3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

इब्रानियों 13

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक घर था। उस घर में बहुत सारे लोग रहते थे। भाई-भाई जैसे। वे एक-दूसरे से प्यार करते थे।

उस घर का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता था। कोई अनजाना आता, तो वे कहते, "आओ! अंदर आओ!" वे उसे रोटी देते। पानी देते। एक जगह सोने को देते।

उस घर में कुछ लोग उदास थे। कोई कैद में था। कोई दुखी था। तब बाकी लोग उनके पास जाते। वे कहते, "हम तुम्हारे साथ हैं।"

इसका क्या अर्थ है?

उस घर में एक बात बहुत मायने रखती थी, कि किसी के पास पैसा कितना है। एक आवाज़ आती थी, बहुत धीमी, बहुत प्यारी, "मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।" यह प्रभु की आवाज़ थी।

तो लोग डरते नहीं थे। वे कहते, "प्रभु मेरा सहायक है। मैं न डरूँगा।"

उस घर में कुछ अगुए भी थे। वे परमेश्वर का वचन सुनाते थे। लोग उन्हें प्यार से सुनते। उनकी बात मानते।

समान सूत्र

अब सुनो, एक बहुत खास बात। यीशु मसीह कल भी वैसे ही थे। आज भी वैसे ही हैं। हमेशा वैसे ही रहेंगे। वे कभी नहीं बदलते।

यीशु को दुःख उठाना पड़ा। शहर के बाहर। बहुत तकलीफ में। पर उन्होंने यह सब सहा, ताकि हम शुद्ध हो जाएँ। उनका खून, हमारे लिए बहाया गया।

इस दुनिया में हमारा घर हमेशा के लिए नहीं है। हम एक और शहर की खोज में हैं। एक शहर जो कभी नहीं गिरेगा। यीशु हमें वहाँ ले जाएँगे।

तुम्हारे लिए

तुम भी उस घर में रह सकते हो। जब कोई नया आए, तुम मुस्कुरा सकते हो। जब कोई गिर जाए, तुम उसका हाथ पकड़ सकते हो।

और जब तुम डरो, रात में, अंधेरे में, तुम याद कर सकते हो, "प्रभु मेरा सहायक है।" वे तुम्हें कभी नहीं छोड़ेंगे। कभी नहीं।

तुम परमेश्वर को धन्यवाद भी दे सकते हो। बस अपने मुँह से कहो, "धन्यवाद, परमेश्वर!" यह भी एक भेंट है। परमेश्वर को यह भेंट बहुत पसंद है।

बातचीत के लिए:

क्या तुम किसी दुखी दोस्त की मदद कर सकते हो? कैसे?

यीशु मसीह कभी नहीं बदलते। यह सुनकर तुम्हें कैसा लगता है?

साथ में प्रार्थना

प्यारे परमेश्वर,

धन्यवाद कि आप मुझे कभी नहीं छोड़ेंगे।

मुझे मदद करें, कि मैं भी अपने दोस्तों से प्यार करूँ।

यीशु के नाम में, आमीन।

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इब्रानियों 13 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

इब्रानियों 13 किस विषय में है?
एक घर था। उस घर में बहुत सारे लोग रहते थे। भाई-भाई जैसे। वे एक-दूसरे से प्यार करते थे।
इब्रानियों 13 क्या कहता है?
उस घर में कुछ लोग उदास थे। कोई कैद में था। कोई दुखी था। तब बाकी लोग उनके पास जाते। वे कहते, "हम तुम्हारे साथ हैं।"
इब्रानियों 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
तो लोग डरते नहीं थे। वे कहते, "प्रभु मेरा सहायक है। मैं न डरूँगा।"
नन्हे बच्चे इब्रानियों 13 से क्या सीख सकते हैं?
अब सुनो, एक बहुत खास बात। यीशु मसीह कल भी वैसे ही थे। आज भी वैसे ही हैं। हमेशा वैसे ही रहेंगे। वे कभी नहीं बदलते।
इब्रानियों 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
इस दुनिया में हमारा घर हमेशा के लिए नहीं है। हम एक और शहर की खोज में हैं। एक शहर जो कभी नहीं गिरेगा। यीशु हमें वहाँ ले जाएँगे।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

तेरह अध्यायों की गहरी चेतावनियों के बाद लेखक कहता है, "हे भाइयो, मैं तुम से विनती करता हूँ कि इस उपदेश की बातें सह लो।" सह लो, यानी उपदेश सुनना हमेशा मीठा नहीं लगता। जो सच तुझे बदलना चाहता है, वह पहले चुभता है। आज कौन सी बात तूने इसलिए टाल दी क्योंकि वह सहनी पड़ती?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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