7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

इफिसियों 1

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पौलुस एक पत्र लिख रहा है। यह पत्र इफिसुस शहर के उन लोगों को है जो यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं। पौलुस शुरुआत में ही एक बहुत बड़ी बात कहता है, वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है क्योंकि परमेश्वर ने विश्वासियों को हर तरह की आत्मिक आशीष दी है।

फिर पौलुस कुछ अद्भुत कहता है, परमेश्वर ने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले ही चुन लिया था। सोचो, इसका मतलब है कि परमेश्वर ने पृथ्वी बनाने से भी पहले तुम्हारे बारे में सोचा था। परमेश्वर चाहता है कि हम उसकी दृष्टि में पवित्र और निर्दोष हों, यानी शुद्ध और सच्चे हों। और परमेश्वर ने प्रेम से ठान लिया कि हम यीशु मसीह के द्वारा उसके लेपालक पुत्र बनें। लेपालक पुत्र का मतलब है, जिसे गोद लिया गया हो, अपना बनाया गया हो।

आगे पौलुस समझाता है कि यह सब कैसे हुआ। यीशु मसीह के लहू के द्वारा हमें छुटकारा मिला, यानी हमारे अपराधों की क्षमा मिली। परमेश्वर ने अपनी योजना का एक भेद भी बताया, वह यह कि समय की पूर्ति होने पर परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी की सब चीज़ों को मसीह में इकट्ठा करेगा। यह एक बड़ी योजना है, जिसमें पूरी सृष्टि का हिस्सा है।

पौलुस यह भी लिखता है कि जब इफिसुस के लोगों ने सुसमाचार सुना और विश्वास किया, तब उन पर पवित्र आत्मा की छाप लगी। यह एक तरह की मुहर या गारंटी है, यह दिखाती है कि वे परमेश्वर के अपने हैं और आगे भी उनके साथ रहेंगे।

आखिरी हिस्से में पौलुस प्रार्थना करता है कि विश्वासियों को बुद्धि और समझ मिले ताकि वे जान सकें कि परमेश्वर ने उन्हें किस आशा के लिए बुलाया है। वह लिखता है कि परमेश्वर की शक्ति कितनी महान है, वही शक्ति जिसने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जिलाया और उसे स्वर्ग में सबसे ऊँचे स्थान पर बैठाया। और अंत में पौलुस कहता है कि मसीह को कलीसिया का शिरोमणि यानी सिर बनाया गया है, और कलीसिया उसकी देह है।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय भारी लग सकता है, इसमें कई बड़े शब्द हैं। पर इसके पीछे एक सीधी बात है, परमेश्वर ने हमें अकस्मात नहीं चुना। उसने प्रेम से, बहुत पहले से, हमारे बारे में सोचा। यह हमारी योग्यता के कारण नहीं हुआ, पौलुस लिखता है कि यह उसकी इच्छा और भले अभिप्राय के अनुसार हुआ। यानी परमेश्वर ने यह इसलिए किया क्योंकि वह ऐसा करना चाहता था, प्रेम के कारण।

यह भी ध्यान देने की बात है कि पौलुस बार-बार लिखता है "उसकी महिमा की स्तुति हो"। जैसे यह पूरी योजना का मकसद यही है, कि लोग परमेश्वर की स्तुति करें। यह घमंड नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर भला है और उसका काम प्रशंसा के लायक है।

समान सूत्र

यह पूरा अध्याय यीशु मसीह के इर्द-गिर्द घूमता है। हर आशीष "मसीह में" मिलती है। हमें चुना गया "उसमें", हमें छुटकारा मिला "उसके लहू के द्वारा", और परमेश्वर की योजना है कि सब कुछ "मसीह में" इकट्ठा हो। यीशु मसीह के बिना यह सब कुछ नहीं हो सकता था। वह वह जोड़ने वाली कड़ी है, जिसके द्वारा परमेश्वर हमें अपना बनाता है।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी सोचा है कि परमेश्वर ने पृथ्वी बनाने से पहले ही तुम्हारे बारे में सोचा था? यह समझना कठिन है, और सच कहें तो पूरी तरह समझना शायद संभव भी नहीं है। पर इतना ज़रूर मालूम है कि तुम परमेश्वर के लिए कोई भूल-चूक नहीं हो। तुम चुने हुए हो, प्रेम से। जब तुम्हें लगे कि तुम काफी अच्छे नहीं हो, तो याद रखना कि परमेश्वर की पसंद तुम्हारी योग्यता पर टिकी नहीं है।

बात करें

अगर परमेश्वर ने तुम्हें जगत की उत्पत्ति से पहले ही चुन लिया था, तो इसका तुम्हारे आज के दिन पर क्या असर पड़ता है?

पौलुस कहता है कि पवित्र आत्मा एक "छाप" या गारंटी है। तुम्हें क्या लगता है, यह जानना कि परमेश्वर हमेशा साथ रहने का वादा करता है, कैसा महसूस कराता है?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आपने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले ही प्रेम से चुना। हमारी समझ छोटी है, पर आपका प्रेम बहुत बड़ा है। हमें यीशु मसीह पर भरोसा करना सिखाइए, और हमारे मन की आँखें खोलिए कि हम आपकी महिमा को पहचान सकें। आमीन।

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इफिसियों 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

इफिसियों 1 किस विषय में है?
पौलुस एक पत्र लिख रहा है। यह पत्र इफिसुस शहर के उन लोगों को है जो यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं। पौलुस शुरुआत में ही एक बहुत बड़ी बात कहता है, वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है क्योंकि परमेश्वर ने विश्वासियों को हर तरह की आत्मिक आशीष दी है।
इफिसियों 1 क्या कहता है?
आगे पौलुस समझाता है कि यह सब कैसे हुआ। यीशु मसीह के लहू के द्वारा हमें छुटकारा मिला, यानी हमारे अपराधों की क्षमा मिली। परमेश्वर ने अपनी योजना का एक भेद भी बताया, वह यह कि समय की पूर्ति होने पर परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी की सब चीज़ों को मसीह में इकट्ठा करेगा। यह एक बड़ी योजना है, जिसमें पूरी सृष्टि का हिस्सा है।
इफिसियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
आखिरी हिस्से में पौलुस प्रार्थना करता है कि विश्वासियों को बुद्धि और समझ मिले ताकि वे जान सकें कि परमेश्वर ने उन्हें किस आशा के लिए बुलाया है। वह लिखता है कि परमेश्वर की शक्ति कितनी महान है, वही शक्ति जिसने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जिलाया और उसे स्वर्ग में सबसे ऊँचे स्थान पर बैठाया। और अंत में पौलुस कहता है कि मसीह को कलीसिया का शिरोमणि यानी सिर बनाया गया है, और कलीसिया उसकी देह है।
बच्चे इफिसियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
यह भी ध्यान देने की बात है कि पौलुस बार-बार लिखता है "उसकी महिमा की स्तुति हो"। जैसे यह पूरी योजना का मकसद यही है, कि लोग परमेश्वर की स्तुति करें। यह घमंड नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर भला है और उसका काम प्रशंसा के लायक है।
इफिसियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुमने कभी सोचा है कि परमेश्वर ने पृथ्वी बनाने से पहले ही तुम्हारे बारे में सोचा था? यह समझना कठिन है, और सच कहें तो पूरी तरह समझना शायद संभव भी नहीं है। पर इतना ज़रूर मालूम है कि तुम परमेश्वर के लिए कोई भूल-चूक नहीं हो। तुम चुने हुए हो, प्रेम से। जब तुम्हें लगे कि तुम काफी अच्छे नहीं हो, तो याद रखना कि परमेश्वर की पसंद तुम्हारी योग्यता पर टिकी नहीं है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

उसने अपनी इच्छा का भेद हमें बताया," यह वचन कहता है। भेद वही बताया जाता है जिस पर भरोसा हो, जो अपना हो। परमेश्वर ने तुझे दूर खड़ा दर्शक नहीं रखा, उसने अपने मन की बात तुझे बताई, मसीह में। सोच, तेरी प्रार्थनाओं का उत्तर कभी देर से आए, फिर भी उसकी योजना तुझसे छिपी नहीं। तू उसके विश्वास के घेरे में है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, उन पवित्र लोगों के नाम जो इफिसुस में हैं।" ध्यान दे, पौलुस उन्हें "पवित्र लोग" कहता है, जबकि वे एक मूर्तिपूजक शहर के साधारण लोग थे। तेरी पहचान तेरे शहर या तेरे अतीत से नहीं, परमेश्वर की इच्छा से तय होती है। क्या तू खुद को इसी नाम से देखता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिए पहले से ठहराया कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों।"

गोद लेना कभी दुर्घटना से नहीं होता। बच्चा जन्म से मिल जाता है, पर गोद लिया बेटा चुना जाता है, कागज़ पर नाम लिखा जाता है, कीमत चुकाई जाती है। परमेश्वर ने तुम्हें मजबूरी में नहीं, खुशी से चुना। तुम उसकी योजना में बाद में जोड़े गए नाम नहीं हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

कि हम जो पहले से मसीह में आशा रखते आए हैं, उसकी महिमा की स्तुति का कारण हों।"

ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि हम स्तुति करें, बल्कि यह कि हम स्तुति का कारण बनें। तेरा जीवन एक वजह है जिससे कोई और परमेश्वर की बड़ाई करे। आज किसी ने तुझे देखकर उसकी महिमा की? यही तो तेरे बचाए जाने का मकसद है।

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