2 तीमुथियुस 4
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक बूढ़े आदमी थे। उनका नाम पौलुस था। वे एक अंधेरी जेल में बैठे थे।
पौलुस बहुत बूढ़े हो गए थे। अब उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा था। वे जानते थे, वे जल्दी ही परमेश्वर के पास चले जाएँगे।
पौलुस के पास एक छोटा दोस्त था। उसका नाम तीमुथियुस था। पौलुस ने तीमुथियुस को एक चिट्ठी लिखी।
चिट्ठी में पौलुस ने कहा, "मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ। मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है।"
क्या तुमने कभी दौड़ लगाई है? दौड़ते-दौड़ते साँस फूलती है। पैर थक जाते हैं। पर फिर तुम आख़िरी रेखा पर पहुँच जाते हो। पौलुस भी अपनी दौड़ पूरी कर चुके थे।
इसका क्या अर्थ है?
पौलुस अकेले थे। कुछ दोस्त उन्हें छोड़ गए थे। एक दोस्त का नाम देमास था। वह चला गया।
पर एक दोस्त रह गया। उसका नाम लूका था। लूका पौलुस के पास ही रहा। कैसा अच्छा दोस्त था लूका।
पौलुस डरे नहीं। वे जानते थे, वे अकेले नहीं हैं। पौलुस ने कहा, "प्रभु मेरा सहायक रहा।" प्रभु ने उन्हें सिंह के मुँह से भी बचाया था।
सोचो, एक बड़ा शेर, बड़ा-बड़ा मुँह, तेज दांत। पर प्रभु ने पौलुस को बचा लिया। कितने अच्छे हैं प्रभु।
समान सूत्र
पौलुस के लिए एक मुकुट रखा हुआ था। सुनहरा मुकुट, राजा पहनते हैं वैसा।
यह मुकुट प्रभु यीशु देंगे। यीशु न्यायी हैं और भले भी हैं। यीशु सबको बचाना चाहते हैं, जो उनसे प्यार करते हैं।
यीशु ने ही पौलुस को हिम्मत दी। यीशु ने ही उन्हें कभी नहीं छोड़ा। जब सब चले गए, यीशु रहे।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे पास भी दोस्त हैं। कभी-कभी दोस्त चले जाते हैं। तब मन में दुख होता है।
पर परमेश्वर कभी नहीं जाते। वे हमेशा पास रहते हैं। सुबह भी, रात को भी।
क्या तुम आज परमेश्वर को धन्यवाद दोगे? वे तुम्हारे साथ हैं, जैसे वे पौलुस के साथ थे।
आपस में बात करें
पौलुस के पास कौन सा दोस्त रह गया था?
तुम्हें कब लगता है कि परमेश्वर तुम्हारे पास हैं?
साथ में प्रार्थना
प्यारे परमेश्वर, धन्यवाद, आप हमेशा हमारे साथ रहते हैं। जैसे आप पौलुस के साथ थे। हमें भी हिम्मत दीजिए। आमीन।
2 तीमुथियुस 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 तीमुथियुस 4 किस विषय में है?
2 तीमुथियुस 4 क्या कहता है?
2 तीमुथियुस 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 2 तीमुथियुस 4 से क्या सीख सकते हैं?
2 तीमुथियुस 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
देमास कभी पौलुस के साथ "सहकर्मी" कहलाता था, फिलेमोन की पत्री में उसका नाम इनाम की तरह लिखा है। और अब यह छोटी सी पंक्ति: "क्योंकि देमास ने इस संसार को प्रिय जानकर मुझे छोड़ दिया।" उसने मसीह से नफरत नहीं की, बस संसार उसे ज़्यादा प्यारा लगने लगा। ठंडा पड़ना अचानक नहीं होता, धीरे धीरे होता है। आज तेरा दिल किसकी ओर झुक रहा है?
पौलुस तीमुथियुस से यह नहीं कहता कि सिकंदर से बदला ले। वह बस इतना लिखता है, "तू भी उससे सावधान रह, क्योंकि उसने हमारी बातों का बहुत ही विरोध किया।" बदला प्रभु के हाथ में सौंपना और सावधान रहना, दोनों साथ चल सकते हैं। क्षमा का अर्थ यह नहीं कि तू दोबारा वही चोट खाने के लिए खड़ा रहे। माफ करने के बाद भी थोड़ी दूरी रखना पाप नहीं, बुद्धिमानी है।
पौलुस मरने को तैयार है, फिर भी लिखता है, "जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहाँ छोड़ आया हूँ, जब तू आए, तो उसे और पुस्तकें विशेष करके चर्मपत्रों को लेते आना।" एक चादर, क्योंकि जेल में ठंड लगती है। कुछ किताबें, क्योंकि मन अब भी सीखना चाहता है। इतना बड़ा प्रेरित, और ज़रूरतें इतनी साधारण। तेरी आत्मिकता तुझे इंसान होने से मना नहीं करती। ठंड लगे तो कहना सीख।
पौलुस की कलम से निकले आखिरी शब्द शिकायत नहीं, आशीष हैं: "प्रभु तेरी आत्मा के साथ रहे। तुम पर अनुग्रह होता रहे।" कैदखाने में, मौत की छाया में, अकेला छोड़ा हुआ आदमी अपने बेटे जैसे तीमुथियुस के लिए बस यही चाहता है। सोच, तेरे जीवन की आखिरी पंक्ति अगर आज लिखी जाए, तो उसमें कड़वाहट होगी या अनुग्रह?
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