7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

निर्गमन 35

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्यवस्था विवरण

विवरण

मूसा पहाड़ से नीचे उतरे और इस्राएल की पूरी मण्डली को इकट्ठा किया। उन्होंने पहले सातवें दिन के विश्राम की बात दोहराई। छः दिन काम करना है, पर सातवाँ दिन यहोवा के लिए पवित्र विश्राम का दिन है। फिर मूसा ने कुछ अद्भुत बताया। परमेश्वर एक निवास स्थान चाहते हैं, एक तम्बू जहाँ वे अपने लोगों के बीच रह सकें। इसके लिए सोना, चाँदी, पीतल, रंगे हुए कपड़े, लकड़ी, तेल, सुगन्ध-द्रव्य और मणि चाहिए। पर परमेश्वर ने किसी को यह देने के लिए मजबूर नहीं किया। जिसका मन चाहे, वही भेंट लाए।

यह सुनकर लोग लौट गए, और फिर कुछ हुआ जो पढ़ने में खुशी देता है। स्त्री और पुरुष, दोनों अपनी इच्छा से भेंट लाने लगे। किसी ने अपने गहने दिए, किसी ने कपड़ा, किसी ने लकड़ी। कुछ स्त्रियाँ जिनके हाथों में हुनर था, उन्होंने अपने हाथों से सूत काता और कपड़ा बुना। प्रधान लोग मणि और तेल लाए। हर किसी ने अपनी क्षमता के अनुसार कुछ दिया।

अंत में मूसा ने बताया कि परमेश्वर ने बसलेल नाम के एक व्यक्ति को खास रूप से चुना है। उसके साथ ओहोलीआब को भी। परमेश्वर ने इन दोनों को अपने आत्मा से भर दिया, ताकि वे सोने, चाँदी, पीतल में, पत्थर काटने में, लकड़ी पर नक्काशी करने में, कपड़ा बुनने में कुशल हो जाएँ। यह सिर्फ मानवीय हुनर नहीं था, यह परमेश्वर की ओर से दिया गया उपहार था।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर की सेवा में हर तरह के लोगों की ज़रूरत होती है। कोई गहने देता है, कोई सूत कातता है, कोई नक्काशी करता है। किसी का काम छोटा नहीं है और किसी का बड़ा नहीं है, हर काम परमेश्वर के लिए है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी को मजबूर नहीं किया गया। भेंट "इच्छा से" दी गई। परमेश्वर चाहते हैं कि हम उनसे प्रेम करके दें, डर से नहीं। और यह भी दिलचस्प है कि बसलेल और ओहोलीआब का हुनर परमेश्वर की तरफ से आया। इसका मतलब है कि कला, कारीगरी, हाथों का काम, ये सब भी परमेश्वर की ओर से आते हैं। परमेश्वर सिर्फ पुजारियों और भविष्यवक्ताओं का परमेश्वर नहीं है, वे कारीगरों का भी परमेश्वर हैं।

बड़ी कहानी की कड़ी

तम्बू, जिसे यहाँ "निवास" कहा गया है, परमेश्वर के लोगों के बीच रहने का स्थान था। यह उस वाचा का हिस्सा था जो परमेश्वर ने अपने लोगों से बाँधी थी, वह वचन कि "मैं तुम्हारा परमेश्वर होऊँगा और तुम मेरे लोग होगे।" परमेश्वर दूर आकाश में बैठे नहीं रहना चाहते, वे पास आना चाहते हैं।

बहुत बाद में, यीशु मसीह के बारे में कहा गया कि वे भी हमारे बीच "तम्बू में रहे," यानी परमेश्वर मनुष्य बनकर हमारे बीच आए। जो तम्बू सोने, कपड़े और लकड़ी से बना था, वह एक झलक थी उस दिन की जब परमेश्वर खुद मनुष्य के रूप में हमारे बीच रहेंगे।

तुम्हारे लिए

तुम्हारे पास भी कुछ है जो तुम परमेश्वर को दे सकते हो। शायद तुम अच्छा चित्र बनाते हो, या गाना गाते हो, या किसी की मदद करने में अच्छे हो, या पढ़ने में तेज़ हो। यह अध्याय बताता है कि यह सब परमेश्वर की तरफ से आया हुआ हुनर है, और यह उन्हीं को लौटाया जा सकता है।

सोचो, क्या तुम कभी किसी काम को इसलिए करते हो क्योंकि करना पड़ता है, या कभी दिल से भी? इस अध्याय के लोग दिल से देते थे। यही परमेश्वर को सबसे ज्यादा भाता है, मजबूरी का नहीं, दिल का दिया हुआ।

आपस में बात करें

अगर परमेश्वर तुमसे पूछें कि तुम्हारे पास कौन सा हुनर है जो तुम उन्हें दे सकते हो, तो तुम क्या कहोगे?

बसलेल और ओहोलीआब को परमेश्वर ने खास हुनर दिया था। क्या तुम्हें लगता है कि आम कामों में लगे लोग भी परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं, जैसे स्कूल में पढ़ना या घर का काम करना?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, धन्यवाद कि आपने हम सबको कुछ न कुछ हुनर दिया है। हमें दिखाइए कि हम अपने हाथों से, अपने दिल से, आपकी सेवा कैसे कर सकते हैं। जैसे आपके लोगों ने खुशी से भेंट दी, वैसे ही हमें भी दिल से देने वाला बनाइए, डर से नहीं। आमीन।

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निर्गमन 35 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

निर्गमन 35 किस विषय में है?
मूसा पहाड़ से नीचे उतरे और इस्राएल की पूरी मण्डली को इकट्ठा किया। उन्होंने पहले सातवें दिन के विश्राम की बात दोहराई। छः दिन काम करना है, पर सातवाँ दिन यहोवा के लिए पवित्र विश्राम का दिन है। फिर मूसा ने कुछ अद्भुत बताया। परमेश्वर एक निवास स्थान चाहते हैं, एक तम्बू जहाँ वे अपने लोगों के बीच रह सकें। इसके लिए सोना, चाँदी, पीतल, रंगे हुए कपड़े, लकड़ी, तेल, सुगन्ध-द्रव्य और मणि चाहिए। पर परमेश्वर ने किसी को यह देने के लिए मजबूर नहीं किया। जिसका मन चाहे, वही भेंट लाए।
निर्गमन 35 क्या कहता है?
अंत में मूसा ने बताया कि परमेश्वर ने बसलेल नाम के एक व्यक्ति को खास रूप से चुना है। उसके साथ ओहोलीआब को भी। परमेश्वर ने इन दोनों को अपने आत्मा से भर दिया, ताकि वे सोने, चाँदी, पीतल में, पत्थर काटने में, लकड़ी पर नक्काशी करने में, कपड़ा बुनने में कुशल हो जाएँ। यह सिर्फ मानवीय हुनर नहीं था, यह परमेश्वर की ओर से दिया गया उपहार था।
निर्गमन 35 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी को मजबूर नहीं किया गया। भेंट "इच्छा से" दी गई। परमेश्वर चाहते हैं कि हम उनसे प्रेम करके दें, डर से नहीं। और यह भी दिलचस्प है कि बसलेल और ओहोलीआब का हुनर परमेश्वर की तरफ से आया। इसका मतलब है कि कला, कारीगरी, हाथों का काम, ये सब भी परमेश्वर की ओर से आते हैं। परमेश्वर सिर्फ पुजारियों और भविष्यवक्ताओं का परमेश्वर नहीं है, वे कारीगरों का भी परमेश्वर हैं।
बच्चे निर्गमन 35 से क्या सीख सकते हैं?
बहुत बाद में, यीशु मसीह के बारे में कहा गया कि वे भी हमारे बीच "तम्बू में रहे," यानी परमेश्वर मनुष्य बनकर हमारे बीच आए। जो तम्बू सोने, कपड़े और लकड़ी से बना था, वह एक झलक थी उस दिन की जब परमेश्वर खुद मनुष्य के रूप में हमारे बीच रहेंगे।
निर्गमन 35 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
सोचो, क्या तुम कभी किसी काम को इसलिए करते हो क्योंकि करना पड़ता है, या कभी दिल से भी? इस अध्याय के लोग दिल से देते थे। यही परमेश्वर को सबसे ज्यादा भाता है, मजबूरी का नहीं, दिल का दिया हुआ।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

आँगन के पर्दे, खम्भे, कुर्सियाँ, द्वार का पर्दा। कोई सोना नहीं, कोई करूब नहीं, वह चीज़ें जिन पर लोगों की नज़र भी नहीं पड़ती। फिर भी परमेश्वर ने इन्हें नाम लेकर गिनवाया। तेरी वह सेवा जो किसी को दिखती नहीं, जो केवल थामे रखती है, वह भी उसकी सूची में लिखी है। कुर्सियाँ ज़मीन में गड़ी रहती हैं, पर उनके बिना पर्दा खड़ा नहीं होता।

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