7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 राजाओं 10

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

येहू नाम का एक सेनापति इस्राएल का राजा बन गया था। लेकिन अभी भी अहाब के परिवार के बहुत सारे लोग जीवित थे, सत्तर बेटे और पोते। येहू ने सामरिया के अधिकारियों को पत्र लिखा, "अपने स्वामी के बेटों में से जो सबसे अच्छा हो, उसे राजा बना लो, और लड़ने के लिए तैयार हो जाओ।"

अधिकारी डर गए। उन्होंने सोचा, "अगर दो राजा भी येहू के सामने नहीं ठहर सके, तो हम कैसे ठहरेंगे?" इसलिए उन्होंने कहा, "हम तेरे दास हैं, तू जो कहेगा वही करेंगे।" येहू ने फिर एक पत्र भेजा, यह पत्र बहुत कठोर था। उसने कहा कि उन सत्तर राजपुत्रों के सिर काटकर उसके पास भेज दिए जाएँ। और वैसा ही हुआ। सिर टोकरियों में रखकर लाए गए और नगर के फाटक में दो ढेर करके रखे गए।

सुबह येहू बाहर आया और लोगों से बोला, "देख लो, यहोवा ने वह वचन पूरा किया जो उन्होंने एलिय्याह के द्वारा अहाब के घराने के विरुद्ध कहा था।" फिर येहू ने अहाब के बचे हुए सभी लोगों, याजकों और मित्रों को मार डाला।

रास्ते में येहू की मुलाकात यहूदा के राजा के भाइयों से हुई, बयालीस पुरुष थे। उन्हें भी पकड़कर मार डाला गया। फिर एक और मनुष्य आया, जिसका नाम यहोनादाब था। येहू ने उससे पूछा, "क्या तेरा मन मेरे प्रति निष्कपट है?" यहोनादाब ने कहा, "हाँ।" येहू ने कहा, "तो अपना हाथ मुझे दे," और उसे अपने रथ पर बिठा लिया।

सामरिया पहुँचकर येहू ने बाल नाम के झूठे देवता के सभी उपासकों को इकट्ठा किया। उसने चतुराई से उन सबको एक बड़ी सभा के लिए बुलाया, जैसे कोई उत्सव होने वाला हो। जब सब भवन में भर गए, येहू ने अपने सैनिकों को भेजा और सभी को तलवार से मार डाला। फिर उन्होंने बाल की मूर्तियाँ तोड़ दीं और उसके भवन को ही नष्ट कर दिया।

लेकिन कहानी का अंत सुंदर नहीं है। येहू ने बाल को तो हटाया, पर उसने उन सुनहरे बछड़ों की पूजा नहीं छोड़ी, जो यारोबाम ने बनाई थी। यहोवा ने कहा कि उसके परिवार का राज्य आगे भी रहेगा, क्योंकि उसने अहाब के घराने से न्याय किया। परन्तु येहू का मन पूरी तरह से यहोवा के साथ नहीं था।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी डरावनी है, और हमें इसे छिपाना नहीं चाहिए। खून बहा, सिर काटे गए, लोग मारे गए। लेकिन इसके पीछे एक बात छिपी है, यहोवा अपने वचन को पूरा करते हैं। एलिय्याह ने बरसों पहले कहा था कि अहाब के घराने पर न्याय आएगा, और वह वचन एक-एक शब्द सच हुआ। परमेश्वर झूठे नहीं बोलते।

लेकिन येहू खुद भी सच्चा नहीं था। उसने बाल को हटाया, मगर अपने मन को पूरी तरह से यहोवा को नहीं दिया। वह आधा-आधा रहा। यह हमें सिखाता है कि बाहर से सही काम करना काफी नहीं है, मन भी सच्चा होना चाहिए।

समान सूत्र

परमेश्वर ने एलिय्याह के द्वारा जो वचन दिया, वह पूरा हुआ, एक भी बात व्यर्थ नहीं गई। यही परमेश्वर का स्वभाव है, वे जो कहते हैं वह करते हैं। यीशु मसीह के बारे में भी यही सच है। सदियों पहले भविष्यवक्ताओं ने जो कहा था, वह उनमें पूरा हुआ। परमेश्वर की योजना कभी टूटती नहीं।

लेकिन येहू का आधा मन हमें एक और बात याद दिलाता है, हमें भी एक पूरे मन की ज़रूरत है। यीशु ही वह हैं जो अपना पूरा जीवन, अपना पूरा मन, अपने पिता को दे दिया। येहू जो नहीं कर सका, यीशु ने किया।

तुझ में

क्या तेरा मन यहोवा के प्रति सच्चा है, जैसे यहोनादाब का था? यह सवाल आज तुझसे भी पूछा जा सकता है। तू आधा-आधा नहीं, पूरे मन से परमेश्वर से प्रेम कर सकता है। जब तू प्रार्थना करता है, जब तू सच बोलता है, जब तू अपने भाई-बहन के साथ अच्छा व्यवहार करता है, यह सब पूरे मन से कर। परमेश्वर आधे मन से खुश नहीं होते, वे तेरा पूरा हृदय चाहते हैं।

बात करें

येहू ने बाल के उपासकों को हटाया, पर अपने मन को पूरी तरह परमेश्वर को नहीं दिया। तेरे विचार में इसका क्या मतलब है, "पूरे मन से" परमेश्वर से प्रेम करना?

यहोनादाब ने अपना हाथ येहू को दिया और उसके साथ चला। क्या तू परमेश्वर के साथ इसी तरह चलने के लिए तैयार है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आप हमेशा अपना वचन पूरा करते हैं, यह जानकर हमें भरोसा मिलता है। कृपया हमारा मन आधा नहीं, बल्कि पूरा आपकी ओर मोड़ दीजिए। हमें सच्चाई से आपसे प्रेम करना सिखाइए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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2 राजाओं 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 राजाओं 10 किस विषय में है?
येहू नाम का एक सेनापति इस्राएल का राजा बन गया था। लेकिन अभी भी अहाब के परिवार के बहुत सारे लोग जीवित थे, सत्तर बेटे और पोते। येहू ने सामरिया के अधिकारियों को पत्र लिखा, "अपने स्वामी के बेटों में से जो सबसे अच्छा हो, उसे राजा बना लो, और लड़ने के लिए तैयार हो जाओ।"
2 राजाओं 10 क्या कहता है?
रास्ते में येहू की मुलाकात यहूदा के राजा के भाइयों से हुई, बयालीस पुरुष थे। उन्हें भी पकड़कर मार डाला गया। फिर एक और मनुष्य आया, जिसका नाम यहोनादाब था। येहू ने उससे पूछा, "क्या तेरा मन मेरे प्रति निष्कपट है?" यहोनादाब ने कहा, "हाँ।" येहू ने कहा, "तो अपना हाथ मुझे दे," और उसे अपने रथ पर बिठा लिया।
2 राजाओं 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह कहानी डरावनी है, और हमें इसे छिपाना नहीं चाहिए। खून बहा, सिर काटे गए, लोग मारे गए। लेकिन इसके पीछे एक बात छिपी है, यहोवा अपने वचन को पूरा करते हैं। एलिय्याह ने बरसों पहले कहा था कि अहाब के घराने पर न्याय आएगा, और वह वचन एक-एक शब्द सच हुआ। परमेश्वर झूठे नहीं बोलते।
बच्चे 2 राजाओं 10 से क्या सीख सकते हैं?
लेकिन येहू का आधा मन हमें एक और बात याद दिलाता है, हमें भी एक पूरे मन की ज़रूरत है। यीशु ही वह हैं जो अपना पूरा जीवन, अपना पूरा मन, अपने पिता को दे दिया। येहू जो नहीं कर सका, यीशु ने किया।
2 राजाओं 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यहोनादाब ने अपना हाथ येहू को दिया और उसके साथ चला। क्या तू परमेश्वर के साथ इसी तरह चलने के लिए तैयार है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

येहू ने पूछा, "तुम कौन हो?" और उन्होंने सहज भाव से उत्तर दिया, "हम अहज्याह के भाई हैं," और आगे बढ़ गए। वे कुशल क्षेम पूछने निकले थे, पर उन्हें पता ही नहीं था कि जिस घराने से वे जुड़े हैं, उस पर न्याय आ चुका है।

कभी रुककर पूछो: मैं किस रास्ते पर आदत से चल रहा हूँ? क्या मैंने सचमुच परमेश्वर से पूछा है, या बस चलता जा रहा हूँ?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

येहू का बुलावा सुनते ही बाल के सारे उपासक दौड़े चले आए। क्यों? क्योंकि उसने ठीक वही कहा जो उनका मन सुनना चाहता था: "बाल के लिये मेरा बड़ा यज्ञ होनेवाला है।" धोखा तब सबसे आसानी से भीतर घुसता है जब वह हमारी इच्छा से मेल खाता है। सोच, आज कौन सा बुलावा तुझे बिना जाँचे दौड़ा देता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

बाल के उपासकों को खास वस्त्र दिए गए, "बाल के सब उपासकों के लिये वस्त्र निकाल ले आ।" उन्हें लगा यह सम्मान है, पर वही पोशाक उनकी पहचान बनी, और उसी पहचान से न्याय आया। जो हम गर्व से पहनते हैं, वही कभी-कभी हमारे विरुद्ध गवाही बन जाता है। आज तुम्हारे ऊपर क्या ओढ़ा हुआ है? कौन सा नाम, कौन सी छवि, जिसे तुम मंदिर तक पहनकर जाते हो? परमेश्वर वस्त्र नहीं, मन देखता है।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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