1 तीमुथियुस 3
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस एक पुराना, बुद्धिमान गुरु था। तीमुथियुस उसका जवान शिष्य था, जो एक शहर में कलीसिया की देखभाल करता था। पौलुस उसे दूर से एक पत्र लिखता है। वह कहता है, "मैं तेरे पास जल्द आने की आशा रखता हूँ, पर अभी के लिए यह बातें लिख रहा हूँ।"
पत्र में पौलुस बताता है, परमेश्वर के घर का अध्यक्ष कैसा होना चाहिए। "अध्यक्ष" यानी वह जो आगे बढ़कर देखभाल करता है, जैसे एक कप्तान जहाज़ को चलाता है। पौलुस कहता है, वह निर्दोष हो, संयमी हो, यानी खुद पर काबू रखे। वह शराब का आदी न हो, मारपीट करनेवाला न हो। इसके बजाय वह कोमल हो, मेहमानों का स्वागत करे, और अच्छे से सिखा सके। सबसे पहले, वह अपने ही घर को संभाल सके। पौलुस पूछता है, "जो अपने घर का प्रबन्ध करना नहीं जानता, वह परमेश्वर की कलीसिया की रखवाली कैसे करेगा?"
फिर पौलुस "सेवकों" की बात करता है, यानी वे लोग जो कलीसिया में काम करते हैं, मदद करते हैं। वे भी गंभीर हों, सच्चे हों, दो रंग के न हों। उनकी पत्नियाँ भी भरोसेमंद हों। पौलुस कहता है, यह सब इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि परमेश्वर का घराना "सत्य का खम्भा और नींव" है। एक घर के खम्भे मज़बूत होने चाहिए, नहीं तो पूरी छत गिर जाती है।
What Does This Mean?
सोचो, किसी किले का रखवाला कैसा होना चाहिए। क्या वह सोता रहे, या गुस्से में तलवार घुमाता फिरे? नहीं, उसे जागते रहना होगा, शांत रहना होगा, भरोसे के लायक होना होगा। कलीसिया परमेश्वर का घर है, उसमें जीवित परमेश्वर रहते हैं। इसलिए जो उसकी देखभाल करे, उसे भी भरोसेमंद होना चाहिए, झूठा और लालची नहीं।
यह कोई कठोर नियम नहीं है। यह एक चेतावनी है, जैसे एक पिता अपने बेटे को बताता है, "ध्यान रखना किसे ज़िम्मेदारी देते हो।" क्योंकि अगर रखवाला खुद गिर जाए, तो पूरा घर खतरे में पड़ जाता है।
The Common Thread
पर पौलुस सिर्फ नियमों पर नहीं रुकता। आखिर में वह कुछ बड़ा कहता है, "भक्ति का भेद गम्भीर है।" यह भेद क्या है? यीशु मसीह, जो शरीर में प्रगट हुए, आत्मा में धर्मी ठहरे, स्वर्गदूतों को दिखाई दिए, और महिमा में ऊपर उठाए गए।
यही वह नींव है जिस पर सारा घर खड़ा है। अच्छे अध्यक्ष, अच्छे सेवक, यह सब इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे यीशु मसीह की कहानी को सही से दिखाते हैं। जैसे एक अच्छा रखवाला राजा के महल को ठीक से दिखाता है, वैसे ही कलीसिया के लोग यीशु को दिखाते हैं। अगर रखवाले अच्छे हैं, तो लोग यीशु को देख पाते हैं, साफ और सच्चा।
For You
तुम अभी छोटे हो, पर तुम भी घर के एक हिस्से का रखवाला हो। शायद अपने खिलौनों का, या अपने छोटे भाई-बहन की देखभाल का। क्या तुम सच बोलते हो, जब कोई पूछे क्या हुआ? क्या तुम गुस्से में मार-पीट नहीं करते, पर शांत रहते हो? क्या तुम मेहमान आए तो मुस्कुराकर स्वागत करते हो?
यह छोटी-छोटी बातें ही तुम्हें सिखाती हैं, कैसे एक दिन भरोसेमंद बनना है। परमेश्वर तुम्हें देख रहे हैं, और वे खुश होते हैं जब तुम सच्चे और कोमल रहते हो।
Talk About It
अगर तुम कलीसिया के रखवाले होते, तो सबसे पहले कौन सी एक बात तुम खुद में ठीक करना चाहते?
क्या तुम्हें लगता है घर में भरोसेमंद होना सीखना, स्कूल या बाहर भरोसेमंद होने में मदद करता है?
Praying Together
प्रिय परमेश्वर, आप हमारे घर के असली मालिक हैं। हमें सिखाइए कि हम सच्चे रहें, कोमल रहें, और भरोसे के लायक बनें। हमारी आँखें हमेशा यीशु मसीह पर टिकी रहें, जो सबसे बड़े और सच्चे रखवाले हैं। आमीन।
1 तीमुथियुस 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 तीमुथियुस 3 किस विषय में है?
1 तीमुथियुस 3 क्या कहता है?
1 तीमुथियुस 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 तीमुथियुस 3 से क्या सीख सकते हैं?
1 तीमुथियुस 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
वैसे ही सेवकों को भी गम्भीर होना चाहिए, दो रंगी, और पियक्कड़, और नीच कमाई के लोभी न हों।" ध्यान दीजिए, पहली शर्त कोई बड़ी योग्यता नहीं, बल्कि एक ही जीभ रखना है। एक व्यक्ति के सामने एक बात, पीठ पीछे दूसरी, यही दो रंगीपन है। परमेश्वर की सेवा वहीं से शुरू होती है जहाँ आपकी बात सब जगह एक जैसी रहती है।
अगुवे के लिए पौलुस ने कोई प्रतिभा नहीं गिनाई, बस स्वभाव: "पियक्कड़ या मारपीट करनेवाला न हो, वरन् कोमल हो; और न झगड़ालू और न धन का लोभी हो।" यानी परखने की जगह मंच नहीं, बल्कि वह पल है जब कोई तुम्हें चोट पहुँचाए या पैसों का मामला सामने आए। तब जो निकलता है, वही तुम्हारा असली चरित्र है। आज किसी ने तुम्हें उकसाया था?
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