परमेश्वर का प्यार और आशीष
प्रेम और आशीष
बच्चों के लिए चार छोटे बाइबल पल, भजन संहिता 27:4, भजन संहिता 9:1, मत्ती 14:19 and गिनती 6:24-26 पर आधारित।
☀ सुबह का पल
एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊँ, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूँ। (भज. 6:8, भज. 23:6, फिलि. 3:13)
भजन संहिता 27:4 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: दाऊद एक ही बात चाहता था, वह हमेशा परमेश्वर के पास रहे और उसकी भलाई को देखे।
आज इतवार है। शायद तुम अभी बिस्तर से उठे हो और घर में चहल-पहल शुरू हो गई है। कपड़े तैयार हैं, कोई नाश्ता बना रहा है, और सब मिलकर कलीसिया जाने की तैयारी कर रहे हैं।
दाऊद ने एक अच्छी बात कही थी। उसने कहा कि वह सिर्फ एक चीज़ चाहता है, परमेश्वर के पास रहना, उसकी भलाई देखना। सोचो, आज तुम भी परमेश्वर के घर जा रहे हो। वहाँ गाने होंगे, दोस्त मिलेंगे, और परमेश्वर तुम्हारे बहुत पास होगा। यह कोई मुश्किल काम नहीं है, बस उसके पास जाना है, जैसे कोई अच्छे दोस्त के घर जाता है।
आपकी बारी
जब तुम कलीसिया में हो, एक गाना पूरे दिल से गाओ और परमेश्वर को धन्यवाद दो।
✦ दोपहर का पल
हे यहोवा परमेश्वर मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूँगा; मैं तेरे सब आश्चर्यकर्मों का वर्णन करूँगा।
भजन संहिता 9:1 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: दाऊद कहता है, मैं अपने पूरे मन से परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ, और सबको बताता हूँ कि उसने कितने अच्छे काम किए हैं।
आज रविवार है, और शायद तुम अभी परिवार के साथ खाना खा रहे हो, या चर्च से लौटे हो। रुककर सोचो, आज सुबह कौन सी अच्छी बात हुई। शायद कोई गाना अच्छा लगा, या किसी दोस्त ने मुस्कुरा कर देखा।
दाऊद ने कहा कि वह पूरे मन से परमेश्वर को धन्यवाद देगा। पूरे मन से मतलब सिर्फ मुँह से नहीं, दिल से भी। जैसे जब तुम्हें कोई तोहफा मिलता है, तो तुम सचमुच खुश होकर धन्यवाद कहते हो, वैसे ही परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
आपकी बारी
खाना खाते समय अपने परिवार को एक बात बताओ जिसके लिए तुम आज परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहते हो।
✩ दोपहर का पल
तब उसने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियाँ तोड़-तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को।
मत्ती 14:19 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: यीशु के पास बस पाँच रोटी और दो मछलियाँ थीं, फिर भी उन्होंने धन्यवाद दिया और सब हज़ारों लोगों का पेट भर गया।
सोचो, तुम बहुत भूखे हो और खाने को सिर्फ थोड़ा सा टिफिन है। पाँच हज़ार लोग घास पर बैठे थे, बिल्कुल तुम्हारे पिकनिक जैसा, और खाना बहुत कम था। सिर्फ पाँच रोटी, दो मछली।
यीशु ने वह थोड़ा सा खाना अपने हाथ में लिया। उन्होंने ऊपर देखा और परमेश्वर को धन्यवाद दिया। फिर रोटी तोड़ी, और तोड़ते-तोड़ते वह कम नहीं हुई, बल्कि सबके लिए काफी हो गई। जो थोड़ा था, यीशु के हाथ में बहुत बन गया।
आपकी बारी
आज घर पर अपने पास जो थोड़ा भी है, जैसे एक बिस्किट या खिलौना, उसे किसी भाई-बहन या दोस्त के साथ बाँट दो।
☾ संध्या का क्षण
“यहोवा तुझे आशीष दे और तेरी रक्षा करे: “यहोवा तुझ पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए, और तुझ पर अनुग्रह करे: “यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे, और तुझे शान्ति दे।
गिनती 6:24-26 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: परमेश्वर तुम्हें प्यार से आशीष देते हैं, तुम्हारी रक्षा करते हैं, और तुम्हें शांति से सोने देते हैं।
आज रविवार था, तुम गिरजाघर गए, गीत गाए, और परिवार के साथ समय बिताया। अब दिन खत्म हो रहा है, और खिड़की के बाहर अंधेरा हो रहा है। तुम्हारा शरीर थका हुआ है, पर तुम्हारा मन धीरे धीरे शांत हो रहा है।
इस पल में परमेश्वर तुम्हें एक प्यारी सी आशीष देना चाहते हैं। जैसे मम्मी पापा तुम्हें रात में गले लगाकर कहते हैं, अब सो जाओ, मैं यहीं हूँ, वैसे ही परमेश्वर तुम्हारे पास हैं। उसका चेहरा तुम्हारी ओर है, प्यार से, गुस्से से नहीं। तुम्हें कुछ भी साबित नहीं करना है, बस आराम करना है।
आपकी बारी
आज रात, बिस्तर पर लेटकर, धीरे से कहो, परमेश्वर, मुझे आशीष दें और मुझे शांति दें।
इन अंशों को बाइबल में पढ़ें
किसी अंश पर टैप करें और अपने माता-पिता या शिक्षक के साथ यहीं पढ़ें।
4एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊँ, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूँ। (भज. 6:8, भज. 23:6, फिलि. 3:13)
1हे यहोवा परमेश्वर मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूँगा; मैं तेरे सब आश्चर्यकर्मों का वर्णन करूँगा।
19तब उसने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियाँ तोड़-तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को।
24“यहोवा तुझे आशीष दे और तेरी रक्षा करे:
25“यहोवा तुझ पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए, और तुझ पर अनुग्रह करे:
26“यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे, और तुझे शान्ति दे।
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