7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 पतरस 2

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाना

पतरस एक कहानी सुनाता है, पर यह कहानी डराने के लिए नहीं, सच बताने के लिए है। वह कहता है, "जैसे पुराने दिनों में झूठे भविष्यद्वक्ता थे, वैसे ही तुम्हारे बीच में भी झूठे उपदेशक आएँगे।" ये लोग बाहर से अच्छे दिखते हैं, पर अंदर से छिपकर गलत बातें सिखाते हैं। वे यीशु मसीह को नकारते हैं, जिन्होंने उन्हें बचाया था।

पतरस पुरानी कहानियाँ याद दिलाता है। एक बार स्वर्गदूतों ने पाप किया, तो परमेश्वर ने उन्हें अंधेरे में बंद कर दिया। जब पूरी धरती पर बुराई फैल गई, तो परमेश्वर ने बड़ी बाढ़ भेजी, पर नूह और उसके सात परिवार वालों को नाव में सुरक्षित रखा। सदोम और गमोरा नगर इतने बुरे हो गए थे कि परमेश्वर ने उन्हें आग से जला दिया। पर लूत, जो एक धर्मी आदमी था, वहाँ से बचाया गया। हर दिन उसका दिल दुखता था, क्योंकि वह अपने चारों ओर बुराई देखता था।

फिर पतरस बिलाम की कहानी बताता है। बिलाम पैसे के लालच में गलत राह पर चला। उसकी गधी ने उसे रोका, मनुष्य की तरह बोलकर। "तू यह क्या कर रहा है?" मानो वह पूछ रही थी। यह कितना अजीब पर सच्चा किस्सा है।

इसका क्या मतलब है?

पतरस बताना चाहता है कि परमेश्वर देखते हैं, कौन उनकी बात मानता है और कौन छुपकर झूठ फैलाता है। वे अंधे नहीं हैं। जैसे उन्होंने नूह को बचाया और लूत को निकाला, वैसे ही वे अपने विश्वासी बच्चों को आज भी बचाते हैं। पर जो जानबूझकर गलत राह चुनते हैं, वे खुद अपने लिए मुश्किल बुलाते हैं। यह कोई डरावनी धमकी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है, जैसे एक पिता अपने बच्चे को खतरे से दूर रखना चाहता है।

सुनहरा धागा

इस पूरी कहानी के बीच में एक बात हर जगह चमकती है। परमेश्वर हमेशा अपने भक्तों को बचाने का रास्ता जानते हैं। नूह के लिए नाव थी। लूत के लिए स्वर्गदूत आए। और हमारे लिए यीशु मसीह आए हैं। वे हमें बुराई से बाहर निकालते हैं, जैसे उन्होंने नूह और लूत को निकाला। यीशु ही वह प्रभु हैं, जिन्होंने हमें मोल लिया है, जैसे पतरस लिखता है। इसलिए हम उनकी बात सुनते हैं, न कि झूठे उपदेशकों की।

तुम्हारे लिए

तुम भी कभी ऐसी जगह में हो सकते हो, जहाँ सब लोग गलत काम कर रहे हों। शायद कोई झूठ बोलने को कहे या किसी को चिढ़ाने को कहे। लूत की तरह तुम्हारा दिल भी दुखेगा। पर तुम परमेश्वर से कह सकते हो, "मुझे सही राह दिखाइए।" जब कोई तुम्हें बुरी बात करने को कहे, तो याद रखो, नूह की नाव जैसे तुम्हें भी बचाने वाला कोई है, वह हैं यीशु मसीह।

बातचीत करें

क्या तुम्हें लगता है लूत के लिए वहाँ रहना मुश्किल रहा होगा? क्यों?

अगर कोई तुम्हें गलत काम करने को कहे, तो तुम क्या करोगे?

साथ में प्रार्थना करें

प्रभु यीशु, आपने नूह को बचाया, लूत को निकाला। मुझे भी सही राह पर चलने में मदद कीजिए। जब कोई गलत बात कहे, तो मुझे साहस दीजिए कि मैं आपकी सुनूँ। धन्यवाद कि आप हमेशा देखते हैं और बचाते हैं। आमीन।

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2 पतरस 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 पतरस 2 किस विषय में है?
पतरस एक कहानी सुनाता है, पर यह कहानी डराने के लिए नहीं, सच बताने के लिए है। वह कहता है, "जैसे पुराने दिनों में झूठे भविष्यद्वक्ता थे, वैसे ही तुम्हारे बीच में भी झूठे उपदेशक आएँगे।" ये लोग बाहर से अच्छे दिखते हैं, पर अंदर से छिपकर गलत बातें सिखाते हैं। वे यीशु मसीह को नकारते हैं, जिन्होंने उन्हें बचाया था।
2 पतरस 2 क्या कहता है?
पतरस पुरानी कहानियाँ याद दिलाता है। एक बार स्वर्गदूतों ने पाप किया, तो परमेश्वर ने उन्हें अंधेरे में बंद कर दिया। जब पूरी धरती पर बुराई फैल गई, तो परमेश्वर ने बड़ी बाढ़ भेजी, पर नूह और उसके सात परिवार वालों को नाव में सुरक्षित रखा। सदोम और गमोरा नगर इतने बुरे हो गए थे कि परमेश्वर ने उन्हें आग से जला दिया। पर लूत, जो एक धर्मी आदमी था, वहाँ से बचाया गया। हर दिन उसका दिल दुखता था, क्योंकि वह अपने चारों ओर बुराई देखता था।
2 पतरस 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर पतरस बिलाम की कहानी बताता है। बिलाम पैसे के लालच में गलत राह पर चला। उसकी गधी ने उसे रोका, मनुष्य की तरह बोलकर। "तू यह क्या कर रहा है?" मानो वह पूछ रही थी। यह कितना अजीब पर सच्चा किस्सा है।
बच्चे 2 पतरस 2 से क्या सीख सकते हैं?
पतरस बताना चाहता है कि परमेश्वर देखते हैं, कौन उनकी बात मानता है और कौन छुपकर झूठ फैलाता है। वे अंधे नहीं हैं। जैसे उन्होंने नूह को बचाया और लूत को निकाला, वैसे ही वे अपने विश्वासी बच्चों को आज भी बचाते हैं। पर जो जानबूझकर गलत राह चुनते हैं, वे खुद अपने लिए मुश्किल बुलाते हैं। यह कोई डरावनी धमकी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है, जैसे एक पिता अपने बच्चे को खतरे से दूर रखना चाहता है।
2 पतरस 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
इस पूरी कहानी के बीच में एक बात हर जगह चमकती है। परमेश्वर हमेशा अपने भक्तों को बचाने का रास्ता जानते हैं। नूह के लिए नाव थी। लूत के लिए स्वर्गदूत आए। और हमारे लिए यीशु मसीह आए हैं। वे हमें बुराई से बाहर निकालते हैं, जैसे उन्होंने नूह और लूत को निकाला। यीशु ही वह प्रभु हैं, जिन्होंने हमें मोल लिया है, जैसे पतरस लिखता है। इसलिए हम उनकी बात सुनते हैं, न कि झूठे उपदेशकों की।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

सदोम की राख आज भी बोलती है। परमेश्वर ने उन नगरों को "आनेवाले भक्तिहीन लोगों के लिए एक दृष्टांत" बना दिया। सोचो, एक पूरा शहर एक चेतावनी बनकर रह गया। पतरस यह डराने नहीं, बचाने के लिए लिख रहा है। जिस पाप को तू "छोटी सी बात" कहकर टालता है, कहीं वही तेरे घर की नींव तो नहीं बनता जा रहा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

बिलाम भविष्यद्वक्ता था, फिर भी देखने में चूक गया। गदही ने देखा, वह नहीं। "अबोल गदही ने मनुष्य की बोली से बिलाम को उसके बावलेपन से रोका।" जब पैसे का लालच आँखों पर चढ़ जाता है, तो परमेश्वर कभी सबसे मामूली ज़रिए से हमें रोकता है। आज किसकी आवाज़ तुझे टोक रही है, जिसे तू छोटा समझकर अनसुना कर रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

झूठे शिक्षकों की पहचान पतरस लोभ से करता है: "और वे लोभ के कारण गढ़ी हुई बातों से तुम्हें अपने लाभ का कारण बनाएँगे।" तुम उनके लिए भेड़ नहीं, कमाई का साधन हो। पर ध्यान दो, परमेश्वर का न्याय "ऊँघता नहीं।" जो चुप्पी तुम्हें लगती है कि वह सो रहा है, वह असल में जागता हुआ इंतज़ार है। तुम्हें बदला लेने की ज़रूरत नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

स्वर्गदूत, जो परमेश्वर के सिंहासन के सबसे पास खड़े थे, उन्हें भी छोड़ा नहीं गया: "परमेश्वर ने उन स्वर्गदूतों को जिन्होंने पाप किया, नहीं छोड़ा।" ऊँचा पद किसी को बचा नहीं पाता। पतरस यह झूठे उपदेशकों के बारे में लिख रहा है, पर बात हम तक भी आती है। तेरी सेवा, तेरा नाम, तेरी कुर्सी तुझे नहीं थामेगी। केवल नम्र मन थामेगा, जो आज भी परमेश्वर के आगे झुकना जानता है।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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