7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 23

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

The Explanation

यह अध्याय यीशु के अंतिम घंटों की कहानी है। सारी सभा यीशु को पिलातुस के पास ले गई, जो रोमी राज्यपाल था। उन्होंने झूठे आरोप लगाए कि यीशु लोगों को बहका रहे हैं और अपने आपको राजा कहते हैं। पिलातुस ने पूछताछ की और कहा, "मैं इस मनुष्य में कुछ दोष नहीं पाता।" फिर भी उसने यीशु को हेरोदेस के पास भेज दिया, क्योंकि हेरोदेस गलील का शासक था। हेरोदेस ने यीशु का उपहास किया और उन्हें वापस भेज दिया।

पिलातुस बार बार कहता रहा कि यीशु दोषी नहीं हैं। परन्तु भीड़ चिल्लाती रही, "उसे क्रूस पर चढ़ा दो!" और बरअब्बा नाम के एक हत्यारे को छोड़ने की मांग करती रही। अंत में पिलातुस डर गया और भीड़ की इच्छा के आगे झुक गया। यीशु को क्रूस ले जाया गया। शमौन नाम के एक व्यक्ति को क्रूस उठाने के लिए पकड़ा गया। रास्ते में यीशु ने रोती हुई स्त्रियों से गंभीर बातें कहीं।

खोपड़ी नाम की जगह पर यीशु को दो अपराधियों के बीच क्रूस पर चढ़ाया गया। उन्होंने कहा, "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं?" लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया, पर एक अपराधी ने अपने साथी को डाँटा और यीशु से कहा, "जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना।" यीशु ने उसे उत्तर दिया कि वह आज ही स्वर्गलोक में होगा।

दोपहर में अंधेरा छा गया, मन्दिर का परदा फट गया, और यीशु ने अपनी आत्मा पिता के हाथों में सौंपकर प्राण त्याग दिए। एक रोमी सूबेदार ने कहा, "निश्चय यह मनुष्य धर्मी था।" यूसुफ नाम के एक भले व्यक्ति ने यीशु का शव लेकर एक नई कब्र में रखा।

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें एक कठिन सच दिखाता है। यीशु निर्दोष थे, यह बात हर कोई जानता था, पिलातुस ने खुद तीन बार कहा। फिर भी भीड़ का शोर, डर और अन्याय जीत गए। कभी कभी सच्चाई भी हार जाती दिखती है। यह पढ़ना आसान नहीं है, और हमें इसे सरल भी नहीं बनाना चाहिए। पर ध्यान दो, यीशु ने बदला नहीं लिया। उन्होंने अपने मारने वालों के लिए क्षमा माँगी। यह कोई मजबूरी में कहा गया वाक्य नहीं था, यह उनके दिल की गहराई से निकला था।

The Common Thread

पूरी बाइबल में परमेश्वर ने वादा किया था कि वे अपने लोगों को बचाएँगे। यह वादा एक करार है, यानी परमेश्वर और उनके लोगों के बीच का एक पक्का समझौता। यीशु का क्रूस पर मरना उस वादे को पूरा करता है। जो अपराधी क्रूस पर लटका था, उसने कुछ नहीं किया जिससे वह बचाया जा सके, सिवाय इसके कि उसने यीशु पर भरोसा किया। और यीशु ने उसे कहा, वह उनके साथ स्वर्गलोक में होगा। यही पूरी बाइबल की कहानी है, परमेश्वर उन्हें भी अपनाते हैं जो खुद को बचा नहीं सकते।

For You

तुम्हारे जीवन में कभी कभी ऐसा लगेगा कि सही बात कहने पर भी लोग तुम्हारी नहीं सुनते, जैसे पिलातुस के सामने भीड़ ने यीशु की नहीं सुनी। ऐसे समय में यीशु को याद रखना जिन्होंने अन्याय सहा फिर भी क्षमा दी। इसका मतलब यह नहीं कि हमें हर बुरी बात को नज़रअंदाज़ करना है, पर इसका मतलब यह है कि बदला लेना हमारा रास्ता नहीं है। और जब तुम्हें लगे कि तुम बहुत बुरे काम कर चुके हो, उस अपराधी को याद करना, जिसने सिर्फ यीशु की ओर देखा और सुना, "आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।"

Talk About It

अगर तुम पिलातुस की जगह होते, तो क्या तुम भीड़ के डर के आगे झुक जाते, या सच बोलते रहते?

यीशु ने अपने मारने वालों के लिए क्षमा माँगी, क्या तुम्हें लगता है कि यह करना आसान था या मुश्किल? क्यों?

Praying Together

हे परमेश्वर पिता, धन्यवाद कि यीशु ने हमारे लिए इतना कठिन रास्ता चला। जब हमें अन्याय का सामना करना पड़े, तो हमें साहस दें। हमें सिखाएँ कि क्षमा करना कैसा दिखता है। हमें उस अपराधी की तरह विश्वास दें, जो सिर्फ आपकी ओर देखता है। आमीन।

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लूका 23 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 23 किस विषय में है?
यह अध्याय यीशु के अंतिम घंटों की कहानी है। सारी सभा यीशु को पिलातुस के पास ले गई, जो रोमी राज्यपाल था। उन्होंने झूठे आरोप लगाए कि यीशु लोगों को बहका रहे हैं और अपने आपको राजा कहते हैं। पिलातुस ने पूछताछ की और कहा, "मैं इस मनुष्य में कुछ दोष नहीं पाता।" फिर भी उसने यीशु को हेरोदेस के पास भेज दिया, क्योंकि हेरोदेस गलील का शासक था। हेरोदेस ने यीशु का उपहास किया और उन्हें वापस भेज दिया।
लूका 23 क्या कहता है?
खोपड़ी नाम की जगह पर यीशु को दो अपराधियों के बीच क्रूस पर चढ़ाया गया। उन्होंने कहा, "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं?" लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया, पर एक अपराधी ने अपने साथी को डाँटा और यीशु से कहा, "जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना।" यीशु ने उसे उत्तर दिया कि वह आज ही स्वर्गलोक में होगा।
लूका 23 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय हमें एक कठिन सच दिखाता है। यीशु निर्दोष थे, यह बात हर कोई जानता था, पिलातुस ने खुद तीन बार कहा। फिर भी भीड़ का शोर, डर और अन्याय जीत गए। कभी कभी सच्चाई भी हार जाती दिखती है। यह पढ़ना आसान नहीं है, और हमें इसे सरल भी नहीं बनाना चाहिए। पर ध्यान दो, यीशु ने बदला नहीं लिया। उन्होंने अपने मारने वालों के लिए क्षमा माँगी। यह कोई मजबूरी में कहा गया वाक्य नहीं था, यह उनके दिल की गहराई से निकला था।
बच्चे लूका 23 से क्या सीख सकते हैं?
तुम्हारे जीवन में कभी कभी ऐसा लगेगा कि सही बात कहने पर भी लोग तुम्हारी नहीं सुनते, जैसे पिलातुस के सामने भीड़ ने यीशु की नहीं सुनी। ऐसे समय में यीशु को याद रखना जिन्होंने अन्याय सहा फिर भी क्षमा दी। इसका मतलब यह नहीं कि हमें हर बुरी बात को नज़रअंदाज़ करना है, पर इसका मतलब यह है कि बदला लेना हमारा रास्ता नहीं है। और जब तुम्हें लगे कि तुम बहुत बुरे काम कर चुके हो, उस अपराधी को याद करना, जिसने सिर्फ यीशु की ओर देखा और सुना, "आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।"
लूका 23 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यीशु ने अपने मारने वालों के लिए क्षमा माँगी, क्या तुम्हें लगता है कि यह करना आसान था या मुश्किल? क्यों?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

अपनी पीठ पर क्रूस लिए, लहूलुहान चलते हुए यीशु रुककर रोती हुई स्त्रियों से कहते हैं कि मेरे लिए नहीं, अपने लिए रोओ। और फिर यह भयानक बात: "तब वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, 'हम पर गिरो' और टीलों से कि 'हमें ढाँप लो।'" सोचो, पहाड़ के नीचे दबना उस दिन का सामना करने से आसान लगेगा। पर जिससे लोग छिपना चाहेंगे, वही आज तुम्हें ढाँपने को क्रूस तक चला जा रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

फसह पर एक बन्दी को छोड़ने की रीति थी, "उसे हर एक पर्व में उनके लिये एक बन्दी को छोड़ना पड़ता था।" छुटकारे के इसी पर्व में एक दोषी छूट गया और एक निर्दोष बाँधा गया। बरअब्बा को शायद कभी समझ न आया हो कि उसकी जंजीरें किसने पहनीं। पर तुम जानते हो। तुम्हारी जगह कोई खड़ा हुआ था। आज उस अदला बदली को हल्के में मत लेना।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

फिर सारी सभा उठकर उसे पिलातुस के पास ले गई।" पूरी सभा एक साथ उठी। इतने धर्मी लोग, इतनी एकमत, और सब गलत दिशा में। भीड़ का एक स्वर होना इस बात का सबूत नहीं कि वह सही है। तू भी कभी किसी ऐसे समूह में खड़ा हो सकता है जहाँ सब एक ही बात कह रहे हों। रुककर पूछ, क्या मसीह इस भीड़ के साथ है, या उसके सामने बँधा खड़ा है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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