यूहन्ना 14
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
यीशु अपने चेलों के साथ बैठे थे। यह एक खास रात थी, आखिरी रात जो वे साथ बिताने वाले थे। चेलों के चेहरे पर डर साफ दिखता था। यीशु ने उनसे कहा, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो, मुझ पर भी विश्वास रखो।" उन्होंने समझाया कि वे अपने पिता के घर में उनके लिए जगह तैयार करने जा रहे हैं, और फिर वापस आकर उन्हें अपने साथ ले जाएँगे।
थोमा उलझन में था। उसने पूछा, "हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहाँ जाता है, तो मार्ग कैसे जानें?" यीशु ने शांति से उत्तर दिया, "मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।" फिर फिलिप्पुस ने भी एक सवाल पूछा, "हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे, यही हमारे लिये बहुत है।" यीशु ने उसकी ओर देखा और कहा, "मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है।"
फिर यीशु ने एक बड़ा वादा किया। वे पिता से विनती करेंगे, और पिता एक सहायक भेजेंगे, जो हमेशा उनके साथ रहेगा। यह सहायक पवित्र आत्मा है। यीशु ने कहा, "मैं तुम्हें अनाथ न छोड़ूँगा, मैं तुम्हारे पास वापस आता हूँ।" आखिर में उन्होंने अपने चेलों को एक तोहफा दिया, शांति। "मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूँ, तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।"
What Does This Mean?
चेले डरे हुए थे क्योंकि यीशु उन्हें छोड़कर जाने वाले थे। क्या तुमने कभी किसी को बहुत याद किया है, शायद मम्मी या पापा के दूर जाने पर डर लगा हो? चेलों को भी ऐसा ही लगा। पर यीशु ने उन्हें झूठी तसल्ली नहीं दी। उन्होंने सच बताया, "मैं जाता हूँ", पर साथ ही वादा किया, "मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा।" यही संदेश है। यीशु हमेशा अपना वादा निभाते हैं। वे रास्ता बनाते हैं, और वे खुद ही वह रास्ता हैं जो हमें परमेश्वर तक ले जाता है। कोई और दरवाजा नहीं, सिर्फ यीशु के द्वारा हम पिता के घर पहुँच सकते हैं।
The Common Thread
यह पूरी बाइबल की एक बड़ी कहानी का हिस्सा है। परमेश्वर हमेशा अपने लोगों के साथ रहना चाहते हैं। शुरू से ही, बगीचे में, परमेश्वर अपने लोगों के साथ चलते थे। फिर पाप ने दूरी बना दी। पर यीशु आए ताकि रास्ता फिर से खुल जाए। वे खुद मार्ग हैं, सत्य हैं, और जीवन हैं। और जब वे ऊपर जाने वाले थे, उन्होंने वादा किया कि पवित्र आत्मा भेजेंगे, ताकि हर विश्वासी के पास हमेशा परमेश्वर की उपस्थिति रहे। यह वही वादा है जो परमेश्वर हमेशा से करते आए हैं, "मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।"
For You
जब तुम्हें डर लगे, अंधेरे कमरे में या नए स्कूल के पहले दिन, तुम यीशु की यही बात याद कर सकते हो, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो।" तुम उनसे बात कर सकते हो, जैसे थोमा और फिलिप्पुस ने की। जो समझ नहीं आता, उनसे पूछ सकते हो। और जब कोई दोस्त कुछ दिनों के लिए दूर जाए, तुम उसे याद दिला सकते हो कि परमेश्वर हमेशा साथ रहते हैं, भले कोई इंसान पास न हो।
Talk About It
अगर तुम थोमा या फिलिप्पुस की जगह होते, तुम यीशु से क्या पूछते?
यीशु ने कहा, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो।" कब तुम्हारा मन सबसे ज्यादा डरता है, और उस समय तुम क्या कर सकते हो?
Praying Together
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते। जब हमें डर लगे, हमें याद दिलाइए कि आप ही मार्ग हैं, सत्य हैं, और जीवन हैं। हमें अपनी शांति दीजिए, वह शांति जो दुनिया नहीं दे सकती। आमीन।
यूहन्ना 14 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
यूहन्ना 14 किस विषय में है?
यूहन्ना 14 क्या कहता है?
यूहन्ना 14 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे यूहन्ना 14 से क्या सीख सकते हैं?
यूहन्ना 14 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
यीशु ने एक छोटा सा अंतर बताया जो सब कुछ बदल देता है: "वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।" साथ रहना अच्छा है, पर भीतर रहना गहरा है। संसार उसे इसलिए नहीं पहचानता क्योंकि वह उसे देख नहीं सकता। और तू? क्या तू आत्मा को सिर्फ अपने पास रखता है, या उसे अपने भीतर, अपने डर और निर्णयों तक आने देता है?
यीशु यह नहीं कहते कि वह तुम्हें कोई पता भेज देंगे। वह कहते हैं, "फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा, कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो।" वह खुद लौटकर आएँगे। स्वर्ग की सबसे बड़ी बात सोने की गलियाँ नहीं, बल्कि यह है कि वहाँ वही होंगे जिन्होंने तुमसे प्रेम किया। आज जो अकेलापन तुम्हें काट रहा है, उसका अंत एक जगह नहीं, एक व्यक्ति है।
यहूदा का सवाल बहुत ईमानदार है, "हे प्रभु, क्या हुआ कि तू अपने आप को हम पर प्रगट करना चाहता है और संसार पर नहीं?" वह चाहता था कि यीशु सबके सामने चमक जाएँ, ताकि किसी को शक न रहे। पर यीशु का जवाब कोई तमाशा नहीं था, बल्कि एक घर था। वे उसी के पास आकर रहते हैं जो उनके वचन को मानता है। सोचो, आज तुम्हारे दिल का दरवाज़ा कितना खुला है?
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