आमोस 8
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
आमोस एक चरवाहा था जिसे परमेश्वर ने नबी बनाकर भेजा था। इस अध्याय में परमेश्वर उसे एक दर्शन दिखाते हैं: धूपकाल के फलों से भरी एक टोकरी। ये वो फल हैं जो साल के आखिरी समय में पकते हैं, जब फसल का मौसम खत्म होने वाला होता है। परमेश्वर आमोस से पूछते हैं कि वह क्या देखता है, और जब आमोस जवाब देता है, तो परमेश्वर कहते हैं कि इस्राएल का भी अंत आ गया है। जैसे पकी हुई फसल काटने का समय आता है, वैसे ही इस्राएल के लिए न्याय का समय आ गया है।
इसके बाद परमेश्वर बताते हैं कि यह न्याय क्यों आ रहा है। इस्राएल के व्यापारी गरीबों के साथ बेईमानी करते थे। वे चाहते थे कि पर्व और विश्रामदिन जल्दी खत्म हो जाएँ, ताकि वे फिर से अन्न बेचना शुरू कर सकें, और बेचते समय नाप में धोखा देते थे, तराजू को गलत तोलते थे, और कंगालों को इतना कुचल देते थे कि वे अपने आप को एक जोड़ी जूतियों के बदले बेचने पर मजबूर हो जाते थे। परमेश्वर कहते हैं कि वे इनमें से किसी भी काम को नहीं भूलेंगे।
फिर परमेश्वर उस दिन की तस्वीर देते हैं जब यह न्याय आएगा। गीत विलाप में बदल जाएँगे, धरती काँपेगी, और दोपहर के समय सूरज अस्त हो जाएगा, जैसे अचानक अंधेरी रात आ गई हो। सबसे अलग बात यह है कि उस दिन लोग परमेश्वर का वचन सुनने के लिए तरसेंगे, पर उन्हें वह नहीं मिलेगा। जो पहले परमेश्वर की बात सुनना नहीं चाहते थे, वे अब उसे खोजते हुए दौड़ेंगे, पर बहुत देर हो चुकी होगी।
What Does This Mean?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर चुपचाप देख रहे होते हैं, तब भी जब हमें लगता है कि किसी को पता नहीं चल रहा। इस्राएल के लोग मंदिर जाते थे, पर्व मनाते थे, पर बाजार में गरीबों को ठगते थे। परमेश्वर कहते हैं कि यह दिखावा उनकी आँखों से छिप नहीं सकता। न्याय सिर्फ बड़े पापों के लिए नहीं है, तराजू में की गई छोटी बेईमानी भी परमेश्वर के सामने भारी है।
और फिर एक गहरी बात है, परमेश्वर का वचन न सुनना भी भूख जैसा है। जब लोग लंबे समय तक परमेश्वर की बात को नज़रअंदाज़ करते रहें, तो एक दिन ऐसा आ सकता है जब वे उसे पाना चाहें, पर वह दूर हो चुका हो। यह सोचने वाली बात है, क्या परमेश्वर का वचन सुनने को हम रोज़ की सामान्य बात मानते हैं, या सच में उसकी कीमत समझते हैं?
The Common Thread
आमोस कहता है कि एक दिन दोपहर में सूरज अस्त हो जाएगा। यही शब्द बाइबल में फिर आते हैं, जब यीशु मसीह क्रूस पर मरे, तो दोपहर के समय पूरी धरती पर अंधकार छा गया था। आमोस की भविष्यवाणी उस दिन की ओर इशारा करती लगती है, जब परमेश्वर का न्याय और प्रेम एक साथ क्रूस पर दिखाई दिए। वहाँ भी अंधकार था, पर वहाँ न्याय ने प्रेम का रास्ता नहीं रोका, बल्कि यीशु ने हमारी जगह वह सज़ा ली।
और जहाँ आमोस में लोग परमेश्वर का वचन खोजते हैं पर नहीं पाते, वहीं यीशु खुद कहलाते हैं परमेश्वर का वचन, जो हमारे बीच आया। आज हमें वह वचन पाने का मौका मिला हुआ है, यह कोई मामूली बात नहीं है।
For You
कभी सोचना, तुम अपने दोस्तों के साथ, पैसों के मामलों में, या खेल के नियमों में कहीं छोटी बेईमानी तो नहीं करते? नाप में, हिसाब में, या बातों में थोड़ा घुमा देना भी परमेश्वर की नज़र से छिपा नहीं रहता। और जब तुम्हें बाइबल पढ़ने का, परमेश्वर की बात सुनने का मौका मिलता है, तो उसे हल्के में मत लेना। यह मौका हमेशा नहीं रहता, आज ही उसे अनमोल समझो।
Talk About It
जब तुम्हें लगता है कि किसी को तुम्हारी बेईमानी के बारे में पता नहीं चलेगा, तो तुम्हारे मन में क्या चलता है?
परमेश्वर का वचन सुनने का मौका तुम्हारे लिए कितना अनमोल है, और तुम उसे और कीमती कैसे बना सकते हो?
Praying Together
प्रभु, आप सब कुछ देखते हैं, हमारी छोटी-छोटी बेईमानियाँ भी। हमें सच्चाई से जीना सिखाइए। और हमें अपने वचन की भूख दीजिए, ताकि हम उसे कभी हल्के में न लें। यीशु के नाम में, आमीन।
आमोस 8 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
आमोस 8 किस विषय में है?
आमोस 8 क्या कहता है?
आमोस 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे आमोस 8 से क्या सीख सकते हैं?
आमोस 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
उस समय सुन्दर कुमारियाँ और जवान पुरुष दोनों प्यास के मारे मूर्छित हो जाएँगे।" यह भूख रोटी की नहीं थी, परमेश्वर के वचन सुनने की थी। और सबसे पहले गिरते हैं वे, जिनमें सबसे ज़्यादा ताकत थी। जवानी भी भीतर की प्यास नहीं बुझा सकती। तू जिस दिन परमेश्वर की आवाज़ को हल्के में लेता है, उसी दिन से भीतर कुछ सूखने लगता है।
तराजू का वह छोटा सा झुकाव, बाट में वह ज़रा सी कमी, शाम तक व्यापारी भूल भी जाता है। गरीब चुप रह जाता है, किसी अदालत तक बात नहीं पहुँचती। पर यहोवा ने शपथ खाकर कहा, "मैं उनके किसी काम को कभी न भूलूँगा।" जिसे तुम भूल चुके हो, वह उसे याद रखता है। सोचो, आज किसी की मज़दूरी तुम्हारे हाथ में रुकी है?
उस दिन मन्दिर के गीत हाहाकार में बदल जाएँगे," यह कहने वाला वही परमेश्वर है जिसकी स्तुति वे गा रहे थे। गीत वही थे, आवाज़ वही थी, पर उन्हीं होंठों वाले लोग बाहर जाकर कंगालों को कुचलते थे। सोचो, तुम्हारी आराधना का सुर सोमवार को तुम्हारे व्यवहार से मेल खाता है, या परमेश्वर उसे रोना सुन रहा है?
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