7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यिर्मयाह 12

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यिर्मयाह एक नबी थे, यानी परमेश्वर के लिए बोलने वाले व्यक्ति। इस अध्याय में वे परमेश्वर से एक बहुत साहसी सवाल पूछते हैं, "दुष्टों की चाल क्यों सफल होती है? विश्वासघाती लोग इतने सुख से क्यों रहते हैं?" यिर्मयाह देखते हैं कि जो लोग परमेश्वर की परवाह नहीं करते, वे बढ़ते हैं, फलते हैं, आराम से जीते हैं। जबकि वे खुद परमेश्वर के प्रति वफादार रहने की कोशिश करते हैं, और उनके अपने भाई-बंधु भी उनके खिलाफ हो गए हैं। यहाँ तक कि परमेश्वर उन्हें चेतावनी देते हैं कि यिर्मयाह के अपने घराने के लोग भी उनसे विश्वासघात करेंगे, इसलिए भले शब्दों पर भी भरोसा न करें।

परमेश्वर यिर्मयाह के सवाल का सीधा जवाब नहीं देते। इसके बजाय वे कहते हैं कि जो अभी हो रहा है, वह तो कुछ भी नहीं। यिर्मयाह पैदल चलने वालों के साथ दौड़कर ही थक गए हैं, तो घोड़ों के साथ कैसे दौड़ेंगे? आगे और भी कठिन दिन आने वाले हैं।

फिर परमेश्वर खुद अपने दुख के बारे में बोलने लगते हैं। यह हिस्सा चौंकाने वाला है। परमेश्वर कहते हैं कि उन्होंने अपना घर छोड़ दिया है, अपनी प्रिय प्रजा को शत्रुओं के हाथ में सौंप दिया है। वे अपने ही लोगों की तुलना जंगल के गरजते सिंह से करते हैं, जो उनके खिलाफ हो गया है। परमेश्वर की दाख की बारी, यानी उनका प्रिय बगीचा इस्राएल, चरवाहों द्वारा रौंदी जा चुकी है और वीरान हो गई है। परमेश्वर खुद रो रहे हैं क्योंकि उनकी अपनी प्रजा ने उनसे मुँह मोड़ लिया है।

अंत में परमेश्वर एक वादा भी देते हैं। जो पड़ोसी देश इस्राएल की भूमि हड़प रहे हैं, उन्हें भी उखाड़ा जाएगा। पर उसके बाद परमेश्वर उन पर भी दया करने की बात कहते हैं, अगर वे परमेश्वर के नाम की सौगन्ध खाना सीखें। और अगर वे न मानें, तो पूरी तरह उखाड़ दिए जाएँगे।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर से सवाल पूछना गलत नहीं है। यिर्मयाह डरते नहीं, वे सीधे परमेश्वर से पूछते हैं कि दुनिया में इतना अन्याय क्यों दिखता है। और परमेश्वर उन्हें डाँटते नहीं। पर परमेश्वर हर सवाल का साफ जवाब भी नहीं देते। वे यिर्मयाह को बताते हैं कि आगे और कठिनाई आएगी, न कि यह कि सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा।

सबसे गहरी बात यह है कि परमेश्वर खुद दुखी हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि परमेश्वर दूर से सब कुछ देखते हैं, बिना किसी भावना के। पर यहाँ परमेश्वर कहते हैं कि उन्होंने अपनी "प्राणप्रिया" को दुश्मनों के हाथ में सौंपा है, यह शब्द बहुत गहरे प्रेम और पीड़ा को दिखाता है। परमेश्वर अपनी प्रजा से इतना प्यार करते हैं कि उनकी बेवफाई उन्हें रुलाती है।

समान सूत्र

यह अध्याय हमें एक बड़ी सच्चाई की ओर ले जाता है, परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक वाचा में बंधे हैं, यानी एक पक्का वादा जो दोनों तरफ से निभाया जाना है। जब इस्राएल बेवफा होता है, तो परमेश्वर का दिल टूटता है, फिर भी वे पूरी तरह त्यागते नहीं। वे वादा करते हैं कि उखाड़े जाने के बाद फिर से लगाएंगे। यह वही परमेश्वर हैं जिन्होंने बाद में अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा, जो खुद दुखी हुए, रोए, और अपनों से त्यागे गए ताकि टूटा हुआ रिश्ता फिर से जुड़ सके। जो दर्द परमेश्वर यहाँ बयान करते हैं, वही दर्द सूली पर यीशु मसीह ने उठाया।

आपके लिए

क्या तुमने कभी सोचा है कि जो लोग परमेश्वर की परवाह नहीं करते, वे कभी-कभी ज्यादा मज़े में दिखते हैं, जबकि तुम सही करने की कोशिश करते हो और फिर भी मुश्किल में पड़ते हो? यिर्मयाह की तरह तुम भी परमेश्वर से यह सवाल पूछ सकते हो, वे नाराज़ नहीं होंगे। साथ ही, यह याद रखना कि तुम्हारी बेवफाई, तुम्हारा परमेश्वर से दूर जाना, उन्हें सच में दुखी करता है। परमेश्वर कोई दूर बैठा न्यायाधीश नहीं, वे तुमसे गहरा प्रेम करने वाले हैं।

चर्चा के लिए

तुम्हें कब लगा है कि सही काम करने पर भी चीज़ें अनुचित लगीं? तुमने क्या किया?

परमेश्वर का दुखी होना, यह सुनकर तुम्हारे मन में परमेश्वर के बारे में क्या बदलता है?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु, कभी-कभी हमें दुनिया अनुचित लगती है, और हम समझ नहीं पाते कि आप ऐसा क्यों होने देते हैं। हमें यिर्मयाह जैसा साहस दीजिए कि हम आपसे खुलकर सवाल पूछ सकें। और हमें यह भी सिखाइए कि हमारी बेवफाई आपके दिल को दुखी करती है। हमें अपने पास वापस खींचिए, ताकि हम आपसे कभी दूर न जाएँ। आमीन।

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यिर्मयाह 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यिर्मयाह 12 किस विषय में है?
यिर्मयाह एक नबी थे, यानी परमेश्वर के लिए बोलने वाले व्यक्ति। इस अध्याय में वे परमेश्वर से एक बहुत साहसी सवाल पूछते हैं, "दुष्टों की चाल क्यों सफल होती है? विश्वासघाती लोग इतने सुख से क्यों रहते हैं?" यिर्मयाह देखते हैं कि जो लोग परमेश्वर की परवाह नहीं करते, वे बढ़ते हैं, फलते हैं, आराम से जीते हैं। जबकि वे खुद परमेश्वर के प्रति वफादार रहने की कोशिश करते हैं, और उनके अपने भाई-बंधु भी उनके खिलाफ हो गए हैं। यहाँ तक कि परमेश्वर उन्हें चेतावनी देते हैं कि यिर्मयाह के अपने घराने के लोग भी उनसे विश्वासघात करेंगे, इसलिए भले शब्दों पर भी भरोसा न करें।
यिर्मयाह 12 क्या कहता है?
फिर परमेश्वर खुद अपने दुख के बारे में बोलने लगते हैं। यह हिस्सा चौंकाने वाला है। परमेश्वर कहते हैं कि उन्होंने अपना घर छोड़ दिया है, अपनी प्रिय प्रजा को शत्रुओं के हाथ में सौंप दिया है। वे अपने ही लोगों की तुलना जंगल के गरजते सिंह से करते हैं, जो उनके खिलाफ हो गया है। परमेश्वर की दाख की बारी, यानी उनका प्रिय बगीचा इस्राएल, चरवाहों द्वारा रौंदी जा चुकी है और वीरान हो गई है। परमेश्वर खुद रो रहे हैं क्योंकि उनकी अपनी प्रजा ने उनसे मुँह मोड़ लिया है।
यिर्मयाह 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर से सवाल पूछना गलत नहीं है। यिर्मयाह डरते नहीं, वे सीधे परमेश्वर से पूछते हैं कि दुनिया में इतना अन्याय क्यों दिखता है। और परमेश्वर उन्हें डाँटते नहीं। पर परमेश्वर हर सवाल का साफ जवाब भी नहीं देते। वे यिर्मयाह को बताते हैं कि आगे और कठिनाई आएगी, न कि यह कि सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा।
बच्चे यिर्मयाह 12 से क्या सीख सकते हैं?
यह अध्याय हमें एक बड़ी सच्चाई की ओर ले जाता है, परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक वाचा में बंधे हैं, यानी एक पक्का वादा जो दोनों तरफ से निभाया जाना है। जब इस्राएल बेवफा होता है, तो परमेश्वर का दिल टूटता है, फिर भी वे पूरी तरह त्यागते नहीं। वे वादा करते हैं कि उखाड़े जाने के बाद फिर से लगाएंगे। यह वही परमेश्वर हैं जिन्होंने बाद में अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा, जो खुद दुखी हुए, रोए, और अपनों से त्यागे गए ताकि टूटा हुआ रिश्ता फिर से जुड़ सके। जो दर्द परमेश्वर यहाँ बयान करते हैं, वही दर्द सूली पर यीशु मसीह ने उठाया।
यिर्मयाह 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें कब लगा है कि सही काम करने पर भी चीज़ें अनुचित लगीं? तुमने क्या किया?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

जो जातियाँ इस्राएल को बाल की सौंह खाना सिखाती थीं, उन्हीं के बारे में परमेश्वर कहता है, "यदि वे मेरे लोगों की चाल सीखें... तो वे मेरी प्रजा के बीच बसाए जाएँगे।" जिसने तुझे भटकाया, उसके लिए भी द्वार खुला है। तेरे मन में किसका नाम "कभी नहीं" की सूची में लिखा है? परमेश्वर की सूची तेरी सूची से बड़ी है।

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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