7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 इतिहास 16

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या (1 इतिहास 16)

यह दिन इस्राएल के इतिहास का बहुत खास दिन था। परमेश्वर का सन्दूक, जो बहुत समय तक इधर-उधर भटकता रहा था, आखिरकार उस तम्बू में टिक गया जो दाऊद ने उसके लिए बनाया था। सन्दूक सिर्फ एक पेटी नहीं था, वह परमेश्वर की उपस्थिति का चिन्ह था। इसलिए जब वह आया, तो होमबलि और मेलबलि चढ़ाए गए, यानी परमेश्वर को भेंटें दी गईं जो कहती थीं, "हम आपके हैं।"

दाऊद ने लोगों को आशीर्वाद दिया और हर इस्राएली को खाना बाँटा, रोटी, माँस और किशमिश की टिकिया। सोचो, पूरी प्रजा साथ बैठकर खा रही है, क्योंकि परमेश्वर उनके बीच आ गए हैं। फिर दाऊद ने लेवियों को काम सौंपा, वे गाएँगे, बजाएँगे और परमेश्वर का धन्यवाद करेंगे। आसाप और उसके साथी संगीतकार बने, जबकि बनायाह और यहजीएल तुरही बजाने वाले याजक बने।

इसके बाद आता है एक लंबा गीत, जो आसाप को सौंपा गया। यह गीत परमेश्वर की बड़ाई करता है, उनके आश्चर्यकर्मों को याद करता है, और सबसे महत्वपूर्ण बात, उस वाचा को याद दिलाता है जो परमेश्वर ने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बाँधी थी, कनान देश देने की वाचा। गीत पूरी पृथ्वी को बुलाता है कि वे भी परमेश्वर का गीत गाएँ, क्योंकि वे सब देवताओं से बड़े और भययोग्य हैं। अंत में प्रजा "आमीन" कहती है, और दाऊद सबको आशीर्वाद देकर घर भेज देता है।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय दिखाता है कि आराधना कोई जल्दबाजी में किया गया काम नहीं था। दाऊद ने इसके लिए खास लोग ठहराए, खास काम बाँटे, और एक पूरा गीत तैयार करवाया। इससे पता चलता है कि परमेश्वर के पास आना कोई छोटी बात नहीं है, इसे सोच-समझकर, तैयारी के साथ करना चाहिए।

गीत में एक शब्द बार-बार आता है, "वाचा।" वाचा का मतलब है एक पक्का वादा, जो परमेश्वर ने खुद अपनी इच्छा से बाँधा, और जिसे वे निभाते हैं चाहे कुछ भी हो। परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था, और सैकड़ों साल बाद भी वे उस वादे को याद रखते हैं। यह बड़ी बात है, क्योंकि इंसान अक्सर अपने वादे भूल जाते हैं, पर परमेश्वर नहीं भूलते।

समान सूत्र

यह वाचा जो अब्राहम से शुरू हुई, वह आगे चलकर यीशु मसीह तक पहुँचती है। परमेश्वर ने अब्राहम से कहा था कि उसके वंश से सारी पृथ्वी आशीष पाएगी, और यही गीत भी कहता है कि "देश-देश के लोगों" को परमेश्वर की स्तुति करनी चाहिए, न कि सिर्फ इस्राएल को। यीशु मसीह में वह वादा पूरा होता है, क्योंकि उनके द्वारा हर जाति के लोग परमेश्वर के पास आ सकते हैं।

और वह सन्दूक, जो परमेश्वर की उपस्थिति का चिन्ह था, वह भी एक संकेत है। बाद में यीशु मसीह खुद परमेश्वर की उपस्थिति बनकर हमारे बीच आए। उनमें हमें वही मिलता है जो इस्राएलियों ने उस दिन अनुभव किया, परमेश्वर पास हैं, और इसलिए आनंद और धन्यवाद भी पास है।

तुम्हारे लिए

शायद तुम सोचो कि आराधना का मतलब सिर्फ गाना गाना है। पर इस अध्याय से पता चलता है कि आराधना में याद रखना भी शामिल है, यह याद रखना कि परमेश्वर ने क्या किया है और क्या वादा किया है। कभी-कभी हम परमेश्वर के काम भूल जाते हैं, खासकर जब दिन मुश्किल हो। इस गीत की तरह, तुम भी एक छोटी सूची बना सकते हो उन बातों की जिनके लिए तुम परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहते हो। यह तुम्हारी अपनी "आसाप की स्तुति" हो सकती है।

चर्चा के लिए

दाऊद ने आराधना के लिए इतनी तैयारी और योजना क्यों की होगी? क्या तुम्हें लगता है आराधना में तैयारी ज़रूरी है?

वाचा का मतलब है एक पक्का वादा। तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा वादा है जिसे परमेश्वर ने निभाया हो, या जिसे निभाते हुए तुम देखना चाहते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आप वही हैं जिन्होंने अब्राहम से वादा किया और उसे निभाया। धन्यवाद कि आप आज भी अपने वादे नहीं भूलते। हमें सिखाइए कि हम आपके कामों को याद रखें और सच्चे दिल से आपका धन्यवाद करें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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1 इतिहास 16 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 इतिहास 16 किस विषय में है?
यह दिन इस्राएल के इतिहास का बहुत खास दिन था। परमेश्वर का सन्दूक, जो बहुत समय तक इधर-उधर भटकता रहा था, आखिरकार उस तम्बू में टिक गया जो दाऊद ने उसके लिए बनाया था। सन्दूक सिर्फ एक पेटी नहीं था, वह परमेश्वर की उपस्थिति का चिन्ह था। इसलिए जब वह आया, तो होमबलि और मेलबलि चढ़ाए गए, यानी परमेश्वर को भेंटें दी गईं जो कहती थीं, "हम आपके हैं।"
1 इतिहास 16 क्या कहता है?
इसके बाद आता है एक लंबा गीत, जो आसाप को सौंपा गया। यह गीत परमेश्वर की बड़ाई करता है, उनके आश्चर्यकर्मों को याद करता है, और सबसे महत्वपूर्ण बात, उस वाचा को याद दिलाता है जो परमेश्वर ने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बाँधी थी, कनान देश देने की वाचा। गीत पूरी पृथ्वी को बुलाता है कि वे भी परमेश्वर का गीत गाएँ, क्योंकि वे सब देवताओं से बड़े और भययोग्य हैं। अंत में प्रजा "आमीन" कहती है, और दाऊद सबको आशीर्वाद देकर घर भेज देता है।
1 इतिहास 16 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
गीत में एक शब्द बार-बार आता है, "वाचा।" वाचा का मतलब है एक पक्का वादा, जो परमेश्वर ने खुद अपनी इच्छा से बाँधा, और जिसे वे निभाते हैं चाहे कुछ भी हो। परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था, और सैकड़ों साल बाद भी वे उस वादे को याद रखते हैं। यह बड़ी बात है, क्योंकि इंसान अक्सर अपने वादे भूल जाते हैं, पर परमेश्वर नहीं भूलते।
बच्चे 1 इतिहास 16 से क्या सीख सकते हैं?
और वह सन्दूक, जो परमेश्वर की उपस्थिति का चिन्ह था, वह भी एक संकेत है। बाद में यीशु मसीह खुद परमेश्वर की उपस्थिति बनकर हमारे बीच आए। उनमें हमें वही मिलता है जो इस्राएलियों ने उस दिन अनुभव किया, परमेश्वर पास हैं, और इसलिए आनंद और धन्यवाद भी पास है।
1 इतिहास 16 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दाऊद ने आराधना के लिए इतनी तैयारी और योजना क्यों की होगी? क्या तुम्हें लगता है आराधना में तैयारी ज़रूरी है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 35

संदूक यरूशलेम पहुँच चुका था, जश्न का दिन था, और उसी गीत के बीच दाऊद कहता है, "हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हमारा उद्धार कर, और हमको इकट्ठा करके अन्यजातियों से छुड़ा।" सबसे बड़ी खुशी के पल में भी उसे याद था कि अपने लोग अब भी बिखरे हैं। स्तुति के बीच में माँगना शर्म की बात नहीं। और उद्धार का मकसद देख: कि हम उसके पवित्र नाम का धन्यवाद करें।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

सन्दूक अभी-अभी यरूशलेम पहुँचा था, दाऊद का दिल खुशी से भरा था, और उसी घड़ी वह गाता है: "जाति जाति में उसके महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्यकर्मों का वर्णन करो।" जो कुछ परमेश्वर ने तेरे साथ किया, वह सिर्फ तेरे कमरे की बात नहीं। किसे बताया है तूने इस हफ्ते?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

उस समय तो वे गिनती में थोड़े थे, वरन् बहुत ही थोड़े और उस देश में परदेशी थे।" दाऊद यह गीत तब गाता है जब सन्दूक यरूशलेम पहुँच चुका है, जब सब कुछ भरा-पूरा दिखता है। फिर भी वह उन दिनों को नहीं भूलता जब वे मुट्ठी भर लोग थे, बेघर से। तुम्हारी गिनती कम हो सकती है, तुम्हारी जगह पराई लग सकती है, पर परमेश्वर की वाचा गिनती नहीं गिनती।

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