इब्रानियों 13
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
सोचो, तुम एक लंबी यात्रा पर हो। रात हो गई है, और तुम्हें रहने की जगह चाहिए। कोई दरवाज़ा खोलकर कहता है, "अंदर आओ, खाना खाओ।" इब्रानियों की यह चिट्ठी ऐसे ही लोगों को लिखी गई थी, जो यीशु पर विश्वास करते थे, पर थक गए थे।
लेखक कहता है, भाइयों जैसा प्रेम बना रहे। जो अजनबी आए, उसे घर में बुलाओ, क्योंकि कुछ लोगों ने बिना जाने स्वर्गदूतों की मेहमानी की। जो कैद में हैं, उन्हें मत भूलो, मानो तुम खुद वहाँ बँधे हो। लालच मत करो, जो है उसी में सन्तोष रखो, क्योंकि परमेश्वर ने कहा है, "मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा।" इसलिए डरने की ज़रूरत नहीं, प्रभु हमारे साथ है, मनुष्य हमारा क्या बिगाड़ सकता है?
फिर लेखक एक बड़ी बात कहता है: "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक-सा है।" जैसे एक मज़बूत किला कभी नहीं हिलता, वैसे ही यीशु कभी नहीं बदलते।
आगे एक अनोखी तस्वीर आती है। पुराने दिनों में, पापबलि के पशु का माँस छावनी के बाहर जलाया जाता था। यीशु को भी नगर के फाटक के बाहर दुःख उठाना पड़ा, ताकि वे अपने लहू से लोगों को पवित्र करें। इसलिए लेखक बुलाता है, "आओ, छावनी के बाहर उसके पास चलें," भले ही इसके लिए निन्दा सहनी पड़े।
What Does This Mean?
यह चिट्ठी एक सैनिक के कप्तान जैसी बात कहती है, "डटे रहो, हार मत मानो।" परमेश्वर के लोग किसी स्थिर शहर के नागरिक नहीं, वे एक आनेवाले नगर की तलाश में हैं, एक ऐसा घर जो कभी नहीं गिरेगा। इसलिए रास्ते में एक-दूसरे का साथ देना, मेहमानों को जगह देना, कैदियों को याद रखना, ये छोटी बातें नहीं हैं। ये उस बड़े सफर के हिस्से हैं।
The Common Thread
यीशु खुद छावनी के बाहर गए, जहाँ कोई सम्मान नहीं था, सिर्फ़ दुःख और शर्म थी। उन्होंने यह इसलिए किया ताकि हम अंदर, परमेश्वर के पास, स्वागत पाएँ। वही अच्छा चरवाहा हैं, जिसे परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया। जैसे एक राजा अपने सैनिकों के आगे निकलकर पहला वार सहता है, वैसे ही यीशु ने पहला दुःख सहा, ताकि हम पीछे सुरक्षित चल सकें।
For You
तुम भी इस कहानी में चल सकते हो। जब कोई नया बच्चा तुम्हारी कक्षा में आए और अकेला दिखे, उसे अपने साथ खेलने बुलाओ, जैसे अजनबी को घर में बुलाना। जब तुम्हारा छोटा भाई या बहन डरा हुआ हो, उसके पास जाकर कहो, "डरो मत, मैं यहाँ हूँ," क्योंकि परमेश्वर ने भी यही कहा है। और जब तुम्हें लगे कि तुम्हारे पास बहुत कम है, याद रखना, परमेश्वर कभी साथ छोड़ते नहीं।
Talk About It
क्या तुमने कभी किसी अजनबी या अकेले बच्चे का साथ दिया? कैसा लगा?
यीशु छावनी के बाहर दुःख उठाने गए ताकि हम अंदर आ सकें। क्या तुम्हें लगता है यह प्यार बड़ा है या छोटा?
Praying Together
प्रभु यीशु, आप कल भी वैसे ही थे, आज भी वैसे ही हैं। धन्यवाद कि आपने हमारे लिए दुःख उठाया। हमें ऐसा दिल दीजिए जो अजनबियों को अपनाए, डरनेवालों को थामे, और आप पर भरोसा रखे। आमीन।
इब्रानियों 13 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
इब्रानियों 13 किस विषय में है?
इब्रानियों 13 क्या कहता है?
इब्रानियों 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे इब्रानियों 13 से क्या सीख सकते हैं?
इब्रानियों 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तेरह अध्यायों की गहरी चेतावनियों के बाद लेखक कहता है, "हे भाइयो, मैं तुम से विनती करता हूँ कि इस उपदेश की बातें सह लो।" सह लो, यानी उपदेश सुनना हमेशा मीठा नहीं लगता। जो सच तुझे बदलना चाहता है, वह पहले चुभता है। आज कौन सी बात तूने इसलिए टाल दी क्योंकि वह सहनी पड़ती?
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