3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

निर्गमन 35

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

मूसा सब लोगों के सामने खड़े थे। बहुत सारे लोग, बड़े और बच्चे, सब वहाँ थे। मूसा ने कहा, "सुनो! परमेश्वर ने एक काम करने को कहा है।"

लोग चुप होकर सुन रहे थे। मूसा ने कहा, "परमेश्वर के लिए एक घर बनाना है। एक तम्बू। वहाँ परमेश्वर रहेंगे।"

फिर मूसा ने कहा, "जिसका भी मन करे, वह कुछ लाए।" सोना लाओ। चाँदी लाओ। नीला, बैंगनी, लाल कपड़ा लाओ। बकरी के बाल, लकड़ी, तेल, सुगन्ध, सब कुछ लाओ।

इसका क्या अर्थ है?

और फिर कुछ सुन्दर हुआ। लोग घर गए। और वापस आए। हाथ भरे हुए। एक स्त्री सोने की अंगूठी लाई। एक पुरुष लकड़ी लाया। एक और स्त्री अपने हाथों से काता हुआ धागा लाई, नीला और लाल और बैंगनी।

सब खुश थे। किसी ने मजबूरी से नहीं दिया। हर एक ने अपने मन से दिया। जिसका मन करता, वही लाता। बहुत लोग आए। इतना सामान आया कि तम्बू बन सके।

परमेश्वर का घर खाली हाथों से नहीं बना। यह बना क्योंकि लोगों के दिल खुश होकर देना चाहते थे।

समान सूत्र

परमेश्वर ने दो पुरुषों को चुना। एक का नाम बसलेल था। दूसरे का नाम ओहोलीआब था। परमेश्वर ने उनके मन में बुद्धि डाली। उनके हाथों को कुशल बनाया। वे लकड़ी पर नक्काशी कर सकते थे। वे सोने चाँदी से सुन्दर चीज़ें बना सकते थे।

यह परमेश्वर ही थे जिन्होंने उन्हें यह काम करने की शक्ति दी। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु मसीह को भेजा। यीशु मसीह भी एक घर बनाने आए। पर वह घर लकड़ी और सोने का नहीं था। वह घर हमारे दिल थे। यीशु मसीह चाहते हैं कि हम अपना दिल खुशी से उन्हें दें।

तुम्हारे लिए

तुम भी परमेश्वर को कुछ दे सकते हो। शायद सोना नहीं। पर तुम अपनी मुस्कान दे सकते हो। अपना गीत दे सकते हो। अपनी प्रार्थना दे सकते हो। जैसे वे लोग खुशी से लाए थे, वैसे ही तुम भी खुशी से दो।

क्या तुम्हारा मन आज परमेश्वर को कुछ देने का करता है?

बात करें

तुम परमेश्वर को क्या देना चाहोगे?

बसलेल के हाथों में परमेश्वर ने क्या डाला था?

साथ में प्रार्थना करें

प्रभु, आप भली हैं। मैं भी आपको कुछ देना चाहता हूँ। मेरा दिल ले लीजिए। मेरी खुशी ले लीजिए। मुझे भी बुद्धि दीजिए, जैसे आपने बसलेल को दी थी। आमीन।

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निर्गमन 35 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

निर्गमन 35 किस विषय में है?
मूसा सब लोगों के सामने खड़े थे। बहुत सारे लोग, बड़े और बच्चे, सब वहाँ थे। मूसा ने कहा, "सुनो! परमेश्वर ने एक काम करने को कहा है।"
निर्गमन 35 क्या कहता है?
फिर मूसा ने कहा, "जिसका भी मन करे, वह कुछ लाए।" सोना लाओ। चाँदी लाओ। नीला, बैंगनी, लाल कपड़ा लाओ। बकरी के बाल, लकड़ी, तेल, सुगन्ध, सब कुछ लाओ।
निर्गमन 35 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सब खुश थे। किसी ने मजबूरी से नहीं दिया। हर एक ने अपने मन से दिया। जिसका मन करता, वही लाता। बहुत लोग आए। इतना सामान आया कि तम्बू बन सके।
नन्हे बच्चे निर्गमन 35 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने दो पुरुषों को चुना। एक का नाम बसलेल था। दूसरे का नाम ओहोलीआब था। परमेश्वर ने उनके मन में बुद्धि डाली। उनके हाथों को कुशल बनाया। वे लकड़ी पर नक्काशी कर सकते थे। वे सोने चाँदी से सुन्दर चीज़ें बना सकते थे।
निर्गमन 35 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम भी परमेश्वर को कुछ दे सकते हो। शायद सोना नहीं। पर तुम अपनी मुस्कान दे सकते हो। अपना गीत दे सकते हो। अपनी प्रार्थना दे सकते हो। जैसे वे लोग खुशी से लाए थे, वैसे ही तुम भी खुशी से दो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

आँगन के पर्दे, खम्भे, कुर्सियाँ, द्वार का पर्दा। कोई सोना नहीं, कोई करूब नहीं, वह चीज़ें जिन पर लोगों की नज़र भी नहीं पड़ती। फिर भी परमेश्वर ने इन्हें नाम लेकर गिनवाया। तेरी वह सेवा जो किसी को दिखती नहीं, जो केवल थामे रखती है, वह भी उसकी सूची में लिखी है। कुर्सियाँ ज़मीन में गड़ी रहती हैं, पर उनके बिना पर्दा खड़ा नहीं होता।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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