7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 कुरिन्थियों 11

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाना

पौलुस एक पत्र लिख रहे थे। वे कुरिन्थुस शहर की कलीसिया के लोगों से बहुत प्यार करते थे। लेकिन वे चिंतित थे। कुछ लोग कलीसिया में आए थे जो झूठ बोल रहे थे।

पौलुस ने कहा, मैं चाहता हूँ तुम मुझे थोड़ा मूर्ख समझकर सहन करो। क्यों? क्योंकि वे कुरिन्थुस के लोगों को यीशु मसीह से जोड़ना चाहते थे, जैसे एक दुल्हन को उसके दूल्हे से जोड़ा जाता है। पौलुस डरते थे कि कहीं कोई साँप की तरह उन्हें बहका न दे, जैसे साँप ने हव्वा को बाग में बहकाया था।

ये झूठे लोग कह रहे थे, हम भी प्रेरित हैं, हमारी बात मानो, पौलुस की नहीं। वे बड़े-बड़े शब्द बोलते थे और खुद को ऊँचा दिखाते थे। पौलुस ने कहा, मैं बोलने में कुशल नहीं हूँ, पर मैं सच जानता हूँ। और मैंने तुम्हें कभी पैसों के लिए नहीं सताया। मैंने सुसमाचार मुफ़्त में सुनाया, ताकि तुम पर कोई बोझ न पड़े।

फिर पौलुस ने एक साहसी बात की। उन्होंने कहा, अगर घमण्ड करना ज़रूरी है, तो मैं भी करूँगा, पर अलग तरह से। वे झूठे प्रेरित इब्रानी होने का घमण्ड करते हैं? मैं भी इब्रानी हूँ। वे अब्राहम के वंश के होने का घमण्ड करते हैं? मैं भी हूँ।

पर फिर पौलुस ने कुछ अनोखा किया। उन्होंने अपनी ताकत नहीं, अपनी तकलीफें गिनाईं। मुझे पाँच बार कोड़े मारे गए, उन्होंने कहा। तीन बार बेंतों से पीटा गया। एक बार लोगों ने मुझ पर पत्थर फेंके। तीन बार मेरा जहाज़ समुद्र में टूट गया। एक रात मैं समुद्र में तैरता रहा। मैं नदियों के खतरे में रहा, डाकुओं से बचता रहा, भूखा रहा, ठंड में बिना कपड़ों के सोया।

क्या तुमने कभी सोचा है, इतना दर्द सहकर भी कोई मुस्कुरा सकता है?

पौलुस ने यह भी कहा, हर कलीसिया की चिंता मुझे रोज़ दबाती है। जब कोई कमज़ोर होता है, तो मैं भी कमज़ोर महसूस करता हूँ। आखिर में उन्होंने एक कहानी सुनाई। दमिश्क शहर में एक राजा के सैनिक उन्हें पकड़ना चाहते थे। वे शहर के फाटकों पर पहरा दे रहे थे। पौलुस के दोस्तों ने क्या किया? उन्होंने एक बड़ी टोकरी ली, पौलुस को उसमें बिठाया, और खिड़की से रस्सी के सहारे शहर की दीवार पर से नीचे उतार दिया। अंधेरे में टोकरी धीरे-धीरे नीचे गई, और पौलुस बच निकले।

इसका क्या मतलब है?

पौलुस कोई ऐसा सुपरहीरो नहीं था जिसे कभी चोट न लगे। वह असली आदमी था, जिसे मारा गया, जिसका जहाज़ डूबा, जो टोकरी में छिपकर भागा। फिर भी वह हार नहीं मानता था। सच्चे प्रेरित को पहचानने का तरीका बड़े-बड़े शब्द नहीं हैं, बल्कि यह है कि वह सच बोलता है और दूसरों से प्यार करता है, चाहे उसे कितना भी कष्ट क्यों न सहना पड़े। झूठे शिक्षक चमकदार दिखते हैं, पर शैतान भी खुद को ज्योतिर्मय स्वर्गदूत जैसा दिखा सकता है। इसलिए चमक देखकर नहीं, सच्चाई और प्रेम देखकर पहचानना चाहिए।

सीधा सूत्र

पौलुस ने अपनी नहीं, अपनी कमज़ोरी की डींग मारी। क्यों? क्योंकि उनकी ताकत यीशु मसीह से आती थी, खुद से नहीं। यीशु भी ताकतवर राजा जैसे नहीं आए। वे कोड़े खाए, सताए गए, क्रूस पर मरे, फिर भी हार नहीं मानी। पौलुस यीशु के नक्शेकदम पर चल रहे थे। जो यीशु से जुड़ा है, वह कष्ट में भी परमेश्वर पर भरोसा रख सकता है।

तुम्हारे लिए

कभी किसी ने तुमसे झूठ बोलकर तुम्हें बहकाने की कोशिश की हो, तो याद रखना, सच्चाई हमेशा जांचनी चाहिए। जब कोई कष्ट सहे, जैसे पौलुस ने सहा, तो परमेश्वर उसे देखता और उसकी मदद करता है। तुम भी किसी दोस्त की मदद कर सकते हो जब वह मुश्किल में हो, जैसे पौलुस के दोस्तों ने टोकरी से उसकी मदद की।

बात करो

क्या तुम्हें लगता है पौलुस डरता था जब वह टोकरी में बैठा था?

सच्चे प्रेरित को झूठे प्रेरित से कैसे पहचाना जा सकता है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय प्रभु यीशु, धन्यवाद कि पौलुस ने इतनी तकलीफ सहकर भी आपकी सच्चाई बताई। हमें भी सच्चाई पहचानने में मदद दीजिए। जब हम मुश्किल में हों, तो हमारे साथ रहिए, जैसे आप पौलुस के साथ रहे। आमीन।

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2 कुरिन्थियों 11 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 कुरिन्थियों 11 किस विषय में है?
पौलुस एक पत्र लिख रहे थे। वे कुरिन्थुस शहर की कलीसिया के लोगों से बहुत प्यार करते थे। लेकिन वे चिंतित थे। कुछ लोग कलीसिया में आए थे जो झूठ बोल रहे थे।
2 कुरिन्थियों 11 क्या कहता है?
फिर पौलुस ने एक साहसी बात की। उन्होंने कहा, अगर घमण्ड करना ज़रूरी है, तो मैं भी करूँगा, पर अलग तरह से। वे झूठे प्रेरित इब्रानी होने का घमण्ड करते हैं? मैं भी इब्रानी हूँ। वे अब्राहम के वंश के होने का घमण्ड करते हैं? मैं भी हूँ।
2 कुरिन्थियों 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पौलुस ने यह भी कहा, हर कलीसिया की चिंता मुझे रोज़ दबाती है। जब कोई कमज़ोर होता है, तो मैं भी कमज़ोर महसूस करता हूँ। आखिर में उन्होंने एक कहानी सुनाई। दमिश्क शहर में एक राजा के सैनिक उन्हें पकड़ना चाहते थे। वे शहर के फाटकों पर पहरा दे रहे थे। पौलुस के दोस्तों ने क्या किया? उन्होंने एक बड़ी टोकरी ली, पौलुस को उसमें बिठाया, और खिड़की से रस्सी के सहारे शहर की दीवार पर से नीचे उतार दिया। अंधेरे में टोकरी धीरे-धीरे नीचे गई, और पौलुस बच निकले।
बच्चे 2 कुरिन्थियों 11 से क्या सीख सकते हैं?
कभी किसी ने तुमसे झूठ बोलकर तुम्हें बहकाने की कोशिश की हो, तो याद रखना, सच्चाई हमेशा जांचनी चाहिए। जब कोई कष्ट सहे, जैसे पौलुस ने सहा, तो परमेश्वर उसे देखता और उसकी मदद करता है। तुम भी किसी दोस्त की मदद कर सकते हो जब वह मुश्किल में हो, जैसे पौलुस के दोस्तों ने टोकरी से उसकी मदद की।
2 कुरिन्थियों 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय प्रभु यीशु, धन्यवाद कि पौलुस ने इतनी तकलीफ सहकर भी आपकी सच्चाई बताई। हमें भी सच्चाई पहचानने में मदद दीजिए। जब हम मुश्किल में हों, तो हमारे साथ रहिए, जैसे आप पौलुस के साथ रहे। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस उन्हें झूठा नहीं कहता क्योंकि वे बुरे दिखते थे, बल्कि इसलिए कि वे बहुत अच्छे दिखते थे। "ऐसे लोग झूठे प्रेरित और छल से काम करनेवाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरनेवाले हैं।" रूप धरना, यानी वही भाषा, वही आत्मविश्वास, वही मंच। पहचान बातों से नहीं, क्रूस से होती है। जो तुम्हें मसीह से नहीं, अपने से जोड़ता है, उससे सावधान रहो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 29

पौलुस ने कोड़े, जहाज़ का टूटना, भूख, सब गिनाया। और सूची के अंत में सबसे भारी बोझ यह निकला: "किसको निर्बलता आती है और मैं निर्बल नहीं होता? किसको ठोकर लगती है, और मैं जलता नहीं?"

उसकी सबसे गहरी पीड़ा उसकी अपनी पीठ के घाव नहीं थे, बल्कि किसी और का गिरना था।

आज किसी के लड़खड़ाने पर तेरे भीतर क्या जलता है, या तू बस देखकर आगे बढ़ जाता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

पौलुस चेताता है: "इसलिए यदि उसके सेवक भी धार्मिकता के सेवकों के समान बनें, तो कोई बड़ी बात नहीं।" झूठ हमेशा गंदा दिखकर नहीं आता। कई बार वह मंच से, मीठी आवाज़ में, हाथ में बाइबल लिए हुए आता है। इसलिए सुंदर शब्दों से नहीं, फल से परखो। पूछो: यह आवाज़ मुझे मसीह की ओर खींच रही है, या अपनी ओर?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

क्या मैंने यह पाप किया कि तुम्हें परमेश्वर का सुसमाचार सेंत-मेंत सुनाया, और अपने आप को नीचा किया कि तुम ऊँचे हो जाओ?" पौलुस ने अपने हाथों से काम करके तम्बू सिए, ताकि किसी पर बोझ न बने। और यही बात उसके विरुद्ध इस्तेमाल हुई। सोचो, जिस प्यार में तुम झुके थे, वही तुम्हारी कमजोरी कहलाया। फिर भी पौलुस ने झुकना नहीं छोड़ा। क्या तुम छोड़ोगे?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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