7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 इतिहास 27

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

राजा दाऊद बूढ़े हो गए थे। पर उन्होंने अपना राज्य ऐसे ही नहीं छोड़ दिया। उन्होंने सब कुछ व्यवस्थित किया, जैसे एक अच्छा सेनापति अपनी सेना को सजाता है।

दाऊद ने इस्राएल की सेना को बारह दलों में बाँटा। हर दल में चौबीस हज़ार सैनिक थे। हर महीने एक नया दल राजा की सेवा के लिए आता था, और पुराना दल घर लौट जाता था। सोचो, हर महीने चौबीस हज़ार लोग! उनके सेनापतियों के नाम भी लिखे हैं, जैसे याशोबाम, बनायाह और असाहेल।

इनमें से एक नाम खास है। बनायाह वह वीर था जो तीसों सबसे बहादुर शूरवीरों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता था। सोचो उसके बारे में, वह इतना बहादुर था कि उसकी बहादुरी की कहानियाँ पूरे इस्राएल में सुनाई जाती थीं।

सेना के बाद, दाऊद ने हर गोत्र का एक प्रधान भी ठहराया, यानी हर परिवार-समूह का एक अगुवा। रूबेन का एक, शिमोन का एक, यहूदा का एक, और ऐसे ही बाकी सबका। हर एक अपने लोगों की देखभाल करता था।

फिर एक दिलचस्प बात हुई। दाऊद ने योआब को आज्ञा दी कि इस्राएल के सब लोगों की गिनती करे। पर परमेश्वर इससे नाराज़ हुए। यहोवा ने पहले वादा किया था कि इस्राएल आकाश के तारों जितने अनगिनत होंगे। दाऊद जैसे उस वादे पर भरोसा करने की जगह, गिनकर अपनी ताकत नापना चाहता था। इसलिए गिनती अधूरी रह गई और राजा के इतिहास में भी नहीं लिखी गई।

इसके बाद पाठ हमें दिखाता है कि दाऊद के पास कितना कुछ था। खेत जोतनेवाले, अंगूर के बाग़ों की देखभाल करनेवाले, जैतून के पेड़ों के अधिकारी, ऊँट, गधे, भेड़-बकरियाँ, सबके अपने-अपने अधिकारी थे। और दाऊद के पास बुद्धिमान सलाहकार भी थे, जैसे अहीतोपेल और हूशै, जो राजा का मित्र कहलाता था।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि दाऊद एक सोच-समझकर काम करनेवाला राजा था। उसने अपनी सेना, अपने गोत्रों और अपनी संपत्ति का ध्यान रखा, ताकि उसके बाद राज्य ठीक से चलता रहे।

पर सबसे ज़रूरी बात बीच में छिपी है, गिनती की घटना में। दाऊद, जो इतना बुद्धिमान राजा था, एक पल के लिए भूल गया कि उसकी ताकत संख्याओं में नहीं, परमेश्वर के वादे में है। और जब उसने अपनी ताकत पर भरोसा करने की कोशिश की, परमेश्वर को यह पसंद नहीं आया।

यह हमें सिखाता है, बड़े होने पर, बहुत सारी चीज़ें पाने पर भी, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारी असली ताकत हैं।

सिलसिला

परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था कि उसके वंशज आकाश के तारों जितने अनगिनत होंगे। दाऊद के समय में यह वादा पूरा होता दिख रहा था, इतने लोग थे कि गिनना भी मुश्किल था।

यही परमेश्वर बाद में एक और वादा पूरा करेंगे, दाऊद के वंश से एक राजा आएगा जो हमेशा राज्य करेगा। वह राजा यीशु मसीह हैं। दाऊद के पास सेनापति और सलाहकार थे, पर यीशु के पास कोई तलवार नहीं थी। उन्होंने अपनी ताकत परमेश्वर पिता पर रखी, हमेशा।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हारे पास भी ऐसी चीज़ें हैं जिन पर तुम्हें गर्व होता है? शायद तुम्हारी दौड़ने की रफ़्तार, या तुम्हारे खिलौने, या तुम्हारे दोस्त। ये सब अच्छी चीज़ें हैं। पर याद रखो, असली भरोसा इन चीज़ों पर नहीं, परमेश्वर पर रखना है।

आज तुम प्रार्थना कर सकते हो, "परमेश्वर, मुझे अपनी ताकत पर नहीं, आप पर भरोसा करना सिखाइए।" यह छोटी सी प्रार्थना बड़ी बात सिखाती है।

बात करें

अगर तुम दाऊद के सेनापतियों में से एक होते, तो कौन सा महीना चुनते, और क्यों?

दाऊद ने गिनती करके क्या भूल की थी? तुम अपनी ताकत पर कब भरोसा करने लगते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप ही हमारी असली ताकत हैं। हमें यह याद दिलाइए कि हमारे पास जो कुछ भी अच्छा है, वह आपकी ओर से है। हमें अपने ऊपर नहीं, हमेशा आप पर भरोसा करना सिखाइए। यीशु के नाम में, आमीन।

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1 इतिहास 27 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 इतिहास 27 किस विषय में है?
राजा दाऊद बूढ़े हो गए थे। पर उन्होंने अपना राज्य ऐसे ही नहीं छोड़ दिया। उन्होंने सब कुछ व्यवस्थित किया, जैसे एक अच्छा सेनापति अपनी सेना को सजाता है।
1 इतिहास 27 क्या कहता है?
सेना के बाद, दाऊद ने हर गोत्र का एक प्रधान भी ठहराया, यानी हर परिवार-समूह का एक अगुवा। रूबेन का एक, शिमोन का एक, यहूदा का एक, और ऐसे ही बाकी सबका। हर एक अपने लोगों की देखभाल करता था।
1 इतिहास 27 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि दाऊद एक सोच-समझकर काम करनेवाला राजा था। उसने अपनी सेना, अपने गोत्रों और अपनी संपत्ति का ध्यान रखा, ताकि उसके बाद राज्य ठीक से चलता रहे।
बच्चे 1 इतिहास 27 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था कि उसके वंशज आकाश के तारों जितने अनगिनत होंगे। दाऊद के समय में यह वादा पूरा होता दिख रहा था, इतने लोग थे कि गिनना भी मुश्किल था।
1 इतिहास 27 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
आज तुम प्रार्थना कर सकते हो, "परमेश्वर, मुझे अपनी ताकत पर नहीं, आप पर भरोसा करना सिखाइए।" यह छोटी सी प्रार्थना बड़ी बात सिखाती है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

दाऊद के राज्य में ऊँटों की देखभाल एक इश्माएली ओबील के हाथ में थी, और गदहियों की देखभाल मेरोनोतवासी येहदयाह करता था। सोचिए, राजा के पशुओं की सूची में भी नाम दर्ज हैं। परमेश्वर के काम में कोई भूमिका छोटी नहीं। शायद आज आपका काम किसी को दिखाई न दे, पर उसकी नज़र में आपका नाम लिखा है।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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