7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रेरितों के काम 3

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पतरस और यूहन्ना मन्दिर जा रहे थे, प्रार्थना के समय। मन्दिर के द्वार पर, जिसे "सुन्दर" द्वार कहा जाता था, एक आदमी बैठा था जो जन्म से ही चल नहीं सकता था। हर दिन लोग उसे वहाँ ले आते थे ताकि वह भीख माँग सके। उसने पतरस और यूहन्ना से भी पैसे माँगे। पतरस ने उसकी ओर ध्यान से देखा और कहा, "हमारी ओर देख!" वह आदमी सोचने लगा कि अब उसे कुछ पैसे मिलेंगे। लेकिन पतरस ने कहा, "चाँदी और सोना तो मेरे पास नहीं है, परन्तु जो मेरे पास है, वह तुझे देता हूँ, यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर।" उसने उसका हाथ पकड़ा और उठाया, और उसी क्षण उसके पैरों में ताकत आ गई। वह उछल पड़ा, चलने लगा, कूदने लगा, और परमेश्वर की स्तुति करता हुआ मन्दिर में गया। लोग उसे पहचान गए और बहुत चकित हुए। सब लोग दौड़कर पतरस और यूहन्ना के पास आए। तब पतरस ने समझाया कि यह उसकी या यूहन्ना की अपनी ताकत से नहीं हुआ, बल्कि यीशु के नाम से हुआ, उसी यीशु के नाम से जिसे लोगों ने मार डाला था, पर परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया। पतरस ने यह भी कहा कि लोगों ने यह बिना समझे किया, और अब उन्हें मन फिराना चाहिए, यानी अपनी दिशा बदलनी चाहिए और परमेश्वर की ओर लौट आना चाहिए, ताकि उनके पाप मिटाए जाएँ।

What Does This Mean?

यह घटना सिर्फ एक चमत्कार की कहानी नहीं है। पतरस साफ कहता है कि उसके पास खुद कोई ताकत नहीं है। वह चाँदी-सोना नहीं दे सकता, पर वह कुछ और देता है, यीशु का नाम। यह दिखाता है कि असली मदद पैसों से नहीं आती, बल्कि यीशु से आती है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पतरस लोगों की तारीफ नहीं लेता। वह तुरंत सारा श्रेय परमेश्वर को और यीशु को दे देता है। और वह बहुत ईमानदार है, वह लोगों को उनकी गलती याद दिलाता है, कि उन्होंने यीशु को अस्वीकार किया, फिर भी वह उन्हें डराता नहीं, बल्कि कहता है कि यह अज्ञानता से हुआ और अब लौटने का रास्ता खुला है।

The Common Thread

पतरस अब्राहम, इसहाक और याकूब के परमेश्वर की बात करता है, और एक पुरानी वाचा, यानी परमेश्वर के वचन की याद दिलाता है, जो उन्होंने अब्राहम से बाँधी थी, कि उसके वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे घराने आशीष पाएँगे। यह वाचा सदियों पहले की गई थी, पर पतरस कहता है कि यह अब यीशु में पूरी हो रही है। मूसा ने भी पहले से कहा था कि परमेश्वर एक भविष्यद्वक्ता भेजेंगे जिसकी बात सुननी होगी। यीशु वही है। जो आदमी लँगड़ा था, वह सिर्फ एक व्यक्ति के ठीक होने की कहानी नहीं है, यह दिखाता है कि परमेश्वर अपनी पुरानी प्रतिज्ञाओं को नहीं भूलते। वे धीरे धीरे, पर निश्चित रूप से, अपना वादा पूरा करते हैं, और यीशु के द्वारा यह आशीष अब सबके लिए खुली है।

For You

शायद तुम कभी सोचते हो कि तुम्हारे पास किसी की मदद करने के लिए कुछ खास नहीं है, कोई पैसा नहीं, कोई बड़ी ताकत नहीं। पतरस के पास भी चाँदी-सोना नहीं था। पर उसके पास कुछ और था, यीशु का नाम, और वह काफी था। तुम भी किसी के लिए प्रार्थना कर सकते हो, कोई अच्छी बात बता सकते हो, या बस किसी का साथ दे सकते हो, यीशु के नाम में। और जब कभी तुमसे कोई गलती हो जाए, याद रखना कि पतरस ने कहा कि मन फिराने का रास्ता हमेशा खुला रहता है। परमेश्वर तुम्हें छोड़ते नहीं, वे तुम्हें वापस बुलाते हैं।

Talk About It

पतरस ने कहा कि उसके पास चाँदी-सोना नहीं था। तुम्हारे पास क्या है जो तुम किसी को दे सकते हो, भले ही वह पैसा न हो?

पतरस ने लोगों को उनकी गलती साफ बताई, पर डराया नहीं। क्यों लगता है कि यह सही तरीका था?

Praying Together

हे परमेश्वर, आप अब्राहम के परमेश्वर हैं, और आप आज भी अपने वादे निभाते हैं। धन्यवाद कि यीशु का नाम आज भी उतना ही सामर्थी है। जब हमारे पास कुछ देने को न हो, तो हमें याद दिलाइए कि आपका नाम काफी है। और जब हम गलती करें, हमें वापस अपनी ओर लौटने में मदद कीजिए। आमीन।

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प्रेरितों के काम 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रेरितों के काम 3 किस विषय में है?
पतरस और यूहन्ना मन्दिर जा रहे थे, प्रार्थना के समय। मन्दिर के द्वार पर, जिसे "सुन्दर" द्वार कहा जाता था, एक आदमी बैठा था जो जन्म से ही चल नहीं सकता था। हर दिन लोग उसे वहाँ ले आते थे ताकि वह भीख माँग सके। उसने पतरस और यूहन्ना से भी पैसे माँगे। पतरस ने उसकी ओर ध्यान से देखा और कहा, "हमारी ओर देख!
प्रेरितों के काम 3 क्या कहता है?
यह घटना सिर्फ एक चमत्कार की कहानी नहीं है। पतरस साफ कहता है कि उसके पास खुद कोई ताकत नहीं है। वह चाँदी-सोना नहीं दे सकता, पर वह कुछ और देता है, यीशु का नाम। यह दिखाता है कि असली मदद पैसों से नहीं आती, बल्कि यीशु से आती है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पतरस लोगों की तारीफ नहीं लेता। वह तुरंत सारा श्रेय परमेश्वर को और यीशु को दे देता है। और वह बहुत ईमानदार है, वह लोगों को उनकी गलती याद दिलाता है, कि उन्होंने यीशु को अस्वीकार किया, फिर भी वह उन्हें डराता नहीं, बल्कि कहता है कि यह अज्ञानता से हुआ और अब लौटने का रास्ता खुला है।
प्रेरितों के काम 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पतरस अब्राहम, इसहाक और याकूब के परमेश्वर की बात करता है, और एक पुरानी वाचा, यानी परमेश्वर के वचन की याद दिलाता है, जो उन्होंने अब्राहम से बाँधी थी, कि उसके वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे घराने आशीष पाएँगे। यह वाचा सदियों पहले की गई थी, पर पतरस कहता है कि यह अब यीशु में पूरी हो रही है। मूसा ने भी पहले से कहा था कि परमेश्वर एक भविष्यद्वक्ता भेजेंगे जिसकी बात सुननी होगी। यीशु वही है। जो आदमी लँगड़ा था, वह सिर्फ एक व्यक्ति के ठीक होने की कहानी नहीं है, यह दिखाता है कि परमेश्वर अपनी पुरानी प्रतिज्ञाओं को नहीं भूलते। वे धीरे धीरे, पर निश्चित रूप से, अपना वादा पूरा करते हैं, और यीशु के द्वारा यह आशीष अब सबके लिए खुली है।
बच्चे प्रेरितों के काम 3 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुम कभी सोचते हो कि तुम्हारे पास किसी की मदद करने के लिए कुछ खास नहीं है, कोई पैसा नहीं, कोई बड़ी ताकत नहीं। पतरस के पास भी चाँदी-सोना नहीं था। पर उसके पास कुछ और था, यीशु का नाम, और वह काफी था। तुम भी किसी के लिए प्रार्थना कर सकते हो, कोई अच्छी बात बता सकते हो, या बस किसी का साथ दे सकते हो, यीशु के नाम में। और जब कभी तुमसे कोई गलती हो जाए, याद रखना कि पतरस ने कहा कि मन फिराने का रास्ता हमेशा खुला रहता है। परमेश्वर तुम्हें छोड़ते नहीं, वे तुम्हें वापस बुलाते हैं।
प्रेरितों के काम 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पतरस ने कहा कि उसके पास चाँदी-सोना नहीं था। तुम्हारे पास क्या है जो तुम किसी को दे सकते हो, भले ही वह पैसा न हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 23

पतरस मंदिर के उसी आँगन में खड़ा है, जहाँ अभी अभी एक लंगड़ा आदमी चलने लगा था। और वहीं वह मूसा की बात दोहराता है, "और ऐसा होगा कि जो प्राणी उस भविष्यद्वक्ता की न सुने, वह लोगों में से नाश किया जाएगा।" गौर कर, यहाँ पापों की कोई लंबी सूची नहीं है, बस एक बात है: सुनना। यीशु की आवाज़ आज भी तुझ तक पहुँचती है। सवाल यह है कि तू उसे कब तक टालता रहेगा।

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