7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

निर्गमन 2

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

मूसा के जन्म से पहले मिस्र में एक भयानक आदेश था, फ़िरौन इब्री लड़कों को मार डालना चाहता था। लेवी वंश के एक घर में एक पुत्र जन्मा। उसकी माता ने देखा कि वह बालक सुंदर है, और उसने उसे तीन महीने तक छिपा रखा। जब वह छिपा न सकी, तो उसने सरकंडों की एक टोकरी बनाई, उस पर मिट्टी और राल लगाई, और बालक को नील नदी के किनारे कांसों के बीच रख दिया। उसकी बहन दूर खड़ी रही, यह देखने के लिए कि आगे क्या होगा।

फ़िरौन की बेटी नहाने आई, उसने टोकरी देखी और बालक को उठवाया। बालक रो रहा था, और उसे तरस आया। बहन ने हिम्मत करके पूछा कि क्या वह एक इब्री धाई को बुला लाए, जो बालक को दूध पिलाए। इस तरह परमेश्वर ने ऐसा जोड़ दिया कि मूसा की अपनी माता ही उसे दूध पिलाने लगी, और बाद में वह फ़िरौन की बेटी का पुत्र कहलाया। उसका नाम मूसा रखा गया, क्योंकि उसे जल से निकाला गया था।

जब मूसा जवान हुआ, तो उसने अपने इब्री भाइयों के दुःख देखे। एक दिन उसने एक मिस्री को एक इब्री को मारते देखा, और गुस्से में आकर उस मिस्री को मार डाला और रेत में छिपा दिया। अगले दिन जब उसने दो इब्रियों को झगड़ते देखा और बीच में बोलने की कोशिश की, तो उसे जवाब मिला, "किसने तुझे हम पर हाकिम बनाया?" मूसा डर गया, क्योंकि उसकी बात खुल गई थी। फ़िरौन ने उसे मार डालने की योजना बनाई, और मूसा भागकर मिद्यान देश चला गया।

वहाँ एक कुएँ के पास उसने याजक रूएल की बेटियों की मदद की, जिन्हें चरवाहे तंग कर रहे थे। इसका परिणाम यह हुआ कि मूसा ने सिप्पोरा से विवाह किया और उसका एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उसने गेर्शोम रखा, इस नाम का अर्थ है, "मैं अन्य देश में परदेशी हूँ।" कई वर्ष बीत गए, मिस्र का राजा मर गया, परंतु इस्राएलियों की कठिन सेवा नहीं बदली। वे कराहते रहे, और उनकी दुहाई परमेश्वर तक पहुँची। परमेश्वर ने उनका कराहना सुना और अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ की गई अपनी वाचा को स्मरण किया।

इसका अर्थ क्या है?

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर चुपचाप काम करते हैं, भले ही वे नाम से कहीं दिखाई न दें। एक माता का साहस, एक बहन की सतर्कता, फ़िरौन की बेटी का तरस, ये सब मिलकर मूसा को बचाते हैं, जबकि परमेश्वर का नाम एक बार भी इन आयतों में नहीं आता। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर परदे के पीछे से भी काम करते रहते हैं।

मूसा की कहानी यह भी दिखाती है कि परमेश्वर के चुने हुए लोग भी गलती करते हैं। मूसा ने गुस्से में एक व्यक्ति को मार डाला। यह गलत था, और उसे इसके परिणाम भुगतने पड़े, चालीस साल का पलायन, एक नया देश, एक नया जीवन। परमेश्वर उसे फिर भी नहीं छोड़ते। यह अध्याय आसान जवाब नहीं देता कि मूसा का यह काम क्यों माफ हो गया, पाठ स्वयं इसे खुला छोड़ देता है। परंतु यह दिखता है कि परमेश्वर टूटे हुए, डरे हुए, भागे हुए लोगों को भी इस्तेमाल करते हैं।

बड़ी कहानी से जोड़

आखिरी दो आयतें सबसे महत्वपूर्ण हैं। परमेश्वर ने इस्राएलियों का कराहना सुना और अपनी वाचा को स्मरण किया, वह वाचा जो एक वचन है, एक ठहराया गया संबंध, जो उन्होंने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बहुत पहले बांधा था। परमेश्वर भूले नहीं थे। उन्होंने प्रतीक्षा की, और अब वे कार्य करने वाले हैं। मूसा, जिसे जल से बचाया गया, वही होगा जिसके द्वारा परमेश्वर अपने लोगों को छुड़ाएँगे। बाद में यीशु मसीह भी छोटी उम्र में खतरे से बचाए गए, और वे भी अपने लोगों को छुड़ाने आए, पाप और मृत्यु की गुलामी से।

आपके लिए

तुम शायद कभी सोचते हो कि परमेश्वर तुम्हारी परिस्थिति में कहीं नहीं दिख रहे। यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर तब भी काम कर रहे होते हैं, जब उनका नाम कहीं नज़र नहीं आता। जब तुम डरे हुए हो, या गलती कर बैठे हो जैसे मूसा, तो जान लो कि परमेश्वर तुम्हें छोड़ते नहीं। तुम्हारी दुहाई, तुम्हारी प्रार्थना, परमेश्वर तक पहुँचती है, ठीक जैसे इस्राएलियों की पहुँची।

बात करें

अगर परमेश्वर का नाम इस अध्याय में एक बार भी नहीं आता, तो हम कैसे कह सकते हैं कि वे इस पूरी कहानी में काम कर रहे थे?

मूसा ने गलती की, फिर भी परमेश्वर ने उसे इस्तेमाल किया। इससे तुम्हें अपनी गलतियों के बारे में क्या सीखने को मिलता है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, धन्यवाद कि आप तब भी काम करते हैं जब हमें आप दिखाई नहीं देते। जैसे आपने इस्राएलियों का कराहना सुना, वैसे ही हमारी प्रार्थनाएँ भी सुनिए। हमें साहस दें जैसे मूसा की माता और बहन को दिया, और हमें याद दिलाएँ कि आप अपनी वाचा नहीं भूलते। आमीन।

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निर्गमन 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

निर्गमन 2 किस विषय में है?
मूसा के जन्म से पहले मिस्र में एक भयानक आदेश था, फ़िरौन इब्री लड़कों को मार डालना चाहता था। लेवी वंश के एक घर में एक पुत्र जन्मा। उसकी माता ने देखा कि वह बालक सुंदर है, और उसने उसे तीन महीने तक छिपा रखा। जब वह छिपा न सकी, तो उसने सरकंडों की एक टोकरी बनाई, उस पर मिट्टी और राल लगाई, और बालक को नील नदी के किनारे कांसों के बीच रख दिया। उसकी बहन दूर खड़ी रही, यह देखने के लिए कि आगे क्या होगा।
निर्गमन 2 क्या कहता है?
जब मूसा जवान हुआ, तो उसने अपने इब्री भाइयों के दुःख देखे। एक दिन उसने एक मिस्री को एक इब्री को मारते देखा, और गुस्से में आकर उस मिस्री को मार डाला और रेत में छिपा दिया। अगले दिन जब उसने दो इब्रियों को झगड़ते देखा और बीच में बोलने की कोशिश की, तो उसे जवाब मिला, "किसने तुझे हम पर हाकिम बनाया?
निर्गमन 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर चुपचाप काम करते हैं, भले ही वे नाम से कहीं दिखाई न दें। एक माता का साहस, एक बहन की सतर्कता, फ़िरौन की बेटी का तरस, ये सब मिलकर मूसा को बचाते हैं, जबकि परमेश्वर का नाम एक बार भी इन आयतों में नहीं आता। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर परदे के पीछे से भी काम करते रहते हैं।
बच्चे निर्गमन 2 से क्या सीख सकते हैं?
आखिरी दो आयतें सबसे महत्वपूर्ण हैं। परमेश्वर ने इस्राएलियों का कराहना सुना और अपनी वाचा को स्मरण किया, वह वाचा जो एक वचन है, एक ठहराया गया संबंध, जो उन्होंने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बहुत पहले बांधा था। परमेश्वर भूले नहीं थे। उन्होंने प्रतीक्षा की, और अब वे कार्य करने वाले हैं। मूसा, जिसे जल से बचाया गया, वही होगा जिसके द्वारा परमेश्वर अपने लोगों को छुड़ाएँगे। बाद में यीशु मसीह भी छोटी उम्र में खतरे से बचाए गए, और वे भी अपने लोगों को छुड़ाने आए, पाप और मृत्यु की गुलामी से।
निर्गमन 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर परमेश्वर का नाम इस अध्याय में एक बार भी नहीं आता, तो हम कैसे कह सकते हैं कि वे इस पूरी कहानी में काम कर रहे थे?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

किसने तुझे हम पर हाकिम और न्यायी ठहराया?" यह सवाल मूसा को चुभ गया, क्योंकि सच यही था। अभी परमेश्वर ने उसे भेजा नहीं था। उसने इधर उधर देखकर, छिपकर, अपने हाथ से छुड़ाना चाहा। चालीस साल बाद वही मूसा जलती झाड़ी के सामने बुलाया गया। तेरे भीतर का जोश गलत नहीं है। पर पूछ ले, यह काम तू कर रहा है या परमेश्वर तुझसे करवा रहा है?

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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