7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 राजाओं 11

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

राजा सुलैमान बहुत बुद्धिमान था। परमेश्वर ने उसे इतना ज्ञान दिया था कि दूर-दूर के राजा उससे मिलने आते थे। पर सुलैमान के दिल में एक कमज़ोरी थी। उसने ऐसी बहुत सी स्त्रियों से प्रेम किया जो दूसरे देशों की थीं, जो मोआब, अम्मोन, एदोम और सीदोन से आई थीं। परमेश्वर ने पहले ही चेतावनी दी थी, "उनके साथ विवाह मत करना, क्योंकि वे तुम्हारा मन अपने देवताओं की ओर फेर देंगी।" पर सुलैमान ने वह चेतावनी नहीं सुनी।

धीरे-धीरे जब सुलैमान बूढ़ा हुआ, वैसा ही हुआ जो परमेश्वर ने पहले ही बताया था। उसकी स्त्रियों ने उसका मन बहका दिया। सुलैमान ने अश्तोरेत नाम की देवी और मिल्कोम नाम के घृणित देवता की पूजा शुरू कर दी। उसने उनके लिए पहाड़ों पर पूजा स्थान भी बनाए। सोचो, वही सुलैमान जिसने परमेश्वर के लिए भव्य मंदिर बनाया था, अब झूठे देवताओं के लिए पूजा स्थान बना रहा था।

इससे परमेश्वर बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने सुलैमान से कहा, "तूने मेरी वाचा नहीं मानी। इसलिए मैं तेरा राज्य तुझसे छीन लूँगा और तेरे एक कर्मचारी को दे दूँगा।" पर परमेश्वर ने यह भी कहा कि दाऊद के कारण, अपने वफादार सेवक के कारण, वे पूरा राज्य नहीं छीनेंगे। सुलैमान के जीते-जी कुछ नहीं होगा, और उसके पुत्र के हाथ में भी एक गोत्र बचा रहेगा।

फिर परमेश्वर ने सुलैमान के विरुद्ध शत्रु उठाए। एदोम का हदद, जो बचपन में मिस्र भाग गया था, वह लौट आया। दमिश्क का रजोन भी सुलैमान से नफरत रखता हुआ शत्रु बन गया। और फिर आया यारोबाम, सुलैमान का ही एक कर्मचारी, जो बहुत वीर और परिश्रमी था।

एक दिन यारोबाम रास्ते में चल रहा था। अहिय्याह नबी उससे मिला और उसने एक नई चादर फाड़कर बारह टुकड़े कर दिए। "दस टुकड़े ले ले," अहिय्याह ने कहा। "परमेश्वर दस गोत्र तेरे हाथ में देंगे, क्योंकि सुलैमान ने परमेश्वर को छोड़कर झूठे देवताओं की पूजा की है। पर दाऊद के कारण एक गोत्र बचा रहेगा।"

यह सुनकर सुलैमान ने यारोबाम को मार डालना चाहा। पर यारोबाम मिस्र भाग गया और वहीं छिपा रहा। सुलैमान चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा, फिर मर गया। उसका पुत्र रहबाम राजा बना।

इसका क्या मतलब है?

यह कहानी दिखाती है कि दिल की एक छोटी सी अनाज्ञाकारिता कितनी बड़ी हो सकती है। सुलैमान ने एक-एक कदम परमेश्वर से दूर होकर उठाया। पहले प्रेम, फिर समझौता, फिर पूजा स्थान, और आखिर में पूरी तरह भटक जाना। परमेश्वर हर बात देखते हैं, तब भी जब वह धीरे-धीरे होती है। पर यह भी सच है कि परमेश्वर अपनी बात नहीं तोड़ते। उन्होंने दाऊद से वादा किया था, और वे उस वादे पर टिके रहे, चाहे सुलैमान ने कैसा भी किया हो।

एक ही धागा

परमेश्वर ने दाऊद के वंश को हमेशा के लिए बचाए रखने का वादा किया था। इसीलिए यरूशलेम में हमेशा दाऊद का "दीपक" जलता रहा, जैसा अहिय्याह नबी ने कहा। यह दीपक कभी बुझा नहीं, क्योंकि आगे चलकर उसी वंश में यीशु मसीह का जन्म हुआ। सुलैमान की असफलता के बावजूद परमेश्वर की योजना नहीं रुकी। वे मनुष्यों की गलतियों से बड़े हैं, और अपने वादे को पूरा करते ही हैं।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी हम भी छोटी-छोटी बातों में परमेश्वर की सुनी हुई बात को अनसुना कर देते हैं। जैसे झूठ बोलना आसान लगता है, या किसी की नकल करना जो परमेश्वर को पसंद नहीं। सुलैमान की कहानी हमें सिखाती है कि छोटी बातों में भी परमेश्वर की आज्ञा माननी चाहिए, इससे पहले कि दिल पूरी तरह भटक जाए। आज तुम प्रार्थना कर सकते हो, "प्रभु, मेरा दिल आपकी ओर लगा रहे।"

बात करें

अगर तुम यारोबाम की जगह होते, और अहिय्याह नबी तुमसे यह कहते, तो तुम्हें कैसा लगता?

सुलैमान के दिल में झूठे देवताओं के लिए जगह कैसे बनी? क्या तुम्हारे दिल में भी परमेश्वर के अलावा कोई और चीज़ पहली जगह ले सकती है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, आप बहुत वफादार हैं, तब भी जब हम भटक जाते हैं। हमारा दिल पूरी तरह आपकी ओर लगा रहे, आज और हमेशा। हमें छोटी बातों में भी आपकी आज्ञा मानने में मदद दें। आमीन।

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1 राजाओं 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 राजाओं 11 किस विषय में है?
राजा सुलैमान बहुत बुद्धिमान था। परमेश्वर ने उसे इतना ज्ञान दिया था कि दूर-दूर के राजा उससे मिलने आते थे। पर सुलैमान के दिल में एक कमज़ोरी थी। उसने ऐसी बहुत सी स्त्रियों से प्रेम किया जो दूसरे देशों की थीं, जो मोआब, अम्मोन, एदोम और सीदोन से आई थीं। परमेश्वर ने पहले ही चेतावनी दी थी, "उनके साथ विवाह मत करना, क्योंकि वे तुम्हारा मन अपने देवताओं की ओर फेर देंगी।" पर सुलैमान ने वह चेतावनी नहीं सुनी।
1 राजाओं 11 क्या कहता है?
इससे परमेश्वर बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने सुलैमान से कहा, "तूने मेरी वाचा नहीं मानी। इसलिए मैं तेरा राज्य तुझसे छीन लूँगा और तेरे एक कर्मचारी को दे दूँगा।" पर परमेश्वर ने यह भी कहा कि दाऊद के कारण, अपने वफादार सेवक के कारण, वे पूरा राज्य नहीं छीनेंगे। सुलैमान के जीते-जी कुछ नहीं होगा, और उसके पुत्र के हाथ में भी एक गोत्र बचा रहेगा।
1 राजाओं 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
एक दिन यारोबाम रास्ते में चल रहा था। अहिय्याह नबी उससे मिला और उसने एक नई चादर फाड़कर बारह टुकड़े कर दिए। "दस टुकड़े ले ले," अहिय्याह ने कहा। "परमेश्वर दस गोत्र तेरे हाथ में देंगे, क्योंकि सुलैमान ने परमेश्वर को छोड़कर झूठे देवताओं की पूजा की है। पर दाऊद के कारण एक गोत्र बचा रहेगा।"
बच्चे 1 राजाओं 11 से क्या सीख सकते हैं?
यह कहानी दिखाती है कि दिल की एक छोटी सी अनाज्ञाकारिता कितनी बड़ी हो सकती है। सुलैमान ने एक-एक कदम परमेश्वर से दूर होकर उठाया। पहले प्रेम, फिर समझौता, फिर पूजा स्थान, और आखिर में पूरी तरह भटक जाना। परमेश्वर हर बात देखते हैं, तब भी जब वह धीरे-धीरे होती है। पर यह भी सच है कि परमेश्वर अपनी बात नहीं तोड़ते। उन्होंने दाऊद से वादा किया था, और वे उस वादे पर टिके रहे, चाहे सुलैमान ने कैसा भी किया हो।
1 राजाओं 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी-कभी हम भी छोटी-छोटी बातों में परमेश्वर की सुनी हुई बात को अनसुना कर देते हैं। जैसे झूठ बोलना आसान लगता है, या किसी की नकल करना जो परमेश्वर को पसंद नहीं। सुलैमान की कहानी हमें सिखाती है कि छोटी बातों में भी परमेश्वर की आज्ञा माननी चाहिए, इससे पहले कि दिल पूरी तरह भटक जाए। आज तुम प्रार्थना कर सकते हो, "प्रभु, मेरा दिल आपकी ओर लगा रहे।"

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

सुलैमान ने मंदिर बनाया, फिर भी परमेश्वर कहते हैं, "उन्होंने मुझे त्याग दिया है।" ध्यान दो, यहाँ "उसने" नहीं, "उन्होंने" कहा गया है। एक आदमी का निजी समझौता पूरे घराने का रास्ता बन गया। जो मूरत तुम चुपचाप दिल के कोने में रखते हो, वह वहीं नहीं रुकती। तुम्हारे बच्चे उसे देख रहे हैं। आज दिल का कौन सा कोना परमेश्वर से छिपाया हुआ है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

जिन हाथों ने यहोवा का भव्य भवन बनाया, उन्हीं हाथों ने यरूशलेम के सामने के पहाड़ पर कमोश और मोलेक के लिये ऊँचे स्थान बनाए। मंदिर से देखने पर वे टीले साफ दिखते थे। सुलैमान ने परमेश्वर को छोड़ा नहीं, बस उसके बराबर और भी कुछ खड़ा कर दिया। तेरे जीवन में क्या कुछ ऐसा है, जो प्रभु के सामने ही खड़ा है, और तू उसे सहता जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

सुलैमान के राज्य की शुरुआत में चारों ओर शांति थी। पर अब लिखा है कि रजोन "सुलैमान के जीवन भर इस्राएल का विरोधी बना रहा।" जीवन भर। जो शांति उसे परमेश्वर से मिली थी, वह उसकी लापरवाही में फिसल गई। शांति कोई अधिकार नहीं, वह एक सौंपी हुई चीज़ है। तुम्हारे मन का कौन सा कोना धीरे धीरे किसी और को दिया जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

सुलैमान को परमेश्वर ने दो बार दर्शन दिए थे, और ठीक इसी बात पर चेतावनी दी थी, "कि पराए देवताओं के पीछे न हो लेना, तो भी उसने यहोवा की आज्ञा न मानी।" जिस बात पर परमेश्वर ने खास तौर से रोका, वही उसने की। सोचो, तुम्हारे जीवन में वह कौन सी बात है जिसे तुम जानते हो कि परमेश्वर मना करता है, फिर भी तुम उसे थामे बैठे हो? ज्ञान बचाता नहीं, आज्ञा मानना बचाता है।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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