कुलुस्सियों 4
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पौलुस यह पत्र जेल से लिख रहा है। कल्पना करो: उसके हाथों में ज़ंजीरें हैं, वह बंद है, फिर भी वह अपने दोस्तों के बारे में सोच रहा है जो कुलुस्से शहर में रहते हैं। पत्र का यह आखिरी हिस्सा एक छोटी सी सूची जैसा लगता है, पर हर वाक्य में कुछ ज़रूरी है।
पहले पौलुस मालिकों से कहता है कि वे अपने दासों के साथ न्याय करें। उस ज़माने में दास इंसान होते हुए भी अक्सर चीज़ों जैसे माने जाते थे। पौलुस कहता है, याद रखो, तुम्हारा भी एक स्वामी है, स्वर्ग में। इसका मतलब, तुम कोई भी बड़े हो, परमेश्वर तुमसे भी बड़े हैं।
फिर वह प्रार्थना के बारे में बात करता है। "प्रार्थना में लगे रहो," वह लिखता है। मानो कह रहा हो: प्रार्थना छोड़ मत देना, चालू रखो, धन्यवाद के साथ। और वह चाहता है कि लोग उसके लिए भी प्रार्थना करें, ताकि वह मसीह के बारे में साफ़-साफ़ बता सके, चाहे वह जेल में ही क्यों न हो।
फिर पौलुस कहता है कि बाहर के लोगों, यानी जो अभी यीशु को नहीं जानते, उनके साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो। तुम्हारी बातें अनुग्रह से भरी और "सुहावनी" हों, यानी सुनने में अच्छी लगें, नमक की तरह स्वादिष्ट।
इसके बाद पौलुस कई नाम लिखता है। तुखिकुस पत्र लेकर आ रहा है। उसके साथ है उनेसिमुस, एक भाई। अरिस्तर्खुस पौलुस के साथ जेल में है। मरकुस, लूका, इपफ्रास, देमास, यीशु जो यूस्तुस कहलाता है, ये सब पौलुस के साथी हैं। इपफ्रास के बारे में पौलुस खास बात कहता है, वह तुम्हारे लिए प्रार्थना में जूझता रहता है।
आखिर में पौलुस अपने हाथ से लिखता है: "मेरी जंजीरों को स्मरण रखना।" उसे भूलो मत। यह उसकी आखिरी विनती है।
इसका क्या मतलब है?
पहली नज़र में यह अध्याय अलविदा कहने वाला लगता है, बस नाम और नमस्कार। पर ध्यान से देखो: यहाँ पूरा एक परिवार दिखता है। पौलुस अकेला नहीं है, भले ज़ंजीरों में बंधा हो। उसके चारों ओर लोग हैं जो उसके साथ काम करते हैं, प्रार्थना करते हैं, संदेश ले जाते हैं।
पौलुस सिखाता है कि विश्वास एक अकेले का सफ़र नहीं है। हम मिलकर परमेश्वर के हैं। और विश्वास सिर्फ़ भावना नहीं है, वह रोज़ की बातों में दिखता है, जैसे कि तुम अपने कर्मचारियों से कैसे बात करते हो, या पड़ोसी से क्या शब्द बोलते हो।
बड़ी कहानी से जोड़
पौलुस बार-बार "मसीह के भेद" की बात करता है। भेद यानी वह रहस्य जो पहले छिपा था और अब खुल गया है। और वह रहस्य क्या है? यह कि यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर हर तरह के लोगों को अपने पास बुला रहे हैं, यहूदी हों या नहीं, दास हों या मालिक।
देखो, पौलुस ज़ंजीरों में है, फिर भी परमेश्वर का वचन बंधा नहीं है। वह लोगों के ज़रिये फैलता जा रहा है। एक तुखिकुस चलता है, एक उनेसिमुस साथ जाता है, एक इपफ्रास प्रार्थना करता है। यीशु की कहानी ऐसे ही आगे बढ़ी है, आज तक, और तुम तक भी यूँ ही पहुँची है।
तुम्हारे लिए
तुम्हारी उम्र में एक सवाल अक्सर आता है: क्या मैं भी परमेश्वर के काम में कुछ कर सकता हूँ? इस अध्याय का जवाब है, हाँ।
देखो, पौलुस बड़े प्रेरित थे, पर अकेले कुछ नहीं कर सके। उनके साथ लूका था, जो एक वैद्य था। उनेसिमुस था, जो पहले शायद भागा हुआ दास था। मरकुस था, जिसने एक बार पौलुस को बीच में छोड़ दिया था, फिर भी अब उसका नाम इज़्ज़त से लिखा गया है। हर एक की एक कहानी थी। हर एक की एक जगह थी।
तुम्हारी भी जगह है। शायद अभी तुम्हारे पास बड़े काम नहीं हैं, पर पौलुस की तीन बातें अभी से शुरू हो सकती हैं। एक: प्रार्थना में लगे रहो, चाहे बात छोटी हो या बड़ी। दो: अपनी बातों पर ध्यान दो। जो शब्द तुम स्कूल में या घर में बोलते हो, वे "अनुग्रह से भरे" हों, यानी दूसरों को चोट न पहुँचाएँ, बल्कि उन्हें अच्छा लगे। तीन: जो लोग तुम्हारे आस-पास कठिनाई में हैं, जैसे पौलुस जेल में था, उन्हें भूलो मत।
चर्चा करो
यीशु के बारे में किसी को बताना कभी-कभी मुश्किल क्यों लगता है? पौलुस ने क्या माँगा जिससे उसे मदद मिले?
पौलुस ने अपने कई साथियों के नाम लिखे। तुम्हारी ज़िंदगी में वे कौन लोग हैं जो तुम्हें विश्वास में मज़बूत करते हैं? और तुम किसे मज़बूत कर सकते हो?
साथ में प्रार्थना
प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें अकेला नहीं छोड़ते। हमें भी प्रार्थना में लगे रहना सिखाइए। हमारी बातें ऐसी हों जो दूसरों का भला करें। और उन लोगों को याद रखने में हमारी मदद कीजिए जो आज कठिनाई में हैं। यीशु के नाम से, आमीन।
कुलुस्सियों 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
कुलुस्सियों 4 किस विषय में है?
कुलुस्सियों 4 क्या कहता है?
कुलुस्सियों 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे कुलुस्सियों 4 से क्या सीख सकते हैं?
कुलुस्सियों 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो, और समय को बहुमूल्य समझो।" पौलुस यह बात जेल से लिख रहा है, जहाँ उसका अपना समय छिन चुका था। फिर भी वह कहता है, हर मुलाकात कीमती है। जो पड़ोसी अभी मसीह को नहीं जानता, वह तुम्हारे लहजे से, तुम्हारे धीरज से मसीह को पढ़ता है। आज किसके सामने तुम खुली किताब हो?
मरकुस जो बरनबास का चचेरा भाई है... यदि वह तुम्हारे पास आए, तो उसका स्वागत करना।" यही वह मरकुस है जिसे कभी पौलुस साथ ले जाने को तैयार न था। सालों बाद वही नाम, अब सिफ़ारिश के साथ। एक असफलता ने उसकी कहानी का अंत तय नहीं किया। तुम्हारे मन में जिसका नाम अब भी पुरानी चोट के साथ जुड़ा है, क्या मसीह उसे नया लिख रहा है?
पत्र के अंत में पौलुस कलम अपने हाथ में लेता है: "मुझ पौलुस का अपने हाथ से लिखा हुआ नमस्कार। मेरी जंजीरों की सुधि रखना। तुम पर अनुग्रह होता रहे।" वह छुटकारे की माँग नहीं करता, बस इतना कि कोई उसे भूल न जाए। जंजीरों में बँधा आदमी दूसरों को अनुग्रह की आशीष देता है। आज किसकी जंजीरों की सुधि तुम्हें रखनी है?
प्रिय वैद्य लूका और देमास का तुम्हें नमस्कार।" एक ही पंक्ति में दो नाम, पर अंत अलग। लूका आखिर तक पौलुस के साथ रहा, और देमास के बारे में बाद में लिखा गया कि उसने इस संसार को प्रिय जानकर उसे छोड़ दिया। आज तुम्हारा नाम भी किसी सूची में है, विश्वासयोग्य लोगों के बीच। सवाल यह है कि दस साल बाद तुम्हारे नाम के आगे क्या लिखा जाएगा।
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