3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 कुरिन्थियों 10

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बहुत, बहुत पहले की बात है। रेगिस्तान गरम था। रेत भी गरम थी। और उस रेत पर परमेश्वर के लोग चल रहे थे। बहुत सारे लोग। बच्चे भी, माँएँ भी, दादा-दादी भी।

ऊपर आकाश में एक बड़ा बादल था। वह बादल उनके साथ-साथ चलता था। बादल के नीचे छाया थी, ठंडी छाया। धूप उन्हें नहीं जलाती थी। वह बादल परमेश्वर ने दिया था।

और सामने? सामने एक बड़ा समुद्र था। पानी, पानी, और बहुत पानी। लोग डर गए। पर परमेश्वर ने पानी को दो भागों में कर दिया। बीच में सूखा रास्ता बन गया। और सब लोग पार हो गए। सब के सब!

फिर उन्हें भूख लगी। सुबह हुई, और ज़मीन पर सफ़ेद-सफ़ेद रोटी पड़ी थी। मीठी रोटी, ऊपर से आई हुई। सब ने खाई।

फिर उन्हें प्यास लगी। वहाँ एक बड़ी चट्टान थी। और उस चट्टान से पानी निकल आया! ठंडा, साफ़ पानी, छल-छल करता हुआ। सब ने पिया। सब ने!

इसका क्या अर्थ है?

परमेश्वर ने छाया दी। रास्ता दिया। रोटी दी। पानी दिया।

लेकिन फिर कुछ दुख की बात हुई। लोग भूल गए। वे कुड़कुड़ाने लगे। "यह अच्छा नहीं है," वे बोले। "हमें यह पसंद नहीं।" हर दिन शिकायत, हर दिन कुड़कुड़। परमेश्वर को यह अच्छा नहीं लगा।

पौलुस नाम का एक आदमी बहुत बाद में यह कहानी लिखता है। वह कहता है: यह कहानी याद रखो। कुड़कुड़ाओ नहीं। धन्यवाद कहो।

और वह एक और सुंदर बात कहता है। जब कोई काम बहुत मुश्किल लगे, तब भी डरो नहीं। परमेश्वर अपने बच्चों को कभी अकेला नहीं छोड़ते। वे रास्ता बना देते हैं, जैसे समुद्र के बीच में बनाया था।

एक ही धागा

और अब सुनो, सबसे अच्छी बात।

वह बड़ी चट्टान, जिससे पानी निकला था? पौलुस लिखता है: वह चट्टान मसीह था। यानी प्रभु यीशु।

यीशु वहाँ थे! रेगिस्तान में, गरम रेत पर, लोगों के साथ-साथ। उन्होंने ही पानी दिया। उन्होंने ही रोटी दी।

और आज भी यीशु देते हैं। गिरजाघर में कभी-कभी रोटी तोड़ी जाती है। और एक कटोरे से पिया जाता है। सब मिलकर। एक ही रोटी, बहुत सारे लोग। तब हम सब एक परिवार होते हैं, यीशु का परिवार।

तुम्हारे लिए

आज तुम्हारी मेज़ पर भी खाना आएगा। रोटी, या चावल, या दूध।

वह खाना कहाँ से आया? परमेश्वर से। सारी धरती और उसमें सब कुछ परमेश्वर का है।

तो जब तुम खाओ, तब क्या कहोगे? "मुझे यह पसंद नहीं" कहोगे, कुड़कुड़ाते हुए? या हाथ जोड़कर कहोगे: "धन्यवाद, परमेश्वर"?

पौलुस कहता है: तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर के लिए करो। खेलना भी। खाना भी। सोना भी। सब कुछ।

बात करें

रेगिस्तान में परमेश्वर ने लोगों को क्या-क्या दिया? क्या तुम गिन सकते हो?

आज तुम किस चीज़ के लिए परमेश्वर को धन्यवाद कहना चाहते हो?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु, धन्यवाद। धन्यवाद खाने के लिए। धन्यवाद पानी के लिए। आप उन लोगों के साथ चले। आप मेरे साथ भी चलते हैं। मुझे कुड़कुड़ाना नहीं, धन्यवाद कहना सिखाइए। आमीन।

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1 कुरिन्थियों 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 कुरिन्थियों 10 किस विषय में है?
बहुत, बहुत पहले की बात है। रेगिस्तान गरम था। रेत भी गरम थी। और उस रेत पर परमेश्वर के लोग चल रहे थे। बहुत सारे लोग। बच्चे भी, माँएँ भी, दादा-दादी भी।
1 कुरिन्थियों 10 क्या कहता है?
फिर उन्हें प्यास लगी। वहाँ एक बड़ी चट्टान थी। और उस चट्टान से पानी निकल आया! ठंडा, साफ़ पानी, छल-छल करता हुआ। सब ने पिया। सब ने!
1 कुरिन्थियों 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
वह बड़ी चट्टान, जिससे पानी निकला था? पौलुस लिखता है: वह चट्टान मसीह था। यानी प्रभु यीशु।
नन्हे बच्चे 1 कुरिन्थियों 10 से क्या सीख सकते हैं?
वह खाना कहाँ से आया? परमेश्वर से। सारी धरती और उसमें सब कुछ परमेश्वर का है।
1 कुरिन्थियों 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
आज तुम किस चीज़ के लिए परमेश्वर को धन्यवाद कहना चाहते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

इस्राएल के पास मन्ना था, हर सुबह ताज़ा, फिर भी उनका मन मिस्र के मांस पर लगा रहा। कमी नहीं थी, भूख गलत थी। पौलुस कहता है, "ये बातें उनके लिए दृष्टान्त ठहरीं और हमारी चेतावनी के लिए लिखी गईं कि हम उनके समान बुरी वस्तुओं की लालसा न करें।"

सोचो, आज तुम्हारी थाली में परमेश्वर ने जो रखा है, उसे धन्यवाद के साथ खाते हो, या आँखें किसी और की थाली में हैं? उनकी कहानी हमारे लिए आईना बन गई।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

पौलुस इस्राएलियों की यात्रा की बात कर रहा है, कि उन सब ने "एक ही आत्मिक चट्टान से पीया, जो उनके साथ-साथ चलती थी, और वह चट्टान मसीह था।"

सोचिए, जंगल की तपती रेत में मसीह उनके साथ-साथ चल रहा था। वह पीछे नहीं रह गया, आगे नहीं बढ़ गया, बस साथ। आज भी वैसा ही है। आपकी थकान भरी राह में वह चट्टान आपके क़दम से क़दम मिलाकर चल रही है, और उसमें से जीवन का जल बहता है। क्या आपने आज उससे पीया?

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हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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