निर्गमन 7
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
मूसा अस्सी साल का था और हारून तिरासी। दोनों बूढ़े आदमी, कोई युवा योद्धा नहीं। और इन दोनों को परमेश्वर मिस्र के सबसे शक्तिशाली राजा के सामने खड़ा करते हैं।
परमेश्वर मूसा से कहते हैं: "मैं तुझे फ़िरौन के लिये परमेश्वर सा ठहराता हूँ; और तेरा भाई हारून तेरा नबी ठहरेगा।" इसका मतलब यह है: मूसा को परमेश्वर के शब्द मिलेंगे, और हारून उन्हें आगे बोलेगा। मूसा को अपनी बातें गढ़नी नहीं हैं। उसे केवल वही कहना है जो उसे दिया गया है।
लेकिन परमेश्वर एक चेतावनी भी देते हैं। वे कहते हैं कि फ़िरौन नहीं सुनेगा। और वे यह भी कहते हैं: "मैं फ़िरौन के मन को कठोर कर दूँगा।" फिर परमेश्वर बताते हैं कि उनका मकसद क्या है: "मिस्री जान लेंगे, कि मैं यहोवा हूँ।"
तो मूसा और हारून महल में जाते हैं। हारून अपनी लाठी ज़मीन पर डालता है और वह अजगर बन जाती है। फ़िरौन प्रभावित नहीं होता। वह अपने जादूगरों को बुलाता है, और वे वही करके दिखाते हैं। उनकी लाठियाँ भी अजगर बन जाती हैं। लेकिन तब कुछ ऐसा होता है जिसकी नकल कोई नहीं कर सकता: हारून की लाठी उन सब लाठियों को निगल जाती है। फ़िरौन इसे देखता है और उसका मन और भी हठीला हो जाता है।
अगली सुबह मूसा नील नदी के किनारे खड़ा है, हाथ में वही लाठी। नील मिस्र की जान थी। उसके पानी से खेत हरे होते थे, उससे मछली मिलती थी, उससे लोग पीते थे। हारून लाठी उठाकर पानी पर मारता है, और नदी का सारा जल लहू बन जाता है। मछलियाँ मर जाती हैं। नदी से दुर्गन्ध आने लगती है। घरों में लकड़ी और पत्थर के जलपात्रों में भी लहू ही लहू। लोग नदी के किनारे गड्ढे खोदते हैं, इस उम्मीद में कि कहीं साफ़ पानी निकल आए।
और फ़िरौन? "फ़िरौन ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया, और मुँह फेरकर अपने घर में चला गया।" सात दिन ऐसे ही बीत गए।
इसका अर्थ क्या है?
यहाँ एक बात है जिसे मैं तुमसे छिपाना नहीं चाहता, क्योंकि यह मुश्किल है। पाठ कहता है कि परमेश्वर फ़िरौन का मन कठोर करेंगे। और वही पाठ कहता है कि फ़िरौन का मन खुद हठीला हो गया। दोनों बातें एक साथ लिखी हैं। तो क्या फ़िरौन दोषी था, या परमेश्वर ने उसे मजबूर किया? बाइबल यह सवाल पूरी तरह हल नहीं करती, और मैं भी नहीं कर सकता। मैं बस इतना देखता हूँ: फ़िरौन ने बार-बार खुद मुँह फेरा। कोई उसे धक्का देकर घर के अंदर नहीं ले गया।
दूसरी बात: जादूगर काफ़ी कुछ कर सके। नकल कर सके। लेकिन वे कुछ भी ठीक नहीं कर सके। पानी को फिर पानी नहीं बना सके। दिखावा करना आसान है, जीवन देना केवल परमेश्वर कर सकते हैं।
और तीसरी बात, सबसे महत्वपूर्ण: परमेश्वर यह सब क्यों करते हैं? इसलिए नहीं कि उन्हें ताक़त दिखाना अच्छा लगता है। वे चाहते हैं कि लोग उन्हें जानें। "मैं यहोवा हूँ।" मिस्र नील को देवता मानता था। परमेश्वर उसी नदी को छूते हैं, ताकि साफ़ हो जाए कि असली परमेश्वर कौन हैं।
जोड़नेवाला धागा
परमेश्वर मूसा से कहते हैं: "मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे कि जिससे वे जंगल में मेरी उपासना करें।" परमेश्वर अपने लोगों को गुलामी में छोड़ नहीं देते। वे उन्हें आज़ाद करके अपने पास बुलाते हैं। यह पूरी बाइबल का धागा है।
मूसा एक और आदमी की ओर इशारा करता है। मूसा को परमेश्वर के शब्द मिले और उसने वे कहे। यीशु मसीह परमेश्वर के शब्द केवल बोलते नहीं, वे स्वयं वह शब्द हैं। मूसा ने नदी पर लाठी मारी, और वह मौत की नदी बन गई। यीशु ने अपना खून बहाया, और वह जीवन बन गया। परमेश्वर छुड़ाना जानते हैं, और अंत में वे इसकी सबसे बड़ी कीमत खुद चुकाते हैं।
तुम्हारे लिए
फ़िरौन ने कोई बड़ा भाषण देकर परमेश्वर को नकारा नहीं। उसने बस मुँह फेरा और घर चला गया। यह हमारे साथ भी हो सकता है। तुम कुछ सुनते हो जो सच है, और तुम विषय बदल देते हो। तुम जानते हो कि तुम्हें माफ़ी माँगनी चाहिए, और तुम फ़ोन उठा लेते हो। एक हठीला मन एक ही दिन में नहीं बनता, वह छोटे-छोटे मुँह फेरने से बनता है।
और मूसा अस्सी साल का था। परमेश्वर उन लोगों को काम देते हैं जिन्हें कोई नहीं चुनता। तुम भी बहुत छोटे नहीं हो। तुम आज किसी के लिए सच बोल सकते हो, या किसी अकेले बच्चे के पास बैठ सकते हो। परमेश्वर का काम शानदार दिखने वाले लोगों से नहीं, सुननेवाले लोगों से होता है।
इस पर बात करो
तुम्हें लगता है कि जादूगर वही चमत्कार करने की कोशिश क्यों करते रहे, बदलने की कोशिश क्यों नहीं की?
तुम कब "मुँह फेरकर घर चले जाते हो", यानी कब जानबूझकर सुनना नहीं चाहते?
मिलकर प्रार्थना
परमेश्वर, आप सचमुच परमेश्वर हैं, और आप चाहते हैं कि हम आपको जानें। हमारा मन कठोर होने से बचाइए। जब हम मुँह फेरना चाहें, तब हमें फिर आपकी ओर मोड़िए। और जो लोग आज भी बंधन में हैं, उन्हें आप छुड़ाइए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
निर्गमन 7 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
निर्गमन 7 किस विषय में है?
निर्गमन 7 क्या कहता है?
निर्गमन 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे निर्गमन 7 से क्या सीख सकते हैं?
निर्गमन 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
नील नदी मिस्रियों के लिए सिर्फ पानी नहीं थी, वह उनका देवता थी, उनकी जीवनरेखा थी। परमेश्वर ने ठीक उसी जगह हाथ रखा जहाँ मिस्र को अपनी सुरक्षा दिखती थी। "मिस्र देश के जल जल में, अर्थात् उनकी नदियों, नहरों, झीलों, और जलकुण्डों पर।" कहीं भी पानी छूटा नहीं।
सोचिए, आप जिस पर सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं, वही अगर लहू बन जाए तो? कभी कभी परमेश्वर हमारी "नील नदियों" को छूते हैं, ताकि हम जान सकें कि असली जीवन कहाँ से आता है।
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