1 पतरस 1
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पतरस यह पत्र उन लोगों को लिख रहे हैं जो अपने घर से दूर, परदेश में तितर-बितर होकर रहते हैं, पुन्तुस, गलातिया, कप्पदूकिया, आसिया और बितूनिया में। ये लोग यीशु मसीह पर विश्वास करने वाले हैं, और पतरस उन्हें बताते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें पहले से जान लिया था और चुना है। यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के कारण उन्हें एक नया जन्म मिला है, एक जीवित आशा। यह आशा किसी सामान्य आशा जैसी नहीं, यह एक बड़ी विरासत की तरह है जो स्वर्ग में रखी है, ऐसी विरासत जो कभी बिगड़ती नहीं, कभी मैली नहीं होती, कभी पुरानी नहीं पड़ती।
फिर पतरस कुछ ईमानदार बात कहते हैं। वे लिखते हैं कि अभी कुछ दिन तक इन विश्वासियों को नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण दुःख सहना पड़ रहा है। पर वे कहते हैं कि यह दुःख बेकार नहीं है, यह विश्वास को परखता है, जैसे सोने को आग में तपाया जाता है ताकि पता चले वह असली है या नहीं। वे यीशु से प्रेम करते हैं जिसे उन्होंने कभी देखा नहीं, और यह बड़ी अनोखी बात है।
पतरस यह भी बताते हैं कि पुराने भविष्यद्वक्ता भी इस उद्धार के बारे में जानने के लिए बहुत खोज करते थे, वे जानना चाहते थे कि मसीह कब आएगा और कैसे दुःख उठाएगा। यहाँ तक कि स्वर्गदूत भी इन बातों को ध्यान से देखने की चाहत रखते हैं। पतरस विश्वासियों को समझाता है कि जैसे परमेश्वर पवित्र हैं, वैसे ही उन्हें भी अपने पूरे जीवन में पवित्र बनना है, पुरानी अज्ञानता की इच्छाओं के अनुसार नहीं जीना है। उन्हें छुड़ाया गया है, पर सोना-चाँदी से नहीं, बल्कि मसीह के बहुमूल्य लहू से, जैसे निर्दोष मेम्ने का लहू। और अंत में पतरस एक तस्वीर देते हैं, हर इंसान घास के समान है जो सूख जाती है, फूल के समान जो झड़ जाता है, पर परमेश्वर का वचन सदा स्थिर रहता है।
इसका अर्थ क्या है?
पतरस उन लोगों को लिख रहे हैं जो अपने ही देश में भी अजनबी जैसे महसूस करते थे, क्योंकि उनका विश्वास उन्हें बाकियों से अलग बनाता था। शायद तुमने भी कभी ऐसा महसूस किया हो, स्कूल में अलग होना, दोस्तों के बीच अलग सोचना। पतरस कहता है, हाँ, यह कठिन है, पर तुम अकेले नहीं हो, परमेश्वर ने तुम्हें चुना है और तुम्हारे लिए एक विरासत रखी है जो कोई छीन नहीं सकता। और दुःख का मतलब यह नहीं कि परमेश्वर भूल गए हैं, बल्कि दुःख विश्वास को असली बनाता है, जैसे आग सोने को शुद्ध करती है।
मुख्य सूत्र
यह सारा अध्याय यीशु मसीह की ओर इशारा करता है। पतरस कहता है कि मसीह को जगत की सृष्टि से पहले ही चुना गया था, बहुत पहले से परमेश्वर की योजना थी कि वे आएंगे और अपना लहू बहाएंगे। यह वही प्रतिज्ञा है जिसकी खोज पुराने भविष्यद्वक्ता करते रहे। मसीह का जी उठना ही वह आधार है जिस पर हमारी जीवित आशा टिकी है। परमेश्वर का वचन घास जैसा नहीं है जो सूख जाए, वह सदा ठहरता है, और यही वचन, यही सुसमाचार, अब हमें भी सुनाया गया है।
तुम्हारे लिए
क्या तुमने कभी सोचा कि परमेश्वर ने तुम्हें पहले से चुना है, इससे पहले कि तुम कुछ कर पाते? यह डरावना नहीं, बल्कि आराम देने वाला विचार है। जब जीवन में मुश्किल दिन आएं, दोस्ती में दुःख, स्कूल में तनाव, तुम याद रख सकते हो कि यह परखा हुआ विश्वास बहुमूल्य है। और पतरस कहता है, एक दूसरे से तन-मन लगाकर प्रेम करो, क्योंकि सब विश्वासी मिलकर एक परिवार हैं, नए जन्म से जुड़े हुए।
चर्चा करें
पतरस कहता है कि दुःख विश्वास को परखता है। क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर जान-बूझकर हमें कठिन समय से गुज़रने देते हैं? इस पर क्या सोचते हो?
यीशु को देखे बिना भी प्रेम करना, ऐसा कैसे संभव है? तुम्हारे लिए इसका क्या मतलब है?
साथ में प्रार्थना
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आपने हमें एक जीवित आशा दी है। जब जीवन कठिन लगे, हमें याद दिलाइए कि आपका वचन कभी नहीं सूखता, कभी नहीं मिटता। हमें एक दूसरे से सच्चा प्रेम करना सिखाइए। आमीन।
1 पतरस 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 पतरस 1 किस विषय में है?
1 पतरस 1 क्या कहता है?
1 पतरस 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 पतरस 1 से क्या सीख सकते हैं?
1 पतरस 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है। घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।" पतरस यह उन लोगों से कह रहा है जो बिखरे हुए थे, जिनका सब कुछ छिन चुका था। जिस सुंदरता को तू बचाए रखने में थक गया है, वह फूल है। पर जिस वचन से तेरा नया जन्म हुआ, वह कभी नहीं मुरझाता। आज तू किसे पकड़े हुए है?
निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा।" सोना चाँदी भी नाशवान हैं, पर जो कीमत तुम्हारे लिए चुकाई गई वह कभी घटती नहीं। जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम किसी काम के नहीं, उस दिन अपनी भावनाओं से मत पूछो, उस लहू से पूछो। वही बताता है कि परमेश्वर की नज़र में तुम कितने मूल्यवान हो।
पतरस अपनी चिट्ठी उन लोगों को लिखता है जो "परदेशियों" हैं, "तितर-बितर होकर" रहते हैं। यानी ऐसे लोग जिनका कोई अपना ठिकाना नहीं, जो भीड़ में भी अजनबी हैं। पर पतरस उन्हें बेसहारा नहीं, बल्कि नाम लेकर पुकारता है। आज अगर तुम्हें लगता है कि तुम कहीं फिट नहीं बैठते, तो याद रखो, परमेश्वर की चिट्ठी ठीक तुम्हारे पते पर आई है।
सोना आग में तपाया जाता है, फिर भी एक दिन नष्ट हो जाएगा। पर पतरस कहता है कि तेरा विश्वास उससे भी बहुमूल्य है: "तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशवान सोने से भी अधिक बहुमूल्य है।" जिस दुख में तू आज है, वह तुझे जलाने नहीं, शुद्ध करने आया है। सुनार आग के पास बैठा रहता है, आँख हटाता नहीं।
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