उत्पत्ति 44
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
यूसुफ ने अपने भाइयों की सचमुच परीक्षा ली। उसने अपने घर के अधिकारी से कहा कि सब भाइयों की बोरियों में जितना अनाज समा सके भर दिया जाए, और हर एक का रुपया भी उसकी बोरी में वापस रख दिया जाए। इतना ही नहीं, उसने अपना चाँदी का कटोरा सबसे छोटे भाई बिन्यामीन की बोरी में छिपवा दिया। भाई अभी नगर से निकले ही थे कि यूसुफ ने अपने अधिकारी को उनके पीछे भेजा। अधिकारी ने उन पर चोरी का आरोप लगाया। भाई पूरी तरह चौंक गए, उन्होंने कहा कि जिसके पास कटोरा मिले वह मर जाए, और बाकी सब दास बन जाएँ। इतना विश्वास था उन्हें अपनी बेगुनाही पर।
जब बोरियाँ खोली गईं, कटोरा ठीक बिन्यामीन की बोरी में से निकला। भाइयों ने अपने वस्त्र फाड़े, यह दुःख और निराशा का चिन्ह था, और सब यूसुफ के घर लौट आए। यहूदा ने कहा, “परमेश्वर ने तेरे दासों के अधर्म को पकड़ लिया है।” यह अजीब बात है, क्योंकि इस बार तो उन्होंने कुछ चुराया ही नहीं था। पर शायद यहूदा के मन में वह पुराना अपराध याद आ गया, जब उन्होंने यूसुफ को ही बेच दिया था।
यूसुफ ने कहा कि केवल बिन्यामीन दास बनकर रहेगा, बाकी सब पिता के पास लौट सकते हैं। यहीं से यहूदा का लंबा और गहरा भाषण शुरू होता है। वह यूसुफ को समझाता है कि उनका बूढ़ा पिता याकूब बिन्यामीन से कितना प्रेम करता है, कि पहले ही एक बेटा खो चुका है, और यदि बिन्यामीन भी न लौटा तो पिता दुःख से मर जाएगा। यहूदा याद दिलाता है कि उसने खुद अपने पिता से वादा किया था कि वह बिन्यामीन को सुरक्षित वापस लाएगा। अंत में वह एक चौंकाने वाली बात कहता है, वह खुद बिन्यामीन के बदले दास बनने को तैयार है, ताकि लड़का अपने भाइयों के साथ घर लौट सके।
What Does This Mean?
यह अध्याय भाइयों के बदलते दिल की कहानी है। याद करें, यही भाई थे जिन्होंने कभी यूसुफ को गड्ढे में डाल दिया और गुलाम बनाकर बेच दिया था, बिना यह सोचे कि पिता पर क्या बीतेगी। अब यहूदा अपने पिता के दुःख की बात करते हुए रो पड़ता है। वह अपने छोटे भाई की जगह खुद को दास बनाने को तैयार है। यह वही यहूदा है जिसने कभी यूसुफ को बेचने का सुझाव दिया था। परमेश्वर ने वर्षों में उसके दिल को बदल दिया है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यूसुफ यह सब क्यों करता है। वह भाइयों को परखना चाहता है, यह जानने के लिए कि क्या वे अब भी अपने छोटे भाई को धोखा देंगे जैसे उन्होंने उसके साथ किया था। यूसुफ का यह तरीका कठोर लगता है, लेकिन इसके पीछे शायद यह जानने की चाह थी कि क्या उसके भाई सचमुच बदल गए हैं।
The Common Thread
यहूदा का यह प्रस्ताव, कि वह बिन्यामीन के बदले खुद दास बने, कुछ बहुत बड़ा दिखाता है। बाइबल की पूरी कहानी में हम बार बार देखते हैं कि परमेश्वर किसी और के बदले किसी को बचाना चाहते हैं। सदियों बाद, यहूदा के ही वंश से यीशु मसीह आए, और उन्होंने ठीक यही किया, सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि वास्तव में। उन्होंने हमारी जगह ली, ताकि हम आज़ाद हो सकें। यहूदा अपने भाई को बचाने के लिए दास बनने को तैयार था। यीशु मसीह ने हमें बचाने के लिए क्रूस पर अपना प्राण दे दिया। यह कोई संयोग नहीं लगता।
For You
कभी तुमने किसी और की गलती की सज़ा खुद भुगतने के बारे में सोचा है? यह आसान नहीं है। यहूदा के लिए भी आसान नहीं था, फिर भी उसने कहा कि वह तैयार है। शायद तुम्हारे घर में या दोस्तों के बीच कभी ऐसा मौका आए जहाँ तुम किसी और की रक्षा के लिए अपना कुछ त्याग कर सको। इस अध्याय से यह भी सीखने को मिलता है कि परमेश्वर लोगों को बदल सकते हैं। जो भाई कभी स्वार्थी और क्रूर थे, वही अब प्रेम और त्याग की बात करते हैं। तुम्हारे अंदर भी परमेश्वर ऐसा बदलाव ला सकते हैं।
Talk About It
यहूदा पहले यूसुफ को बेचने में शामिल था, अब वह उसकी जगह दास बनना चाहता है। क्या तुम्हें लगता है वह सचमुच बदल गया था, या डर से ऐसा कह रहा था?
यूसुफ ने भाइयों को यह कठिन परीक्षा क्यों दी होगी? क्या तुम्हें उसका तरीका सही लगता है?
Praying Together
हे प्रभु परमेश्वर, आप यहूदा का दिल बदल सकते थे, वैसे ही हमारा दिल भी बदल दीजिए। हमें ऐसा प्रेम दीजिए कि हम दूसरों के लिए त्याग करना सीखें। धन्यवाद कि यीशु मसीह ने हमारे बदले अपना जीवन दिया। हमें उनके जैसा बनने में मदद कीजिए। आमीन।
उत्पत्ति 44 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
उत्पत्ति 44 किस विषय में है?
उत्पत्ति 44 क्या कहता है?
उत्पत्ति 44 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे उत्पत्ति 44 से क्या सीख सकते हैं?
उत्पत्ति 44 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जिस चोरी का आरोप था, उसमें यहूदा सचमुच निर्दोष था। फिर भी वह कहता है, "परमेश्वर ने तेरे दासों के अधर्म को पकड़ लिया है।" बीस साल पुराना पाप, भाई को बेच देना, अब भीतर से बोल उठा। कभी कभी परमेश्वर एक छोटी घटना से वह दरवाज़ा खोलता है जिसे हमने सालों से बंद रखा है। तुम्हारे भीतर कौन सा कमरा अब तक बंद है?
उसको मेरे पास ले आओ, कि मैं उसको देखूँ।" भाइयों ने इसे हाकिम का कड़ा हुक्म समझा, पर यह तो बड़े भाई की तड़प थी, जो बरसों से अपने छोटे भाई का चेहरा देखने को तरस रहा था। कई बार परमेश्वर की माँगें भी हमें सख्त लगती हैं। पर उनके पीछे वही आवाज़ है, मैं तुझे देखना चाहता हूँ। क्या तू पास आएगा?
यहूदा वही आदमी है जिसने कभी कहा था, "आओ, हम उसे बेच डालें।" अब वही कहता है, "अपने दास को उस लड़के के बदले अपने प्रभु का दास होकर रहने दे।" बीस साल में उसका दिल बदल गया। सच्चा पश्चाताप सिर्फ आँसू नहीं, दूसरे की जगह खड़े होने की तैयारी है। तू किसके बदले कीमत चुकाने को तैयार है?
वही यहूदा, जिसने कभी यूसुफ को बेच दिया था और फिर पिता का रोना चुपचाप देखता रहा, अब कहता है, "क्योंकि लड़के के बिना मैं अपने पिता के पास कैसे जाऊँ?" अब पिता का दुःख उससे सहा नहीं जाता, इसलिए वह खुद दास बनने को तैयार है। सच्चा पश्चाताप यही है, जब दूसरे का दर्द तुम्हें अपने नुकसान से भारी लगने लगे।
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