3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 राजाओं 11

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाई

एक राजा था। उसका नाम सुलैमान था। वह बहुत बड़े महल में रहता था। सुलैमान बहुत बुद्धिमान था। पर सुलैमान के दिल में और भी कुछ था।

सुलैमान की बहुत सी रानियाँ थीं। वे दूर देशों से आई थीं। उनके पास लकड़ी की छोटी मूरतें थीं। पत्थर के देवता भी थे। रानियाँ धूप जलाती थीं। उन मूरतों के सामने झुकती थीं।

सुलैमान अपनी रानियों से बहुत प्यार करता था। इतना प्यार, कि वह भी उनके पीछे चला गया। वह बूढ़ा हो गया था। उसका दिल भटक गया था। सुलैमान ने भी उन मूरतों के लिए ऊँचे स्थान बनाए। एक पहाड़ी पर। परमेश्वर यह देख रहे थे।

इससे क्या समझ मिलती है?

परमेश्वर सुलैमान से बहुत प्यार करते थे। वे दो बार सुलैमान से बोले थे। परन्तु सुलैमान ने मूरतों को चुना। परमेश्वर को नहीं। यह परमेश्वर को बहुत दुःख देता है, जब हम उन्हें भूल जाते हैं। और मूरतों के पीछे चले जाते हैं।

परमेश्वर क्रोधित हुए। उन्होंने कहा, "मैं यह राज्य तुझसे ले लूँगा।" पर परमेश्वर ने यह भी कहा, "अभी नहीं। तेरे पिता दाऊद के कारण।" परमेश्वर अपनी बात नहीं भूलते।

समान सूत्र

परमेश्वर ने दाऊद से एक वचन दिया था। एक दीपक हमेशा जलता रहेगा। यरूशलेम में। परमेश्वर ने कहा, "एक गोत्र मैं छोड़ दूँगा।" भले सुलैमान ने गलती की, परमेश्वर ने अपना वचन नहीं तोड़ा। वह छोटी सी लौ बुझी नहीं। बहुत साल बाद, उस दीये से यीशु आए। यीशु, जो कभी नहीं भटके। जिनका दिल हमेशा परमेश्वर की ओर रहा।

तेरे लिए

तेरे दिल में भी छोटी छोटी चीज़ें आ सकती हैं। एक खिलौना। एक खेल। कोई चीज़ जो तू परमेश्वर से भी ज़्यादा प्यार करने लगे। सुलैमान भूल गया, कौन सबसे पहले आता है। पर तू याद रख सकता है। परमेश्वर पहले। हमेशा पहले।

बातचीत के लिए:

सुलैमान का दिल किसके पीछे भटक गया था?

तेरे दिल में परमेश्वर पहले आते हैं, या कोई और चीज़?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, सुलैमान का दिल भटक गया। मेरा दिल मत भटकने देना। आप ही मेरे सबसे पहले हैं। आमीन।

यह बाइबल कहानी साझा करें

अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

1 राजाओं 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 राजाओं 11 किस विषय में है?
एक राजा था। उसका नाम सुलैमान था। वह बहुत बड़े महल में रहता था। सुलैमान बहुत बुद्धिमान था। पर सुलैमान के दिल में और भी कुछ था।
1 राजाओं 11 क्या कहता है?
सुलैमान की बहुत सी रानियाँ थीं। वे दूर देशों से आई थीं। उनके पास लकड़ी की छोटी मूरतें थीं। पत्थर के देवता भी थे। रानियाँ धूप जलाती थीं। उन मूरतों के सामने झुकती थीं।
1 राजाओं 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सुलैमान अपनी रानियों से बहुत प्यार करता था। इतना प्यार, कि वह भी उनके पीछे चला गया। वह बूढ़ा हो गया था। उसका दिल भटक गया था। सुलैमान ने भी उन मूरतों के लिए ऊँचे स्थान बनाए। एक पहाड़ी पर। परमेश्वर यह देख रहे थे।
नन्हे बच्चे 1 राजाओं 11 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर सुलैमान से बहुत प्यार करते थे। वे दो बार सुलैमान से बोले थे। परन्तु सुलैमान ने मूरतों को चुना। परमेश्वर को नहीं। यह परमेश्वर को बहुत दुःख देता है, जब हम उन्हें भूल जाते हैं। और मूरतों के पीछे चले जाते हैं।
1 राजाओं 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर क्रोधित हुए। उन्होंने कहा, "मैं यह राज्य तुझसे ले लूँगा।" पर परमेश्वर ने यह भी कहा, "अभी नहीं। तेरे पिता दाऊद के कारण।" परमेश्वर अपनी बात नहीं भूलते।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

सुलैमान ने मंदिर बनाया, फिर भी परमेश्वर कहते हैं, "उन्होंने मुझे त्याग दिया है।" ध्यान दो, यहाँ "उसने" नहीं, "उन्होंने" कहा गया है। एक आदमी का निजी समझौता पूरे घराने का रास्ता बन गया। जो मूरत तुम चुपचाप दिल के कोने में रखते हो, वह वहीं नहीं रुकती। तुम्हारे बच्चे उसे देख रहे हैं। आज दिल का कौन सा कोना परमेश्वर से छिपाया हुआ है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

जिन हाथों ने यहोवा का भव्य भवन बनाया, उन्हीं हाथों ने यरूशलेम के सामने के पहाड़ पर कमोश और मोलेक के लिये ऊँचे स्थान बनाए। मंदिर से देखने पर वे टीले साफ दिखते थे। सुलैमान ने परमेश्वर को छोड़ा नहीं, बस उसके बराबर और भी कुछ खड़ा कर दिया। तेरे जीवन में क्या कुछ ऐसा है, जो प्रभु के सामने ही खड़ा है, और तू उसे सहता जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

सुलैमान के राज्य की शुरुआत में चारों ओर शांति थी। पर अब लिखा है कि रजोन "सुलैमान के जीवन भर इस्राएल का विरोधी बना रहा।" जीवन भर। जो शांति उसे परमेश्वर से मिली थी, वह उसकी लापरवाही में फिसल गई। शांति कोई अधिकार नहीं, वह एक सौंपी हुई चीज़ है। तुम्हारे मन का कौन सा कोना धीरे धीरे किसी और को दिया जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

सुलैमान को परमेश्वर ने दो बार दर्शन दिए थे, और ठीक इसी बात पर चेतावनी दी थी, "कि पराए देवताओं के पीछे न हो लेना, तो भी उसने यहोवा की आज्ञा न मानी।" जिस बात पर परमेश्वर ने खास तौर से रोका, वही उसने की। सोचो, तुम्हारे जीवन में वह कौन सी बात है जिसे तुम जानते हो कि परमेश्वर मना करता है, फिर भी तुम उसे थामे बैठे हो? ज्ञान बचाता नहीं, आज्ञा मानना बचाता है।

थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?

हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network