6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यहेजकेल 19

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या (यहेजकेल 19)

यह अध्याय एक विलापगीत है, यानी एक दुःख भरा गीत, जो किसी की मृत्यु या पतन पर गाया जाता है। परमेश्वर यहेजकेल से कहते हैं कि इस्राएल के प्रधानों के बारे में यह गीत गाए। गीत में दो चित्र हैं, और दोनों चित्र दुःख की बात कहते हैं।

पहला चित्र एक सिंहनी का है। यह सिंहनी इस्राएल की तस्वीर है। उसके दो बच्चे जवान सिंह बन गए, यानी दो राजा उठे। पहला सिंह अहेर पकड़ना सीख गया, वह ताकतवर बना, पर दूसरी जातियों ने उसे गड्ढे में फँसाया और मिस्र देश ले गए। माँ ने निराश होकर दूसरे बच्चे को पाला, वह भी वैसा ही निकला, नगरों को उजाड़ने लगा, पर अंत में उसे भी जंजीरों में बाँधकर बाबेल के राजा के पास ले गए। दोनों बार कहानी एक जैसी खत्म होती है, ताकत से शुरू होकर बंधन में समाप्त होती है।

दूसरा चित्र एक दाखलता का है, जो पानी के पास लगी थी, फलों और शाखाओं से भरपूर, इतनी ऊँची कि वह बादलों तक पहुँचती थी। उसमें राजदंड बनाने लायक मोटी टहनियाँ थीं, यानी राजा बनाने लायक ताकत थी। पर यह लता भी उखाड़ी गई, जलाई गई, और अब सूखी भूमि में डाल दी गई है, जहाँ कोई मोटी टहनी नहीं बची।

इसका क्या अर्थ है?

यह गीत इस्राएल के राजाओं के बारे में है, जिन्होंने अपनी ताकत का दुरुपयोग किया। वे मनुष्यों को फाड़ खाने वाले सिंह बन गए, यानी उन्होंने अपनी प्रजा पर अन्याय किया। फिर भी ध्यान दीजिए, यह गीत उन पर गुस्सा नहीं दिखाता, बल्कि दुःख दिखाता है। यह एक विलाप है, आँसुओं का गीत, न कि केवल सज़ा का ऐलान।

यह बताना ज़रूरी है कि परमेश्वर यहाँ सीधे नहीं कहते कि "मैंने यह किया" या "यह उनका पाप था"। पाठ बस दिखाता है कि कैसे ताकत बार-बार बंधन में बदल गई। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है, क्या ताकत का इस्तेमाल हमेशा इसी तरह खत्म होता है जब वह अन्याय के लिए इस्तेमाल हो? यह सवाल पाठ खुला छोड़ देता है, और यह ठीक है कि हम भी इस पर सोचें।

बड़ी कहानी से संबंध

बाइबल की बड़ी कहानी में परमेश्वर ने इस्राएल से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक पक्का वादा, कि वे उनकी प्रजा होंगे और परमेश्वर उनके परमेश्वर होंगे। उस वाचा के भीतर राजाओं को न्याय और करुणा से राज करना था। पर यहाँ के राजा सिंह बन गए जो अपनी ही प्रजा को फाड़ते हैं। यह दिखाता है कि मनुष्य की अगुवाई कितनी आसानी से बिगड़ सकती है।

यहीं से हमें यीशु मसीह की याद आती है। वे भी एक राजा थे, पर बिलकुल अलग तरह के। उन्होंने ताकत का इस्तेमाल दूसरों को कुचलने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान देने के लिए किया। जहाँ इस्राएल के राजा मनुष्यों को फाड़ते थे, वहाँ यीशु ने खुद को दूसरों के लिए तोड़ा। यह अध्याय सीधे यीशु का ज़िक्र नहीं करता, पर यह खाली जगह, एक अच्छे राजा की तलाश, पूरी बाइबल में चलती रहती है जब तक हम यीशु तक नहीं पहुँचते।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हारे पास सिंह जैसी ताकत नहीं है, पर हर किसी के पास कुछ न कुछ ताकत होती है, चाहे वह शारीरिक हो, या दोस्तों के बीच प्रभाव हो, या घर में बड़े भाई-बहन होने की बात हो। सवाल यह है कि तुम उस ताकत का इस्तेमाल कैसे करते हो। क्या तुम उसे दूसरों को दबाने के लिए इस्तेमाल करते हो, या उनकी मदद के लिए? इस्राएल के राजाओं की कहानी हमें याद दिलाती है कि ताकत अकेले कभी सुरक्षा नहीं देती। असली सुरक्षा तब आती है जब हम परमेश्वर के रास्ते पर चलते हैं, जैसे यीशु ने चला।

बात करें

अगर तुम्हारे पास थोड़ी सी ताकत या प्रभाव हो, किसी खेल में, घर में, या दोस्तों के बीच, तो तुम उसका इस्तेमाल कैसे करते हो?

यह गीत दुःख से भरा है, गुस्से से नहीं। तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर किसी के गिरने पर दुःखी क्यों हो सकते हैं, न कि सिर्फ नाराज़?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु, आप हमें दिखाते हैं कि ताकत का गलत इस्तेमाल कितना दुःख लाता है। हमें सिखाइए कि हम अपनी ताकत से दूसरों को दबाएँ नहीं, बल्कि उनकी सहायता करें। धन्यवाद कि यीशु मसीह ने हमें एक सच्चे और भले राजा का उदाहरण दिया। हमें उनके पीछे चलने में मदद दीजिए। आमीन।

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यहेजकेल 19 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहेजकेल 19 किस विषय में है?
यह अध्याय एक विलापगीत है, यानी एक दुःख भरा गीत, जो किसी की मृत्यु या पतन पर गाया जाता है। परमेश्वर यहेजकेल से कहते हैं कि इस्राएल के प्रधानों के बारे में यह गीत गाए। गीत में दो चित्र हैं, और दोनों चित्र दुःख की बात कहते हैं।
यहेजकेल 19 क्या कहता है?
दूसरा चित्र एक दाखलता का है, जो पानी के पास लगी थी, फलों और शाखाओं से भरपूर, इतनी ऊँची कि वह बादलों तक पहुँचती थी। उसमें राजदंड बनाने लायक मोटी टहनियाँ थीं, यानी राजा बनाने लायक ताकत थी। पर यह लता भी उखाड़ी गई, जलाई गई, और अब सूखी भूमि में डाल दी गई है, जहाँ कोई मोटी टहनी नहीं बची।
यहेजकेल 19 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह बताना ज़रूरी है कि परमेश्वर यहाँ सीधे नहीं कहते कि "मैंने यह किया" या "यह उनका पाप था"। पाठ बस दिखाता है कि कैसे ताकत बार-बार बंधन में बदल गई। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है, क्या ताकत का इस्तेमाल हमेशा इसी तरह खत्म होता है जब वह अन्याय के लिए इस्तेमाल हो? यह सवाल पाठ खुला छोड़ देता है, और यह ठीक है कि हम भी इस पर सोचें।
बच्चे यहेजकेल 19 से क्या सीख सकते हैं?
यहीं से हमें यीशु मसीह की याद आती है। वे भी एक राजा थे, पर बिलकुल अलग तरह के। उन्होंने ताकत का इस्तेमाल दूसरों को कुचलने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान देने के लिए किया। जहाँ इस्राएल के राजा मनुष्यों को फाड़ते थे, वहाँ यीशु ने खुद को दूसरों के लिए तोड़ा। यह अध्याय सीधे यीशु का ज़िक्र नहीं करता, पर यह खाली जगह, एक अच्छे राजा की तलाश, पूरी बाइबल में चलती रहती है जब तक हम यीशु तक नहीं पहुँचते।
यहेजकेल 19 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम्हारे पास थोड़ी सी ताकत या प्रभाव हो, किसी खेल में, घर में, या दोस्तों के बीच, तो तुम उसका इस्तेमाल कैसे करते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

उसने अपने बच्चों में से एक को पाला और वह जवान सिंह हो गया, और अहेर पकड़ना सीख गया; उसने मनुष्यों को भी फाड़ खाया।" ध्यान दो, वह सीख गया। क्रूरता पैदाइशी नहीं थी, घर में पली। और अगले ही पद में वही सिंह जंजीरों में मिस्र ले जाया जाता है। तुम अपने बच्चों को, अपने छोटों को रोज़ चुपचाप क्या सिखा रहे हो?

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