यशायाह 51
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
कहानी क्या कहती है
सुनो, एक बहुत पुरानी कहानी है। परमेश्वर अपने लोगों से बात कर रहे थे। वे बहुत उदास थे। बहुत, बहुत उदास।
परमेश्वर ने कहा, "मेरी बात सुनो।" उनकी आवाज़ बहुत कोमल थी। "क्या तुम्हें अब्राहम याद है? और सारा? वे तुम्हारे परदादा और परदादी थे।"
अब्राहम अकेला था। बिल्कुल अकेला। उसके पास कोई बच्चा नहीं था। लेकिन परमेश्वर ने उसे बुलाया। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हें आशीष दूँगा।" और उन्होंने दी। अब्राहम के बहुत सारे बच्चे हुए। और उनके बच्चों के भी बच्चे हुए। इतने कि उन्हें गिना नहीं जा सकता।
फिर परमेश्वर ने कहा, "देखो, ऊपर देखो।" लोगों ने आकाश की ओर देखा। नीला आकाश। "देखो, नीचे देखो।" लोगों ने ज़मीन की ओर देखा। भूरी मिट्टी।
परमेश्वर ने धीरे से कहा, "एक दिन यह आकाश चला जाएगा। यह ज़मीन भी पुरानी हो जाएगी। लेकिन मैं? मैं हमेशा रहूँगा। और मेरा प्यार भी हमेशा रहेगा।"
लोग अब भी डरे हुए थे। बुरे लोग उन्हें डराते थे। परमेश्वर ने कहा, "डरो मत। मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मैं ही हूँ जो तुम्हें दिलासा देता हूँ।"
परमेश्वर ने अपने बड़े हाथ दिखाए। वे मज़बूत हाथ थे। बहुत मज़बूत। "देखो, मेरे इन्हीं हाथों ने आकाश बनाया। मेरे इन्हीं हाथों ने समुद्र को सूखा किया था। मैं तुम्हारी देखभाल करूँगा।"
इसका क्या मतलब है
परमेश्वर के लोग रो रहे थे। उनका शहर टूट गया था। पर परमेश्वर ने कहा, "रोओ मत। मैं तुम्हें फिर से खुश करूँगा। तुम्हारे आँसू पोंछ दिए जाएँगे। तुम्हारे मुँह से फिर से गीत निकलेंगे।"
परमेश्वर बहुत अच्छे हैं। वे कभी नहीं भूलते। कभी नहीं।
बड़ी कहानी
बहुत, बहुत साल बाद, परमेश्वर ने यीशु को भेजा। यीशु उदास लोगों को गले लगाते हैं। यीशु डरे हुए बच्चों से कहते हैं, "डरो मत। मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
जैसे परमेश्वर ने पुराने ज़माने में अपने लोगों को दिलासा दिया, वैसे ही यीशु आज भी हमें दिलासा देते हैं। उनका प्यार कभी खत्म नहीं होता। कभी नहीं।
तुम्हारे लिए
क्या तुम कभी डरते हो? रात को अँधेरे में? या जब माँ पास नहीं होती?
सुनो। परमेश्वर तुमसे कहते हैं, "डरो मत। मैं यहाँ हूँ।" उनके हाथ बहुत बड़े हैं। बहुत मज़बूत। वे तुम्हें थामे रहते हैं।
जब तुम डरो, तो चुपके से कहो, "परमेश्वर, आप मेरे पास हैं।" और वे सुनते हैं। हर बार।
बात करो
तुम कब डरते हो? क्या तुम बता सकते हो?
परमेश्वर के हाथ कैसे हैं, क्या तुम्हें याद है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, आप बहुत बड़े हैं। आप बहुत अच्छे हैं। जब मैं डरूँ, तो मेरा हाथ थाम लीजिए। धन्यवाद कि आप मुझसे प्यार करते हैं। हमेशा। आमीन।
यशायाह 51 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
यशायाह 51 किस विषय में है?
यशायाह 51 क्या कहता है?
यशायाह 51 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे यशायाह 51 से क्या सीख सकते हैं?
यशायाह 51 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जब वह अकेला था, तब ही मैंने उसको बुलाया और आशीष देकर बहुत कर दिया।" (यशायाह 51:2)
निर्वासन में बैठे लोग खुद को गिनती में बहुत कम समझ रहे थे। परमेश्वर उन्हें अब्राहम की याद दिलाता है, एक अकेला आदमी, जिससे पूरी जाति निकली।
तुम्हारा अकेलापन परमेश्वर के लिए रुकावट नहीं है। वह अकसर एक ही से शुरू करता है।
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