2 कुरिन्थियों 11
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक आदमी था। उसका नाम पौलुस था। पौलुस यीशु से बहुत प्रेम करता था। पौलुस ने लोगों को यीशु के बारे में बताया था। बहुत लोगों को।
पर अब पौलुस दुखी था। उसे चिट्ठी लिखनी पड़ी। एक कठिन चिट्ठी। क्यों? क्योंकि कुछ लोग आए थे। वे झूठ बोलते थे। वे कहते थे, "हम बड़े हैं। पौलुस कुछ नहीं है।"
पौलुस डर गया। उसने सोचा, "ये लोग भटका देंगे।" जैसे साँप ने हव्वा को भटकाया था, बगीचे में। धीरे से, चालाकी से।
पौलुस ने कहा, "मैं भी कुछ बताऊँगा। पर यह घमण्ड नहीं है।"
इसका मतलब क्या है?
पौलुस ने अपनी तकलीफें गिनाईं। सुनो, कितनी बड़ी बातें थीं।
उसे कोड़े मारे गए। पाँच बार। उनतालीस-उनतालीस कोड़े। उसकी पीठ पर, दर्द से।
जहाज़ टूटा। तीन बार। पानी ठंडा था, लहरें ऊँची थीं। पौलुस समुद्र में तैरता रहा। एक पूरी रात और एक पूरा दिन।
उसे पत्थर मारे गए। उसे भूख लगी, प्यास लगी। उसे ठंड लगी, कपड़े नहीं थे।
पर पौलुस ने यह सब क्यों सहा? क्योंकि वह चाहता था कि लोग यीशु को जानें। वह थका नहीं। वह रुका नहीं।
समान सूत्र
एक रात, पौलुस दमिश्क शहर में था। बुरे लोग उसे पकड़ना चाहते थे। उन्होंने फाटकों पर पहरा बिठाया।
तब दोस्तों ने एक बड़ी टोकरी ली। पौलुस उसमें बैठा। धीरे-धीरे, टोकरी नीचे उतरी। दीवार से होकर, अंधेरे में।
पौलुस बच गया।
यीशु भी एक बार बहुत दुखी हुए थे। बहुत मारे गए। क्रूस पर मरे। पर परमेश्वर ने उन्हें फिर से जिलाया। यीशु सबसे कमज़ोर दिखे, पर सबसे ताकतवर निकले।
पौलुस भी कमज़ोर दिखा। पर परमेश्वर उसके साथ था। हर कठिन दिन में।
तुम्हारे लिए
क्या कभी तुम डरे हो? अंधेरे में, या अकेले में?
पौलुस भी डरा था। पर उसके दोस्तों ने उसकी मदद की। टोकरी से उसे बचाया।
परमेश्वर तुम्हें भी कभी अकेला नहीं छोड़ते। वे तुम्हारे पास हमेशा रहते हैं। जब तुम डरो, तब भी।
आपस में बात करो
पौलुस को कितनी तकलीफें सहनी पड़ीं? तुम्हें कौन सी तकलीफ याद रही?
पौलुस के दोस्तों ने टोकरी से उसकी मदद की। तुम किसकी मदद कर सकते हो?
संग प्रार्थना
हे परमेश्वर, पौलुस बहुत बहादुर था। उसने यीशु के बारे में बताया, कठिन दिनों में भी। आप हमारे साथ भी रहिए। जब हम डरें, हमें साहस दीजिए। आमीन।
2 कुरिन्थियों 11 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 कुरिन्थियों 11 किस विषय में है?
2 कुरिन्थियों 11 क्या कहता है?
2 कुरिन्थियों 11 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 2 कुरिन्थियों 11 से क्या सीख सकते हैं?
2 कुरिन्थियों 11 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस उन्हें झूठा नहीं कहता क्योंकि वे बुरे दिखते थे, बल्कि इसलिए कि वे बहुत अच्छे दिखते थे। "ऐसे लोग झूठे प्रेरित और छल से काम करनेवाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरनेवाले हैं।" रूप धरना, यानी वही भाषा, वही आत्मविश्वास, वही मंच। पहचान बातों से नहीं, क्रूस से होती है। जो तुम्हें मसीह से नहीं, अपने से जोड़ता है, उससे सावधान रहो।
पौलुस ने कोड़े, जहाज़ का टूटना, भूख, सब गिनाया। और सूची के अंत में सबसे भारी बोझ यह निकला: "किसको निर्बलता आती है और मैं निर्बल नहीं होता? किसको ठोकर लगती है, और मैं जलता नहीं?"
उसकी सबसे गहरी पीड़ा उसकी अपनी पीठ के घाव नहीं थे, बल्कि किसी और का गिरना था।
आज किसी के लड़खड़ाने पर तेरे भीतर क्या जलता है, या तू बस देखकर आगे बढ़ जाता है?
पौलुस चेताता है: "इसलिए यदि उसके सेवक भी धार्मिकता के सेवकों के समान बनें, तो कोई बड़ी बात नहीं।" झूठ हमेशा गंदा दिखकर नहीं आता। कई बार वह मंच से, मीठी आवाज़ में, हाथ में बाइबल लिए हुए आता है। इसलिए सुंदर शब्दों से नहीं, फल से परखो। पूछो: यह आवाज़ मुझे मसीह की ओर खींच रही है, या अपनी ओर?
क्या मैंने यह पाप किया कि तुम्हें परमेश्वर का सुसमाचार सेंत-मेंत सुनाया, और अपने आप को नीचा किया कि तुम ऊँचे हो जाओ?" पौलुस ने अपने हाथों से काम करके तम्बू सिए, ताकि किसी पर बोझ न बने। और यही बात उसके विरुद्ध इस्तेमाल हुई। सोचो, जिस प्यार में तुम झुके थे, वही तुम्हारी कमजोरी कहलाया। फिर भी पौलुस ने झुकना नहीं छोड़ा। क्या तुम छोड़ोगे?
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