7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रेरितों के काम 4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पतरस और यूहन्ना मन्दिर में लोगों से यीशु के बारे में बातें कर रहे थे। तभी याजक और मन्दिर के पहरेदार दौड़ते हुए आए। वे बहुत गुस्से में थे। क्यों? क्योंकि पतरस और यूहन्ना कह रहे थे कि यीशु मरे हुओं में से जी उठे हैं। पहरेदारों ने दोनों को पकड़ लिया और रातभर के लिए हवालात में बंद कर दिया। सोचो जरा, अंधेरी कोठरी, ठंडा फर्श, और बाहर पहरेदार खड़े। फिर भी पाँच हजार लोगों ने उनकी बात मानकर विश्वास किया।

अगले दिन पतरस और यूहन्ना को बड़ी सभा के सामने खड़ा किया गया। वहाँ महायाजक और बड़े-बड़े सरदार बैठे थे। उन्होंने पूछा, “तुम ने यह काम किस सामर्थ्य से किया?” पतरस डरा नहीं। पवित्र आत्मा ने उसे भर दिया, और उसने साफ-साफ कहा, “यीशु मसीह के नाम से यह मनुष्य अच्छा हुआ है, वही जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया और परमेश्वर ने जिलाया।” फिर उसने एक बड़ी बात कही, “किसी दूसरे नाम से उद्धार नहीं है, केवल यीशु के नाम से।”

सरदारों ने देखा कि पतरस और यूहन्ना तो पढ़े-लिखे भी नहीं हैं, फिर भी इतने साहस से बोल रहे हैं। वे चकित रह गए। और वह चंगा हुआ आदमी भी वहीं खड़ा था, इसलिए वे कुछ कह नहीं सके। सरदारों ने आपस में सलाह की और फिर धमकी देकर कहा, “यीशु के नाम से फिर कभी मत बोलना।” पतरस और यूहन्ना ने बड़े साहस से उत्तर दिया, “जो हमने देखा और सुना है, उसे न कहें, यह हम से हो नहीं सकता।”

इसका क्या अर्थ है?

पतरस और यूहन्ना डर सकते थे। कोठरी, धमकी, बड़े-बड़े सरदार, यह सब सचमुच डरावना था। पर उन्होंने चुप रहना नहीं चुना। उन्होंने सच बोलना चुना। क्या तुमने कभी किसी बात के लिए डर लगा हो, और फिर भी सच बोला हो? पतरस और यूहन्ना ने दिखाया कि जब परमेश्वर हमारे साथ होते हैं, तो साहस डर से बड़ा हो जाता है। वे जानते थे कि जो उन्होंने देखा और सुना है, वह छिपाया नहीं जा सकता।

समान सूत्र

यह पूरी कहानी यीशु मसीह की ओर इशारा करती है। पतरस ने कहा कि यीशु ही वह पत्थर हैं जिसे राजमिस्त्रियों ने तुच्छ जाना, पर परमेश्वर ने उन्हें कोने के सिरे का पत्थर बना दिया। जैसे किसी घर की सबसे मजबूत ईंट, उसी पर सब कुछ टिका होता है। यीशु ही वह ईंट हैं जिस पर परमेश्वर का पूरा घर टिका है। और उद्धार का कोई और रास्ता नहीं, केवल यीशु के नाम से। जब चेलों ने मिलकर प्रार्थना की, तो परमेश्वर ने उनकी जगह को हिला दिया, और वे फिर से साहस से भर गए। परमेश्वर ने अपना वचन पूरा किया, ठीक वैसे जैसे दाऊद ने भजन में पहले ही कहा था।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हारे स्कूल में या घर में कभी सच बोलना मुश्किल लगता है? शायद कोई मजाक उड़ाए अगर तुम यीशु के बारे में बताओ। पतरस और यूहन्ना की तरह, तुम भी परमेश्वर से साहस माँग सकते हो। और जैसे मसीही एक-दूसरे की मदद करते थे, अपना खाना और सामान बाँटते थे, वैसे ही तुम भी अपने भाई-बहन या दोस्त के साथ कुछ बाँट सकते हो, जैसे बरनबास ने अपनी जमीन बेचकर सबकी मदद की।

बात करें

अगर तुम पतरस की जगह होते और सरदार तुम्हें धमकाते, तो तुम्हें कैसा लगता?

तुम किससे यीशु के बारे में बताने का साहस माँग सकते हो?

संग प्रार्थना

हे प्रभु, जैसे आपने पतरस और यूहन्ना को साहस दिया, वैसे ही हमें भी दीजिए। जब हमें डर लगे, तो हमें याद दिलाइए कि आप हमारे साथ हैं। हमें यीशु के बारे में बताने का हौसला दीजिए, और हमें बाँटना और प्रेम करना सिखाइए। आमीन।

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प्रेरितों के काम 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रेरितों के काम 4 किस विषय में है?
पतरस और यूहन्ना मन्दिर में लोगों से यीशु के बारे में बातें कर रहे थे। तभी याजक और मन्दिर के पहरेदार दौड़ते हुए आए। वे बहुत गुस्से में थे। क्यों? क्योंकि पतरस और यूहन्ना कह रहे थे कि यीशु मरे हुओं में से जी उठे हैं। पहरेदारों ने दोनों को पकड़ लिया और रातभर के लिए हवालात में बंद कर दिया। सोचो जरा, अंधेरी कोठरी, ठंडा फर्श, और बाहर पहरेदार खड़े। फिर भी पाँच हजार लोगों ने उनकी बात मानकर विश्वास किया।
प्रेरितों के काम 4 क्या कहता है?
अगले दिन पतरस और यूहन्ना को बड़ी सभा के सामने खड़ा किया गया। वहाँ महायाजक और बड़े-बड़े सरदार बैठे थे। उन्होंने पूछा, “तुम ने यह काम किस सामर्थ्य से किया?” पतरस डरा नहीं। पवित्र आत्मा ने उसे भर दिया, और उसने साफ-साफ कहा, “यीशु मसीह के नाम से यह मनुष्य अच्छा हुआ है, वही जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया और परमेश्वर ने जिलाया।” फिर उसने एक बड़ी बात कही, “किसी दूसरे नाम से उद्धार नहीं है, केवल यीशु के नाम से।”
प्रेरितों के काम 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सरदारों ने देखा कि पतरस और यूहन्ना तो पढ़े-लिखे भी नहीं हैं, फिर भी इतने साहस से बोल रहे हैं। वे चकित रह गए। और वह चंगा हुआ आदमी भी वहीं खड़ा था, इसलिए वे कुछ कह नहीं सके। सरदारों ने आपस में सलाह की और फिर धमकी देकर कहा, “यीशु के नाम से फिर कभी मत बोलना।” पतरस और यूहन्ना ने बड़े साहस से उत्तर दिया, “जो हमने देखा और सुना है, उसे न कहें, यह हम से हो नहीं सकता।”
बच्चे प्रेरितों के काम 4 से क्या सीख सकते हैं?
पतरस और यूहन्ना डर सकते थे। कोठरी, धमकी, बड़े-बड़े सरदार, यह सब सचमुच डरावना था। पर उन्होंने चुप रहना नहीं चुना। उन्होंने सच बोलना चुना। क्या तुमने कभी किसी बात के लिए डर लगा हो, और फिर भी सच बोला हो? पतरस और यूहन्ना ने दिखाया कि जब परमेश्वर हमारे साथ होते हैं, तो साहस डर से बड़ा हो जाता है। वे जानते थे कि जो उन्होंने देखा और सुना है, वह छिपाया नहीं जा सकता।
प्रेरितों के काम 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यह पूरी कहानी यीशु मसीह की ओर इशारा करती है। पतरस ने कहा कि यीशु ही वह पत्थर हैं जिसे राजमिस्त्रियों ने तुच्छ जाना, पर परमेश्वर ने उन्हें कोने के सिरे का पत्थर बना दिया। जैसे किसी घर की सबसे मजबूत ईंट, उसी पर सब कुछ टिका होता है। यीशु ही वह ईंट हैं जिस पर परमेश्वर का पूरा घर टिका है। और उद्धार का कोई और रास्ता नहीं, केवल यीशु के नाम से। जब चेलों ने मिलकर प्रार्थना की, तो परमेश्वर ने उनकी जगह को हिला दिया, और वे फिर से साहस से भर गए। परमेश्वर ने अपना वचन पूरा किया, ठीक वैसे जैसे दाऊद ने भजन में पहले ही कहा था।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

और उन्होंने उन्हें पकड़कर दूसरे दिन तक हिरासत में रखा, क्योंकि संध्या हो गई थी।" पतरस और यूहन्ना का वह पहला दिन जेल में बीता। पर उसी शाम, जब वे सलाखों के पीछे थे, पाँच हज़ार लोगों ने वचन मान लिया। तुम्हें रोका जा सकता है, तुम्हारे वचन को नहीं। आज अगर कोई दरवाज़ा तुम पर बंद हुआ है, याद रखो, परमेश्वर का काम उस रात भी नहीं रुका।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

पतरस के शब्दों में एक गहरी विडंबना छिपी है: "यदि आज हम से इस दुर्बल मनुष्य के साथ किए गए उपकार के विषय में पूछा जाता है कि वह किस रीति से अच्छा हुआ।" एक भले काम के लिए कठघरे में खड़ा होना। कभी सोचा है, तेरी भलाई भी शायद सवालों के घेरे में आए? पतरस ने बचाव नहीं, बल्कि यीशु का नाम बोला।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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