2 तीमुथियुस 4
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस यह पत्र तब लिख रहे हैं जब वे बूढ़े हो गए हैं और जेल में हैं। वे जानते हैं कि उनका जीवन अब जल्दी समाप्त होने वाला है। यह उनके प्रिय शिष्य तीमुथियुस को लिखा गया आखिरी पत्र है, और इसमें एक बूढ़े व्यक्ति का दिल खुलकर सामने आता है।
पौलुस तीमुथियुस को एक गंभीर आदेश देते हैं, परमेश्वर और यीशु मसीह को गवाह बनाकर। वे कहते हैं, "वचन का प्रचार कर, समय और असमय तैयार रह।" यानी चाहे सही मौका हो या न हो, चाहे लोग सुनना चाहें या न चाहें, तीमुथियुस को परमेश्वर का वचन सुनाते रहना है। पौलुस चेतावनी देते हैं कि एक समय आएगा जब लोग सच्चा उपदेश सहन नहीं करेंगे, बल्कि वे केवल वही सुनना चाहेंगे जो उनके कानों को अच्छा लगे। यह कैसा अजीब चित्र है, "कानों की खुजली"! जब कान में खुजली होती है तो हम कुछ भी खुजाकर आराम चाहते हैं, सही चीज़ नहीं बल्कि सुखद चीज़। ऐसे ही कुछ लोग सच्चाई नहीं बल्कि मनपसंद बातें सुनना चाहेंगे।
फिर पौलुस अपने बारे में कुछ बहुत गहरा कहते हैं। वे कहते हैं, "मैं अर्घ के समान उण्डेला जाता हूँ।" अर्घ यानी वह भेंट जो पुराने समय में परमेश्वर को चढ़ाने के लिए तरल पदार्थ के रूप में डाली जाती थी। पौलुस अपना जीवन ऐसी ही भेंट के रूप में देखते हैं, पूरी तरह से परमेश्वर के लिए दिया गया। वे कहते हैं, "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ, मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्वास की रखवाली की है।" इसके बाद वे नाम लेते हैं, कुछ लोग जो उन्हें छोड़ गए, जैसे देमास, और कुछ जो साथ रहे, जैसे लूका। वे तीमुथियुस से कहते हैं कि जल्दी आ जाए, और सर्दी से पहले।
What Does This Mean?
यह अध्याय हमें एक ऐसे व्यक्ति के दिल के भीतर ले जाता है जो जानता है कि उसका अंत निकट है। पौलुस डरे हुए नहीं हैं, बल्कि शांत हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी परमेश्वर के हाथ में सौंप दी है। पर ध्यान दें, यह कोई परी कथा नहीं है जहाँ सब कुछ आसान रहा। देमास ने उन्हें छोड़ दिया। सिकंदर नाम के एक ठठेरे ने उनके साथ बुरा किया। जब पौलुस पर मुकदमा चला तो "किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया।" यह पढ़ते हुए दुख होता है। एक इतना बड़ा प्रेरित, और फिर भी अकेला छोड़ दिया गया।
पर यहीं पौलुस कुछ सिखाते हैं जो शायद सबसे ज़रूरी बात है इस अध्याय में, "प्रभु मेरा सहायक रहा।" जब इंसान साथ छोड़ देते हैं, परमेश्वर साथ नहीं छोड़ते। यह वादा नहीं है कि सब कुछ आसान होगा, बल्कि यह वादा है कि परमेश्वर अंत तक साथ रहते हैं।
The Common Thread
पौलुस बताते हैं कि उनके लिए "धार्मिकता का मुकुट" रखा हुआ है, जो प्रभु उस दिन देंगे जब वे प्रगट होंगे। यह मुकुट सिर्फ पौलुस के लिए नहीं, बल्कि उन सब के लिए है "जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।" यह उस बड़ी कहानी की ओर इशारा करता है जो पूरी बाइबल में चलती है, परमेश्वर एक दिन सब कुछ ठीक करेंगे, यीशु मसीह फिर आएँगे, और जो लोग उनके साथ बने रहे हैं उन्हें वे नहीं भूलेंगे। पौलुस का जीवन खत्म हो रहा है, पर उनकी आशा खत्म नहीं हो रही। वे जानते हैं कि उनकी दौड़ का अंत मृत्यु नहीं बल्कि परमेश्वर का घर है।
For You
तुम शायद अभी किसी जेल में नहीं बैठे हो, पर तुम्हारे जीवन में भी ऐसे पल आएँगे जब सच बोलना आसान नहीं होगा, या जब कोई दोस्त तुम्हें छोड़ देगा, या जब तुम्हें लगेगा कि तुम्हारी बात कोई सुनना नहीं चाहता। ऐसे समय में पौलुस की यह बात याद रखने लायक है, सच बोलते रहो, चाहे लोग सुनना चाहें या नहीं। और जब कोई तुम्हें अकेला छोड़ दे, याद रखो कि परमेश्वर वह नहीं करते।
Talk About It
तुम्हें क्या लगता है, आज के समय में लोग किस तरह "कानों की खुजली" के कारण सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं?
पौलुस कहते हैं "प्रभु मेरा सहायक रहा" तब भी जब सब उन्हें छोड़ गए थे। क्या तुम्हारे जीवन में कभी ऐसा वक्त आया जब तुम्हें परमेश्वर पर ही भरोसा करना पड़ा?
Praying Together
प्रभु, धन्यवाद कि आप अंत तक साथ रहते हैं, चाहे इंसान हमें छोड़ भी दें। हमें सच बोलने की हिम्मत दीजिए, चाहे सुनने वाला कोई न हो। और वह दिन आने पर हमें भी अपने पास बुलाइए, जब आप प्रगट होंगे। आमीन।
2 तीमुथियुस 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 तीमुथियुस 4 किस विषय में है?
2 तीमुथियुस 4 क्या कहता है?
2 तीमुथियुस 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 2 तीमुथियुस 4 से क्या सीख सकते हैं?
2 तीमुथियुस 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस जंजीरों में है, अंत पास है, और आखिरी सांसों में वह तीमुथियुस से कहता है, "तू वचन का प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह।" सुविधा का इंतज़ार मत कर। और ध्यान दे, डाँटने के साथ वह "सब प्रकार की सहनशीलता" जोड़ता है। सच बोलना आसान है, सच बोलकर उस इंसान के साथ धीरज से ठहरे रहना कठिन। तू किसके लिए ठहरा हुआ है?
पौलुस मृत्यु के करीब है, जंजीरों में है, और उसके मन में क्या है? नाम। "प्रिस्का और अक्विला को, और उनेसिफुरुस के घराने को नमस्कार।" उनेसिफुरुस ने रोम में उसे ढूंढ़कर ताज़गी दी थी, अब पौलुस उसके घर वालों को याद कर रहा है। अंतिम घड़ी में भी रिश्ते नहीं भूले। तुम्हारे मन में आज किसका नाम है, जिसे तुमने कब से याद नहीं किया?
पौलुस लिखता है, "क्योंकि ऐसा समय आएगा, जब लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुत सारे उपदेशक बटोर लेंगे।" ध्यान दे, वे शिक्षकों को ठुकराते नहीं, बल्कि बटोरते हैं। खतरा सुनना छोड़ देना नहीं, बल्कि वही सुनना है जो मन को गुदगुदाए। आज खुद से पूछ: मैं वह सुनता हूँ जो मुझे अच्छा लगता है, या वह जो मुझे बदलता है?
पौलुस, जिसके हाथों से परमेश्वर ने अनोखे सामर्थ्य के काम किए थे, लिखता है: "त्रुफिमुस को मैंने मिलेतुस में बीमार छोड़ा।" चंगाई हर बार नहीं आई। वह अपने साथी को बीमार छोड़कर आगे बढ़ा, और यह बात उसने छिपाई नहीं। तेरी वह प्रार्थना जिसका उत्तर अब तक नहीं मिला, तुझे विश्वास से बाहर नहीं करती। परमेश्वर की नज़र में तू भूला नहीं गया है।
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