7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 शमूएल 8

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

शमूएल अब बूढ़ा हो चुका था। बहुत साल तक उसने इस्राएल का न्याय किया था, ईमानदारी से, परमेश्वर की सुनकर। पर जब उसने अपने बेटों को न्यायी बनाया, योएल और अबिय्याह को, तो बात बिगड़ गई। ये दोनों अपने पिता की राह पर नहीं चले। वे घूस लेते थे, यानी पैसे या उपहार लेकर गलत फैसले करते थे। इससे इस्राएल के बड़े-बुज़ुर्ग परेशान हो गए। वे रामाह में शमूएल के पास आए और कहा, अब तू बूढ़ा है, तेरे बेटे तेरे जैसे नहीं हैं, इसलिए हमारे लिए एक राजा नियुक्त कर दे, जैसे अन्य जातियों के पास होता है।

यह सुनकर शमूएल को बुरा लगा। उसने यह बात परमेश्वर के सामने रखी, प्रार्थना में। और परमेश्वर ने कुछ आश्चर्यजनक कहा, यह बात शमूएल के विरुद्ध नहीं है, बल्कि लोगों ने परमेश्वर को ही त्याग दिया है। वे चाहते थे कि कोई इंसान राजा बने, जबकि परमेश्वर खुद उनका राजा था, शुरू से।

परमेश्वर ने शमूएल को कहा कि वह लोगों की बात मान ले, पर उन्हें साफ-साफ बता दे कि राजा का राज कैसा होगा। शमूएल ने वही किया। उसने बताया कि राजा उनके बेटों को अपने रथों और युद्ध के लिए ले लेगा, उनकी बेटियों को अपने घर के काम के लिए, उनकी सबसे अच्छी ज़मीन और उपज का दसवां हिस्सा अपने अधिकारियों को देगा, और अंत में लोग खुद ही उसके दास जैसे बन जाएँगे। तब वे दुहाई देंगे, पर परमेश्वर उस समय उनकी नहीं सुनेगा।

फिर भी लोग नहीं माने। उन्होंने कहा, नहीं, हमें राजा चाहिए, ताकि हम भी दूसरी जातियों जैसे बन जाएँ। शमूएल ने यह बात परमेश्वर तक पहुँचाई, और परमेश्वर ने कहा, उनकी बात मानकर उनके लिए राजा ठहरा दे।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी सीधी नहीं है। ध्यान से देखो, यहाँ कोई भी पूरी तरह सही नहीं है। शमूएल के बेटे गलत करते हैं। लोग सही समस्या को गलत तरीके से हल करना चाहते हैं। और परमेश्वर, जो पहले से उनका राजा था, उन्हें छोड़ नहीं देता, बल्कि उनकी ज़िद के आगे भी उनके साथ रहता है, यह चेतावनी देते हुए कि इसका परिणाम क्या होगा।

सबसे गहरी बात यहाँ छिपी है, यहोवा ने कहा, उन्होंने तुझको नहीं परन्तु मुझी को निकम्मा जाना है। लोग सोच रहे थे कि समस्या शमूएल के बुढ़ापे और उसके बेटों की है। पर असली समस्या यह थी कि वे परमेश्वर पर भरोसा करना नहीं चाहते थे। वे किसी को देखना चाहते थे, कोई सिर पर मुकुट पहने, कोई जो आगे-आगे चले। यह समझना कठिन नहीं है, हम भी कभी-कभी ऐसा ही चाहते हैं, कोई दिखने वाली चीज़, कोई जिस पर उंगली रख सकें, बजाय इसके कि परमेश्वर पर भरोसा रखें जिन्हें हम देख नहीं सकते।

समान सूत्र

यह घटना इस्राएल के बड़े इतिहास में एक मोड़ है। परमेश्वर ने वर्षों पहले अपने लोगों से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक गहरा वादा, कि वे उनके परमेश्वर होंगे और वे उनकी प्रजा होंगे। अब लोग एक इंसानी राजा चाहते हैं, फिर भी परमेश्वर उन्हें छोड़ता नहीं। वे राजा देने की अनुमति देते हैं, पर अपनी वाचा को नहीं तोड़ते।

बहुत बाद में, परमेश्वर खुद एक राजा भेजेंगे, यीशु मसीह, जो वैसा राजा नहीं होगा जैसा इस्राएल ने माँगा था। वह अपने बेटों और बेटियों को छीनने नहीं आया, बल्कि अपना जीवन देने आया। वह उन जैसे राजाओं से अलग था जो लोगों को अपना दास बनाते हैं, वह आया ताकि लोग स्वतंत्र हो जाएँ।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी तुम भी सोचते हो कि किसी दिखने वाली चीज़ पर भरोसा करना आसान है, बजाय परमेश्वर पर, जिन्हें तुम देख नहीं सकते। शायद यह कोई नियम है, कोई व्यक्ति, कोई तरीका जिससे तुम सुरक्षित महसूस करना चाहते हो। यह गलत नहीं है कि तुम सुरक्षा चाहो, पर याद रखना, परमेश्वर पहले से तुम्हारे साथ है, और वे तुम्हें छोड़ते नहीं, तब भी नहीं जब तुम गलत रास्ता चुनते हो।

बात करें

अगर परमेश्वर पहले से इस्राएल का राजा था, तो लोगों को और राजा की ज़रूरत क्यों महसूस हुई?

क्या तुम्हारे जीवन में कोई ऐसी चीज़ है जिस पर तुम परमेश्वर से ज़्यादा भरोसा करना चाहते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें कभी नहीं छोड़ते, तब भी नहीं जब हम गलत चुनाव करते हैं। हमें सिखाइए कि हम आप पर भरोसा रखें, तब भी जब हम आपको देख नहीं सकते। हमारी आँखें खोलिए कि हम पहचानें कि आप हमारे साथ हैं। आमीन।

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1 शमूएल 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 शमूएल 8 किस विषय में है?
शमूएल अब बूढ़ा हो चुका था। बहुत साल तक उसने इस्राएल का न्याय किया था, ईमानदारी से, परमेश्वर की सुनकर। पर जब उसने अपने बेटों को न्यायी बनाया, योएल और अबिय्याह को, तो बात बिगड़ गई। ये दोनों अपने पिता की राह पर नहीं चले। वे घूस लेते थे, यानी पैसे या उपहार लेकर गलत फैसले करते थे। इससे इस्राएल के बड़े-बुज़ुर्ग परेशान हो गए। वे रामाह में शमूएल के पास आए और कहा, अब तू बूढ़ा है, तेरे बेटे तेरे जैसे नहीं हैं, इसलिए हमारे लिए एक राजा नियुक्त कर दे, जैसे अन्य जातियों के पास होता है।
1 शमूएल 8 क्या कहता है?
परमेश्वर ने शमूएल को कहा कि वह लोगों की बात मान ले, पर उन्हें साफ-साफ बता दे कि राजा का राज कैसा होगा। शमूएल ने वही किया। उसने बताया कि राजा उनके बेटों को अपने रथों और युद्ध के लिए ले लेगा, उनकी बेटियों को अपने घर के काम के लिए, उनकी सबसे अच्छी ज़मीन और उपज का दसवां हिस्सा अपने अधिकारियों को देगा, और अंत में लोग खुद ही उसके दास जैसे बन जाएँगे। तब वे दुहाई देंगे, पर परमेश्वर उस समय उनकी नहीं सुनेगा।
1 शमूएल 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह कहानी सीधी नहीं है। ध्यान से देखो, यहाँ कोई भी पूरी तरह सही नहीं है। शमूएल के बेटे गलत करते हैं। लोग सही समस्या को गलत तरीके से हल करना चाहते हैं। और परमेश्वर, जो पहले से उनका राजा था, उन्हें छोड़ नहीं देता, बल्कि उनकी ज़िद के आगे भी उनके साथ रहता है, यह चेतावनी देते हुए कि इसका परिणाम क्या होगा।
बच्चे 1 शमूएल 8 से क्या सीख सकते हैं?
यह घटना इस्राएल के बड़े इतिहास में एक मोड़ है। परमेश्वर ने वर्षों पहले अपने लोगों से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक गहरा वादा, कि वे उनके परमेश्वर होंगे और वे उनकी प्रजा होंगे। अब लोग एक इंसानी राजा चाहते हैं, फिर भी परमेश्वर उन्हें छोड़ता नहीं। वे राजा देने की अनुमति देते हैं, पर अपनी वाचा को नहीं तोड़ते।
1 शमूएल 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी-कभी तुम भी सोचते हो कि किसी दिखने वाली चीज़ पर भरोसा करना आसान है, बजाय परमेश्वर पर, जिन्हें तुम देख नहीं सकते। शायद यह कोई नियम है, कोई व्यक्ति, कोई तरीका जिससे तुम सुरक्षित महसूस करना चाहते हो। यह गलत नहीं है कि तुम सुरक्षा चाहो, पर याद रखना, परमेश्वर पहले से तुम्हारे साथ है, और वे तुम्हें छोड़ते नहीं, तब भी नहीं जब तुम गलत रास्ता चुनते हो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

शमूएल ने बहस नहीं की। लोगों ने उसकी चेतावनी ठुकरा दी, फिर भी लिखा है, "शमूएल ने लोगों की सब बातें सुनकर उन्हें यहोवा को सुना दिया।" जो बातें उसे चुभी थीं, वही वह परमेश्वर के कानों तक ले गया।

तुम्हें भी किसी ने चोट पहुँचाने वाली बात कही है? उसे मन में दोहराने के बजाय, उसे यहोवा के कानों तक ले जाओ। वहीं उसका सही जवाब मिलेगा।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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