1 कुरिन्थियों 10
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पौलुस एक बड़े बंदरगाह-शहर कुरिन्थ की कलीसिया को चिट्ठी लिख रहा है। उस शहर की हर गली में मूर्तियों के मंदिर थे। बाज़ार में जो मांस बिकता था, वह अक्सर पहले किसी मूर्ति के सामने चढ़ाया जा चुका होता था। वहाँ के मसीही उलझन में थे: क्या हम यह खा सकते हैं? और अगर कोई पड़ोसी हमें खाने पर बुलाए, तो क्या करें?
पौलुस जवाब देने से पहले पीछे की ओर देखता है, बहुत पीछे। वह इस्राएल के लोगों की याद दिलाता है, जो मिस्र से निकले थे। ध्यान दो कि वह "सब" शब्द कितनी बार दोहराता है: सब बादल के नीचे थे, सब समुद्र के बीच से पार हो गए, सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया, सब ने एक ही आत्मिक जल पीया। और उस चट्टान के बारे में वह एक चौंकाने वाली बात कहता है: "और वह चट्टान मसीह था।" यानी वे लोग उसी मसीह से जीते थे जिससे हम जीते हैं।
फिर आता है एक छोटा-सा शब्द जो सब कुछ बदल देता है: "परन्तु"। परमेश्वर उनमें से बहुतों से प्रसन्न न थे, और वे जंगल में ढेर हो गए। उन्होंने लालच किया, मूरतें पूजीं, प्रभु को परखा, कुड़कुड़ाए। पौलुस इसे छिपाता नहीं। वह लिखता है कि एक ही दिन में तेईस हज़ार लोग मर गए, और कुछ साँपों के द्वारा नाश हुए। यह पढ़ना आसान नहीं है। पौलुस कहता है कि ये बातें हमारे लिए दृष्टान्त और चेतावनी बनकर लिखी गईं।
इसके बाद वह कहता है: जो सोचता है "मैं स्थिर हूँ", वह चौकस रहे। और उसी सांस में एक बहुत बड़ा वादा: परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं, वे तुम्हें तुम्हारी ताकत से बाहर परीक्षा में नहीं पड़ने देंगे, और परीक्षा के साथ निकलने का रास्ता भी देंगे।
अंत में पौलुस उस मांस के सवाल पर लौटता है। प्रभु भोज की रोटी और कटोरा हमें मसीह से और एक-दूसरे से जोड़ते हैं, इसलिए तुम एक ही समय प्रभु की मेज़ और दुष्टात्माओं की मेज़ पर नहीं बैठ सकते। बाज़ार का मांस? खा लो, धरती और उसकी भरपूरी प्रभु की है। पर अगर कोई कहे कि यह मूरत को चढ़ाया गया था, तो उसके मन का खयाल रखते हुए मत खाओ। "कोई अपनी ही भलाई को न ढूँढ़े वरन् औरों की।"
इसका अर्थ क्या है?
पौलुस दो बातें एक साथ कहता है, और वे दोनों ज़रूरी हैं। पहली: शुरुआत अच्छी होना काफ़ी नहीं है। इस्राएल के लोगों ने समुद्र दो भागों में बँटता देखा, आकाश से रोटी खाई, चट्टान से पानी पिया, और फिर भी उनका दिल कहीं और चला गया। बपतिस्मा, कलीसिया, याद की गई आयतें, ये सब बहुत बड़ी बातें हैं, मगर ये ताबीज़ नहीं हैं। परमेश्वर के साथ चलना रोज़ का रिश्ता है।
दूसरी: यह डराने के लिए नहीं लिखा गया। पौलुस चेतावनी के तुरंत बाद कहता है कि परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं और हर परीक्षा में निकलने का रास्ता भी बनाते हैं। सावधान रहना और भरोसा रखना, ये एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं।
ईमानदारी से एक बात: वे कठोर सज़ाएँ पढ़कर मन में सवाल उठता है, और मेरे पास हर सवाल का पूरा जवाब नहीं है। पौलुस भी सब कुछ समझा नहीं देता। वह सिर्फ़ कहता है: यह मत भूलो कि परमेश्वर को हल्के में लेना कोई छोटी बात नहीं।
मुख्य सूत्र
"वह चट्टान मसीह था।" यही इस अध्याय की सबसे गहरी बात है। जंगल में जो चट्टान पानी देती थी, वह अकेली नहीं थी; उसके पीछे वही परमेश्वर का पुत्र था जो बाद में मनुष्य बनकर आया। इस्राएल पानी और रोटी पर जीता था; हम रोटी और कटोरे पर, जो यीशु मसीह की देह और लहू की सहभागिता है, यानी उनकी मृत्यु में हिस्सेदारी।
और वह रोटी एक ही है। इसलिए, पौलुस कहता है, "हम भी जो बहुत हैं, एक देह हैं।" मसीह के पास आना कभी अकेले का मामला नहीं होता।
तुम्हारे लिए
पौलुस का सबसे व्यावहारिक वाक्य यह है: "चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो।" खाना-पीना भी। मतलब, विश्वास सिर्फ़ प्रार्थना के मिनटों में नहीं रहता, वह खेल के मैदान में, स्कूल के बेंच पर, मोबाइल की स्क्रीन पर भी होता है।
और एक कठिन सवाल: कभी-कभी कोई चीज़ करना तुम्हारे लिए ठीक है, पर तुम्हारे साथ वाले के लिए मुश्किल। वह मज़ाक, वह वीडियो, वह बात जो पीठ पीछे कही जाती है। पौलुस कहता है: अपनी आज़ादी छोड़ देना कमज़ोरी नहीं, प्रेम है। और अगर तुम लड़खड़ा गए हो, तो याद रखो कि परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं। वे रास्ता बनाते हैं।
इस पर बात करो
कुड़कुड़ाना इतनी बड़ी बात क्यों है कि पौलुस उसे मूर्तिपूजा के साथ एक ही सूची में रखता है?
तुम्हारे जीवन में ऐसी कोई बात है जो तुम्हारे लिए ठीक है, पर तुम किसी दोस्त की खातिर छोड़ सकते हो?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु यीशु, आप जंगल की चट्टान की तरह हमारे साथ-साथ चलते हैं। जब मैं सोचूँ कि मैं मज़बूत हूँ, तब मुझे सावधान करें। जब मैं गिरने के करीब हूँ, तब मुझे निकलने का रास्ता दिखाएँ। और मुझे सिखाएँ कि मैं खाते-पीते, खेलते-पढ़ते, सब कुछ आपकी महिमा के लिए करूँ। आमीन।
1 कुरिन्थियों 10 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 कुरिन्थियों 10 किस विषय में है?
1 कुरिन्थियों 10 क्या कहता है?
1 कुरिन्थियों 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 कुरिन्थियों 10 से क्या सीख सकते हैं?
1 कुरिन्थियों 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
इस्राएल के पास मन्ना था, हर सुबह ताज़ा, फिर भी उनका मन मिस्र के मांस पर लगा रहा। कमी नहीं थी, भूख गलत थी। पौलुस कहता है, "ये बातें उनके लिए दृष्टान्त ठहरीं और हमारी चेतावनी के लिए लिखी गईं कि हम उनके समान बुरी वस्तुओं की लालसा न करें।"
सोचो, आज तुम्हारी थाली में परमेश्वर ने जो रखा है, उसे धन्यवाद के साथ खाते हो, या आँखें किसी और की थाली में हैं? उनकी कहानी हमारे लिए आईना बन गई।
पौलुस इस्राएलियों की यात्रा की बात कर रहा है, कि उन सब ने "एक ही आत्मिक चट्टान से पीया, जो उनके साथ-साथ चलती थी, और वह चट्टान मसीह था।"
सोचिए, जंगल की तपती रेत में मसीह उनके साथ-साथ चल रहा था। वह पीछे नहीं रह गया, आगे नहीं बढ़ गया, बस साथ। आज भी वैसा ही है। आपकी थकान भरी राह में वह चट्टान आपके क़दम से क़दम मिलाकर चल रही है, और उसमें से जीवन का जल बहता है। क्या आपने आज उससे पीया?
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