। वहाँ एक ही कमरे में एक धनी संरक्षक बैठता था जिसके घर में बीस दास थे, और उसी के पास वह मोची जो दिनभर चमड़े की बदबू में काम करता। रोमी समाज सम्मान और शर्म की सीढ़ी पर खड़ा था; भोजन में भी बेहतर लोगों को बेहतर शराब परोसी जाती थी। ऐसे कमरे में यह सुनना कि सबका "काम" अलग है, पर देह एक है, केवल मधुर नहीं, विस्फोटक था। यूनानी में "काम" के लिए जो शब्द है, प्राक्सिस, गतिविधि को बताता है, दर्जे को नहीं। अर्थात मोची और संरक्षक की भिन्नता उनके ओहदे की नहीं, उनके कार्य की है, और दोनों के बिना देह अपंग है।

बारीकी

ध्यान दीजिए कि पौलुस "तुम्हारी देह" नहीं कहते, वे कहते हैं "हमारी एक देह।" यह वही व्यक्ति है जिसने दो आयत पहले अपने अधिकार की याद दिलाई थी, "उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है।" प्रेरित होने के बाद भी वे अपने आपको देह के भीतर रखते हैं, ऊपर नहीं। जिस पत्र में वे रोम की मण्डली को शिक्षा दे रहे हैं, उसी में वे स्वयं को एक अंग के रूप में गिनते हैं, जिसका काम दूसरों के काम के बिना अधूरा है। यह छोटा सा सर्वनाम उस पूरी शैली को तोड़ देता है जिसमें शिक्षक श्रोताओं से ऊपर खड़ा होता है। जो नेतृत्व करता है वह भी अंग ही है, और अंग कभी अपने लिए नहीं धड़कता।

मनन के प्रश्न

आप किस अंग की तुलना में अपने आपको छोटा मानते हैं, और यह तुलना असल में परमेश्वर के बाँटने के तरीके पर क्या आरोप लगा रही है?

यदि आपकी मण्डली आपसे वही करवाना चाहे जो आप नहीं कर सकते, तो आप कैसे जानेंगे कि यह आज्ञाकारिता है या दूसरों का अंग बनने की कोशिश?

Romans में और गहराई से जानें

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Romans 8-16 For You

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The Message of Romans

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A modern classic on the letter that has changed history more than once.

Romans: An Introduction and Commentary

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Romans 12:4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

रोमियों 12:4 का क्या अर्थ है?
रोम की किसी तंग सीढ़ीदार इमारत में, तेल के दीये की गंध और नीचे गली के शोर के बीच, पौलुस का पत्र ऊँची आवाज़ में पढ़ा जा रहा है, और अचानक एक वाक्य आता है जो वहाँ बैठे हर व्यक्ति को अपने ही शरीर की ओर देखने पर मजबूर करता है: "क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही जैसा काम नहीं।" पौलुस कोई नई बात गढ़ नहीं रहे; वे एक साधारण, सबके अनुभव में आने वाली सच्चाई उठाते हैं। एक शरीर, अनेक अंग, और हर अंग का काम अलग। अगली आयत में वे इसे मसीह की देह पर लागू करेंगे, पर यहाँ वे बस चित्र टाँग रहे हैं, ताकि वह सबकी आँखों के सामने रहे।
रोमियों 12:4 किस विषय में है?
पौलुस यह चित्र हवा में नहीं टाँगते। इसी अध्याय की पहली आयत में वे कह चुके हैं: "अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ।" पहले आपका अपना शरीर वेदी पर जाता है, फिर वह शरीर एक बड़ी देह का अंग बनकर पाया जाता है। यह क्रम महत्वपूर्ण है: समर्पण के बिना संगति केवल संगठन है। और जो देह बनती है, वह किसी विचारधारा के इर्द-गिर्द नहीं बनती, बल्कि उस एक के इर्द-गिर्द जिसकी देह वास्तव में तोड़ी गई। आयत 5 इसे खोलती है: "हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर।" पुराने नियम में परमेश्वर ने एक बिखरे हुए परिवार को बारह गोत्रों का एक राष्ट्र बनाया, हर गोत्र अपनी सीमा और अपने बोझ के साथ। वही परमेश्वर अब यहूदी और अन्यजाति को, दास और स्वतंत्र को, एक क्रूस के नीचे जोड़कर वही काम फिर कर रहे हैं, पर अब खून के रिश्ते से नहीं, अनुग्रह से।
रोमियों 12:4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही, दस मिनट में: उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिसकी सेवा आपकी सेवा से बिल्कुल अलग है और जिसे आप अक्सर अनदेखा करते हैं, और उसे एक छोटा संदेश भेजकर ठीक-ठीक बताइए कि उसका काम मण्डली में क्या पूरा करता है।
रोमियों 12:4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
रोम की मण्डलियाँ भव्य भवनों में नहीं, किराए के कमरों और कारीगरों की दुकानों के पिछवाड़े में मिलती थीं। वहाँ एक ही कमरे में एक धनी संरक्षक बैठता था जिसके घर में बीस दास थे, और उसी के पास वह मोची जो दिनभर चमड़े की बदबू में काम करता। रोमी समाज सम्मान और शर्म की सीढ़ी पर खड़ा था; भोजन में भी बेहतर लोगों को बेहतर शराब परोसी जाती थी। ऐसे कमरे में यह सुनना कि सबका "काम" अलग है, पर देह एक है, केवल मधुर नहीं, विस्फोटक था। यूनानी में "काम" के लिए जो शब्द है, प्राक्सिस, गतिविधि को बताता है, दर्जे को नहीं। अर्थात मोची और संरक्षक की भिन्नता उनके ओहदे की नहीं, उनके कार्य की है, और दोनों के बिना देह अपंग है।
रोमियों 12:4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आप किस अंग की तुलना में अपने आपको छोटा मानते हैं, और यह तुलना असल में परमेश्वर के बाँटने के तरीके पर क्या आरोप लगा रही है?
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Romans 12 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 17

पिता, धन्यवाद कि आपने हमें बदला लेने के बोझ से छुड़ाया। आपका वचन सिखाता है, "बुराई के बदले किसी से बुराई न करो," और यही हमारे मन की शांति बनता है। धन्यवाद कि आप हमें वह करने की शक्ति देते हैं जो सब लोगों के सामने भला है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 3

पिता, मुझे अपने बारे में सच्ची समझ दे। न इतना बड़ा समझूँ कि दूसरों को छोटा कर दूँ, न इतना कम कि तेरा दिया हुआ भूल जाऊँ। जो विश्वास तूने मुझे सौंपा है, उसी नाप से चलना सिखा, संयम और नम्रता के साथ।

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