3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

2 राजाओं 10

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक राजा था। उसका नाम था येहू।

एक और राजा था, बहुत पहले। उसका नाम था अहाब। अहाब ने बुरे काम किए थे। उसने बाल नाम की मूरत की पूजा की थी।

परमेश्वर ने कहा था, "अहाब के घर पर मैं दुःख लाऊँगा।" यह बात एलिय्याह नाम के भविष्यवक्ता ने पहले ही कह दी थी।

अब येहू राजा बना। येहू ने अहाब के सारे परिवार को हटा दिया। यह सुनकर लोग डर गए। बहुत डर गए।

फिर येहू ने एक चतुर काम किया। उसने कहा, "मैं बाल की पूजा करूँगा, बहुत सारी पूजा।" उसने बाल के सारे पुजारियों को बुलाया। वे सब एक बड़े घर में आए। घर एक सिरे से दूसरे सिरे तक भर गया।

पर येहू सच में बाल की पूजा नहीं करना चाहता था। वह उन्हें हटाना चाहता था।

जब सब भीतर गए, तो येहू के सिपाहियों ने द्वार बंद कर दिए। किसी को बाहर निकलने नहीं दिया। फिर बाल का घर तोड़ दिया गया।

इसका क्या अर्थ है?

परमेश्वर ने जो कहा था, वह सच निकला। एक भी बात खाली नहीं गई। येहू ने खुद कहा, "यहोवा ने अपने दास एलिय्याह के द्वारा जो कहा था, उसे पूरा किया है।"

परमेश्वर जो बोलते हैं, वह होता है। सूरज उगता है, बारिश गिरती है, और परमेश्वर की बात भी वैसे ही सच होती है।

समान सूत्र

परमेश्वर बहुत पहले से बोलते आए हैं। उन्होंने वादे किए, और वे वादे पूरे हुए। बहुत बाद में परमेश्वर ने सबसे बड़ा वादा पूरा किया। उन्होंने अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा। यीशु आए, ताकि लोग बुराई से बच सकें। परमेश्वर की बातें हमेशा सच निकलती हैं। यह कहानी भी यही दिखाती है।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी किसी से वादा किया? और फिर वह वादा पूरा किया?

परमेश्वर हमेशा अपनी बात रखते हैं। वे झूठ नहीं बोलते। जब परमेश्वर कुछ कहते हैं, तुम उन पर भरोसा कर सकते हो।

बात करें

तुम्हें क्या लगता है, जब परमेश्वर कुछ कहते हैं, क्या वह हमेशा सच होता है?

क्या तुमने कभी किसी का वादा टूटते देखा? परमेश्वर का वादा कैसा है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आप जो कहते हैं, वह सच होता है। आप कभी झूठ नहीं बोलते। मुझे आप पर भरोसा करना सिखाइए। धन्यवाद, क्योंकि आप अच्छे हैं। आमीन।

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2 राजाओं 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 राजाओं 10 किस विषय में है?
एक और राजा था, बहुत पहले। उसका नाम था अहाब। अहाब ने बुरे काम किए थे। उसने बाल नाम की मूरत की पूजा की थी।
2 राजाओं 10 क्या कहता है?
फिर येहू ने एक चतुर काम किया। उसने कहा, "मैं बाल की पूजा करूँगा, बहुत सारी पूजा।" उसने बाल के सारे पुजारियों को बुलाया। वे सब एक बड़े घर में आए। घर एक सिरे से दूसरे सिरे तक भर गया।
2 राजाओं 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने जो कहा था, वह सच निकला। एक भी बात खाली नहीं गई। येहू ने खुद कहा, "यहोवा ने अपने दास एलिय्याह के द्वारा जो कहा था, उसे पूरा किया है।"
नन्हे बच्चे 2 राजाओं 10 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुमने कभी किसी से वादा किया? और फिर वह वादा पूरा किया?
2 राजाओं 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुमने कभी किसी का वादा टूटते देखा? परमेश्वर का वादा कैसा है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

येहू ने पूछा, "तुम कौन हो?" और उन्होंने सहज भाव से उत्तर दिया, "हम अहज्याह के भाई हैं," और आगे बढ़ गए। वे कुशल क्षेम पूछने निकले थे, पर उन्हें पता ही नहीं था कि जिस घराने से वे जुड़े हैं, उस पर न्याय आ चुका है।

कभी रुककर पूछो: मैं किस रास्ते पर आदत से चल रहा हूँ? क्या मैंने सचमुच परमेश्वर से पूछा है, या बस चलता जा रहा हूँ?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

येहू का बुलावा सुनते ही बाल के सारे उपासक दौड़े चले आए। क्यों? क्योंकि उसने ठीक वही कहा जो उनका मन सुनना चाहता था: "बाल के लिये मेरा बड़ा यज्ञ होनेवाला है।" धोखा तब सबसे आसानी से भीतर घुसता है जब वह हमारी इच्छा से मेल खाता है। सोच, आज कौन सा बुलावा तुझे बिना जाँचे दौड़ा देता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

बाल के उपासकों को खास वस्त्र दिए गए, "बाल के सब उपासकों के लिये वस्त्र निकाल ले आ।" उन्हें लगा यह सम्मान है, पर वही पोशाक उनकी पहचान बनी, और उसी पहचान से न्याय आया। जो हम गर्व से पहनते हैं, वही कभी-कभी हमारे विरुद्ध गवाही बन जाता है। आज तुम्हारे ऊपर क्या ओढ़ा हुआ है? कौन सा नाम, कौन सी छवि, जिसे तुम मंदिर तक पहनकर जाते हो? परमेश्वर वस्त्र नहीं, मन देखता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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