6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 इतिहास 11

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यह अध्याय एक ऐसे पल से शुरू होता है, जिसका इस्राएल बहुत समय से इंतज़ार कर रहा था। सारे इस्राएली हेब्रोन में दाऊद के पास इकट्ठा होते हैं और कहते हैं, "हम लोग और तू एक ही हड्डी और माँस हैं।" वे याद दिलाते हैं कि राजा शाऊल के समय भी असली अगुआ दाऊद ही था, और परमेश्वर यहोवा ने स्वयं कहा था कि दाऊद उनकी प्रजा का चरवाहा और प्रधान होगा। इसलिए वे दाऊद का राजा होने के लिए अभिषेक करते हैं, तेल डालकर। पर ध्यान दो, यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं था। लेखक लिखता है कि यह "यहोवा के वचन के अनुसार" हुआ, जो उसने पहले ही शमूएल के द्वारा कहा था। परमेश्वर की योजना पूरी हो रही थी।

इसके बाद दाऊद यरूशलेम की ओर बढ़ता है, जिसे तब यबूस कहा जाता था। वहाँ के निवासी यबूसी लोग बड़े आत्मविश्वास से कहते हैं, "तू यहाँ आने नहीं पाएगा।" पर दाऊद हार नहीं मानता और सिय्योन नामक गढ़ को ले लेता है। वह शहर उसी का नाम लेकर "दाऊदपुर" कहलाने लगता है। योआब, जो सबसे पहले यबूसियों पर चढ़ा, सेनापति बन जाता है।

फिर एक लंबी सूची आती है, दाऊद के वीरों की सूची। यह सिर्फ नाम नहीं हैं, हर नाम के पीछे एक कहानी है। याशोबाम ने तीन सौ पुरुषों को अकेले मार डाला। एलीआजर एक जौ के खेत में अकेला खड़ा रहा, जब बाकी सब भाग गए थे। और तीन वीरों की वह कहानी, जो शायद सबसे सुंदर है इस अध्याय में, वे पलिश्तियों की छावनी तोड़कर बैतलहम के कुएँ से पानी ले आए, सिर्फ इसलिए क्योंकि दाऊद ने एक इच्छा जताई थी। पर दाऊद वह पानी पीता नहीं, वह उसे यहोवा के सामने उण्डेल देता है, और कहता है कि यह पानी नहीं, इन लोगों का खून है, क्योंकि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाली थी।

इसका मतलब क्या है?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि दाऊद अकेला राजा नहीं बना। पूरा इस्राएल एक साथ खड़ा हुआ, और अनगिनत वीरों ने अपनी जान दाँव पर लगाकर उसका साथ दिया। पर इससे भी गहरी बात यह है कि यह सब परमेश्वर के वचन के अनुसार हुआ। परमेश्वर ने बहुत पहले कहा था कि दाऊद चरवाहा और प्रधान होगा, और अब वह वचन पूरा हो रहा है।

दाऊद का पानी न पीना भी कुछ सिखाता है। वह समझता था कि कुछ चीज़ें इतनी कीमती हैं कि उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। जब कोई अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ देता है, तो उसे सिर्फ "धन्यवाद" कहकर भूल नहीं जाना चाहिए।

समान सूत्र

दाऊद को चरवाहा और प्रधान कहा गया है, जो परमेश्वर की प्रजा की रखवाली करेगा। बाइबल में आगे चलकर हम पढ़ते हैं कि यीशु मसीह को भी "इस्राएल का चरवाहा" कहा गया (मत्ती 2:6 में इसी घटना का हवाला है)। दाऊद एक अच्छा राजा था, पर अधूरा। वह गलतियाँ भी करता था। यीशु मसीह वह राजा हैं, जो पूरी तरह से अपनी प्रजा के लिए अपना खून बहाते हैं, ठीक वैसे जैसे वे तीन वीर अपना खून बहाने को तैयार थे। फर्क यह है कि यीशु मसीह ने अपना खून सिर्फ पानी लाने के लिए नहीं, बल्कि हमें बचाने के लिए बहाया।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी सोचा कि तुम्हारे आसपास कोई तुम्हारे लिए इतना कुछ करता है, और तुम उसे हल्के में ले लेते हो? दाऊद ने उन वीरों की कुर्बानी को गंभीरता से लिया। शायद तुम भी सोच सकते हो, कौन है जो तुम्हारे लिए मेहनत करता है, और क्या तुम उसे सच में धन्यवाद देते हो।

चर्चा के लिए

दाऊद ने पानी पीने से इनकार क्यों किया, जबकि वह प्यासा था और वीरों ने इतनी मेहनत से वह पानी लाया था?

क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर आज भी अपने वचन पूरे करते हैं, जैसे उन्होंने दाऊद के साथ किया? किस तरह?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु, आप अपने वचन को निभाते हैं, जैसे आपने दाऊद के साथ निभाया। धन्यवाद कि यीशु मसीह हमारे सच्चे चरवाहे हैं। हमें सिखाइए कि जो लोग हमारे लिए अपना कुछ देते हैं, उन्हें हम हल्के में न लें। आमीन।

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1 इतिहास 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 इतिहास 11 किस विषय में है?
यह अध्याय एक ऐसे पल से शुरू होता है, जिसका इस्राएल बहुत समय से इंतज़ार कर रहा था। सारे इस्राएली हेब्रोन में दाऊद के पास इकट्ठा होते हैं और कहते हैं, "हम लोग और तू एक ही हड्डी और माँस हैं।" वे याद दिलाते हैं कि राजा शाऊल के समय भी असली अगुआ दाऊद ही था, और परमेश्वर यहोवा ने स्वयं कहा था कि दाऊद उनकी प्रजा का चरवाहा और प्रधान होगा। इसलिए वे दाऊद का राजा होने के लिए अभिषेक करते हैं, तेल डालकर। पर ध्यान दो, यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं था। लेखक लिखता है कि यह "यहोवा के वचन के अनुसार" हुआ, जो उसने पहले ही शमूएल के द्वारा कहा था। परमेश्वर की योजना पूरी हो रही थी।
1 इतिहास 11 क्या कहता है?
फिर एक लंबी सूची आती है, दाऊद के वीरों की सूची। यह सिर्फ नाम नहीं हैं, हर नाम के पीछे एक कहानी है। याशोबाम ने तीन सौ पुरुषों को अकेले मार डाला। एलीआजर एक जौ के खेत में अकेला खड़ा रहा, जब बाकी सब भाग गए थे। और तीन वीरों की वह कहानी, जो शायद सबसे सुंदर है इस अध्याय में, वे पलिश्तियों की छावनी तोड़कर बैतलहम के कुएँ से पानी ले आए, सिर्फ इसलिए क्योंकि दाऊद ने एक इच्छा जताई थी। पर दाऊद वह पानी पीता नहीं, वह उसे यहोवा के सामने उण्डेल देता है, और कहता है कि यह पानी नहीं, इन लोगों का खून है, क्योंकि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाली थी।
1 इतिहास 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दाऊद का पानी न पीना भी कुछ सिखाता है। वह समझता था कि कुछ चीज़ें इतनी कीमती हैं कि उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। जब कोई अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ देता है, तो उसे सिर्फ "धन्यवाद" कहकर भूल नहीं जाना चाहिए।
बच्चे 1 इतिहास 11 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुमने कभी सोचा कि तुम्हारे आसपास कोई तुम्हारे लिए इतना कुछ करता है, और तुम उसे हल्के में ले लेते हो? दाऊद ने उन वीरों की कुर्बानी को गंभीरता से लिया। शायद तुम भी सोच सकते हो, कौन है जो तुम्हारे लिए मेहनत करता है, और क्या तुम उसे सच में धन्यवाद देते हो।
1 इतिहास 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर आज भी अपने वचन पूरे करते हैं, जैसे उन्होंने दाऊद के साथ किया? किस तरह?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

दाऊद के राजा बनने का वचन परमेश्वर ने पहले ही दे दिया था, फिर भी लिखा है कि उसके वीरों ने "उसके राज्य में उसका साथ दिया।" परमेश्वर की प्रतिज्ञा पूरी होने के लिए लोगों की ज़रूरत पड़ी। किसी के बुलाहट में तू कहाँ खड़ा है? जिनके नाम इतिहास में लिखे गए, वे वही थे जो किसी और को मज़बूत करने आए थे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

अबीशै के बारे में लिखा है, "तीनों में वह दो से अधिक प्रतिष्ठित हुआ और उनका प्रधान हुआ, परन्तु मुख्य तीन के बराबर न ठहरा।" कितना अजीब सम्मान है यह। बड़ा, फिर भी सबसे बड़ा नहीं। पर परमेश्वर ने उसका नाम अपने वचन में लिख रखा। शायद तुम भी किसी की छाया में खड़े हो। याद रखो, जो तुम्हें कोई नहीं गिनता, वह उसे गिनता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

उस समय दाऊद गढ़ में था, और पलिश्तियों की चौकी बैतलहम में थी।" गढ़ में दाऊद सुरक्षित था, पर उसका अपना गाँव दुश्मन के कब्जे में। इसीलिए उसकी प्यास पानी की नहीं, घर की थी। तेरे जीवन में भी कोई ऐसी जगह है, जहाँ तू अब सुरक्षित है, पर जो तुझे प्यारा था वह अब भी शत्रु के हाथ में है? वह तड़प परमेश्वर से छिपी नहीं है।

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