7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 51

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

यशायाह 51 की व्याख्या

The Explanation

सोचो, एक शहर पूरी तरह टूट गया है। घर गिरे हुए हैं, सड़कें सुनसान हैं, लोग रो रहे हैं। यह यरूशलेम शहर था। परमेश्वर के लोग बंदी बना लिए गए थे, दूर देश में। वे थके हुए थे, डरे हुए थे, सोचते थे कि क्या अब कभी घर लौट पाएँगे।

तब परमेश्वर बोलते हैं। वे कहते हैं, "कान लगाकर मेरी सुनो!" वे अपने लोगों को याद दिलाते हैं, "अब्राहम को देखो। वह अकेला था, बिलकुल अकेला। फिर भी मैंने उसे बुलाया, आशीष दी, और उसे बढ़ाया।" जैसे कोई पत्थर तराशकर चट्टान से निकालता है, वैसे ही परमेश्वर ने अपने लोगों को निकाला था।

फिर परमेश्वर एक वादा करते हैं जो सुनने में लगभग असंभव लगता है। सिय्योन का उजाड़ जंगल, अदन की वाटिका जैसा बन जाएगा। वहाँ फिर से हँसी सुनाई देगी, गीत गाए जाएँगे।

लोग डरे हुए थे, दूसरे राष्ट्रों के लोग उनका मजाक उड़ाते थे। परमेश्वर कहते हैं, "मनुष्यों की नामधराई से मत डरो। वे तो घास के समान मुरझा जाएँगे, पर मेरी धार्मिकता सदा बनी रहेगी।"

फिर एक अद्भुत पुकार आती है, "हे यहोवा की भुजा, जाग! जाग!" जैसे कोई सोए हुए योद्धा को जगाता हो। "क्या तू वही नहीं जिसने समुद्र को सूखा डाला, जिससे तेरे लोग पार जा सके?" यह उस समय की बात है जब परमेश्वर ने लाल सागर को दो भाग किया था और अपने लोगों को मिस्र से निकाला था।

परमेश्वर वादा करते हैं, "बंदी शीघ्र ही स्वतंत्र किया जाएगा।" और यरूशलेम को भी जगाया जाता है, "जाग उठ! खड़ी हो जा!" जैसे कोई नशे में गिरा हुआ व्यक्ति उठकर खड़ा होता है। परमेश्वर अपने क्रोध का कटोरा, जो लोगों ने पिया था, अब उनके हाथ से ले लेते हैं। वह दंड अब उनके सताने वालों पर पड़ेगा।

What Does This Mean?

यह अध्याय एक चित्र है, एक रोते हुए, गिरे हुए व्यक्ति का जो धीरे धीरे उठकर खड़ा होता है। परमेश्वर के लोग बहुत डर गए थे। उन्हें लग रहा था कि परमेश्वर सो गए हैं, भूल गए हैं। पर परमेश्वर कहते हैं, "मैं नहीं सोया। मैं वही हूँ जिसने पहले भी बचाया।"

संदेश यह है, जब सब कुछ टूटा हुआ लगे, तब भी परमेश्वर की भुजा जागी हुई है। वे भुलक्कड़ नहीं हैं। वे अपने वादे नहीं तोड़ते।

The Common Thread

यह वादा अकेले यशायाह के समय के लिए नहीं था। परमेश्वर कहते हैं, "मैंने तेरे मुँह में अपने वचन डाले" और "सिय्योन से कहूँ, तुम मेरी प्रजा हो।" यह वही वादा है जो बाद में यीशु मसीह में पूरा हुआ। यीशु मसीह भी एक बंदी छुड़ाने आए, पाप और मृत्यु की बंदीगृह से। जैसे परमेश्वर ने लाल सागर में मार्ग बनाया, वैसे ही यीशु मसीह ने क्रूस पर मृत्यु और जीवन के बीच मार्ग बनाया।

For You

कभी तुम भी डर जाते हो, अंधेरे में, या जब कुछ बुरा होता है। उस समय याद रखो, परमेश्वर की भुजा सोई नहीं है। तुम प्रार्थना कर सकते हो, "परमेश्वर, जागिए, मेरी मदद कीजिए।" और भरोसा रखो कि वे सुनते हैं, जैसे उन्होंने अपने पुराने लोगों की सुनी थी।

Talk About It

तुम्हें कब लगा था कि परमेश्वर तुम्हारी बात नहीं सुन रहे? उस समय क्या हुआ?

यशायाह 51 में परमेश्वर कहते हैं "मत डरो।" तुम्हें किस चीज़ से डर लगता है, जिसके बारे में तुम परमेश्वर से बात कर सकते हो?

Praying Together

हे परमेश्वर, आप कभी सोते नहीं, कभी भूलते नहीं। जब हम डरें, तब हमें याद दिलाइए कि आपकी भुजा हमेशा जागी हुई है। धन्यवाद कि आपने यीशु मसीह के द्वारा हमें बंदीगृह से छुड़ाया। हमें भी वैसा ही भरोसा दीजिए, जैसा अब्राहम को था। आमीन।

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यशायाह 51 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 51 किस विषय में है?
सोचो, एक शहर पूरी तरह टूट गया है। घर गिरे हुए हैं, सड़कें सुनसान हैं, लोग रो रहे हैं। यह यरूशलेम शहर था। परमेश्वर के लोग बंदी बना लिए गए थे, दूर देश में। वे थके हुए थे, डरे हुए थे, सोचते थे कि क्या अब कभी घर लौट पाएँगे।
यशायाह 51 क्या कहता है?
लोग डरे हुए थे, दूसरे राष्ट्रों के लोग उनका मजाक उड़ाते थे। परमेश्वर कहते हैं, "मनुष्यों की नामधराई से मत डरो। वे तो घास के समान मुरझा जाएँगे, पर मेरी धार्मिकता सदा बनी रहेगी।"
यशायाह 51 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय एक चित्र है, एक रोते हुए, गिरे हुए व्यक्ति का जो धीरे धीरे उठकर खड़ा होता है। परमेश्वर के लोग बहुत डर गए थे। उन्हें लग रहा था कि परमेश्वर सो गए हैं, भूल गए हैं। पर परमेश्वर कहते हैं, "मैं नहीं सोया। मैं वही हूँ जिसने पहले भी बचाया।"
बच्चे यशायाह 51 से क्या सीख सकते हैं?
कभी तुम भी डर जाते हो, अंधेरे में, या जब कुछ बुरा होता है। उस समय याद रखो, परमेश्वर की भुजा सोई नहीं है। तुम प्रार्थना कर सकते हो, "परमेश्वर, जागिए, मेरी मदद कीजिए।" और भरोसा रखो कि वे सुनते हैं, जैसे उन्होंने अपने पुराने लोगों की सुनी थी।
यशायाह 51 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, आप कभी सोते नहीं, कभी भूलते नहीं। जब हम डरें, तब हमें याद दिलाइए कि आपकी भुजा हमेशा जागी हुई है। धन्यवाद कि आपने यीशु मसीह के द्वारा हमें बंदीगृह से छुड़ाया। हमें भी वैसा ही भरोसा दीजिए, जैसा अब्राहम को था। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

आकाश, जो सबसे स्थिर दिखता है, परमेश्वर कहते हैं वह धुएँ के समान लोप हो जाएगा। और पृथ्वी? "कपड़े के समान पुरानी हो जाएगी।" जिस दुनिया पर तू अपना भरोसा टिकाता है, वह एक पुराने कुर्ते जैसी है, धीरे धीरे घिसती हुई। पर उसी वचन में वादा है, "मेरा उद्धार सदा बना रहेगा।" आज अपनी आँखें ऊपर उठा। जो टिकने वाला है, उसी को पकड़।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

जब वह अकेला था, तब ही मैंने उसको बुलाया और आशीष देकर बहुत कर दिया।" (यशायाह 51:2)

निर्वासन में बैठे लोग खुद को गिनती में बहुत कम समझ रहे थे। परमेश्वर उन्हें अब्राहम की याद दिलाता है, एक अकेला आदमी, जिससे पूरी जाति निकली।

तुम्हारा अकेलापन परमेश्वर के लिए रुकावट नहीं है। वह अकसर एक ही से शुरू करता है।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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