7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

अय्यूब 13

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

अय्यूब बहुत दुःख में है। उसने अपने बच्चे खो दिए, अपनी संपत्ति खो दी, और अब उसका शरीर बीमारी से भरा हुआ है। उसके तीन दोस्त उसके पास आए थे, पर वे कोई मदद नहीं कर रहे। वे बार-बार कहते हैं: "अय्यूब, तूने ज़रूर कुछ गलत किया होगा, इसीलिए परमेश्वर तुझे सज़ा दे रहा है।"

इस अध्याय में अय्यूब अपने दोस्तों से तंग आ चुका है। वह कहता है: "जो कुछ तुम जानते हो, वह मैं भी जानता हूँ। मैं तुमसे कम नहीं हूँ।" उनकी बातें उसे बुद्धिमान नहीं लगतीं। वह उन्हें "निकम्मे वैद्य" कहता है, यानी ऐसे डॉक्टर जो बीमारी ठीक नहीं कर पाते। और वह कुछ बहुत गहरी बात कहता है: तुम लोग परमेश्वर के बारे में झूठ बोल रहे हो। तुम सोचते हो कि परमेश्वर का पक्ष ले रहे हो, पर असल में तुम टेढ़ी बातें कह रहे हो।

फिर अय्यूब कुछ अद्भुत करता है। वह अपने दोस्तों से बात करना छोड़ देता है और सीधे परमेश्वर से बात करना चाहता है। वह कहता है: "मैं तो सर्वशक्तिमान से बातें करूँगा।" और वह जानता है कि यह खतरनाक है। वह कहता है: "वह मुझे घात करेगा, मुझे कुछ आशा नहीं; तो भी मैं अपनी चाल-चलन का पक्ष लूँगा।" इसका मतलब है: भले ही परमेश्वर मुझे मार डाले, मैं फिर भी उन्हीं के पास जाऊँगा।

अंत में अय्यूब परमेश्वर से दो चीज़ें माँगता है: "अपनी ताड़ना मुझसे दूर कर ले, और अपने भय से मुझे भयभीत न कर।" और फिर वह पूछता है वह सवाल जो उसके दिल में जल रहा है: "तू किस कारण अपना मुँह फेर लेता है, और मुझे अपना शत्रु गिनता है?"

What Does This Mean?

अय्यूब कुछ ऐसा करता है जो हमें चौंका सकता है: वह परमेश्वर से शिकायत करता है। वह गुस्से में लगता है। वह पूछता है: "आप ऐसा क्यों करते हैं?"

क्या यह ठीक है? क्या परमेश्वर से इस तरह बात करना पाप है?

देखो, बाइबल में यह पूरा अध्याय है। परमेश्वर ने यह हटाया नहीं। इसका मतलब है कि परमेश्वर हमारी ईमानदार बातें सुनना चाहते हैं, चाहे वे कठिन हों। अय्यूब के दोस्त बहुत "धार्मिक" बातें कर रहे थे, पर वे झूठ बोल रहे थे। अय्यूब कठिन बातें कह रहा था, पर वह सच बोल रहा था।

और सबसे सुंदर बात यह है: अय्यूब परमेश्वर से भागता नहीं। वह उनके पास जाता है। दुःख में भी वह कहता है, "मैं आपसे बात करूँगा।" यह विश्वास है, भले ही यह चिल्लाता हुआ विश्वास है।

The Common Thread

अय्यूब चाहता है कि कोई हो जो परमेश्वर के सामने उसका मुकद्दमा लड़े। वह चाहता है कि परमेश्वर उसे शत्रु न समझें। यह इच्छा बाइबल में आगे बहुत बड़ी हो जाती है।

बहुत साल बाद यीशु आए। यीशु वह हैं जो हमारे और परमेश्वर के बीच खड़े होते हैं। यीशु परमेश्वर से हमारा मुँह नहीं फेरने देते। बाइबल कहती है कि यीशु हमारे लिए मध्यस्थ हैं, यानी बीच में खड़े होने वाले। अय्यूब जिसे ढूँढ रहा था, यीशु में वह मिलता है।

और यीशु ने खुद भी क्रूस पर पुकारा: "मेरे परमेश्वर, आपने मुझे क्यों छोड़ दिया?" यीशु जानते हैं कि अय्यूब जैसा दर्द क्या होता है।

For You

कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसा होता है जब कुछ समझ नहीं आता। शायद कोई बीमार है जिसे तुम प्यार करते हो। शायद स्कूल में कुछ मुश्किल हो रहा है। शायद तुम्हें लगे कि परमेश्वर बहुत दूर हैं।

अय्यूब से एक बात सीखो: परमेश्वर से चुप मत हो जाओ। उनसे बात करो, भले ही तुम्हारे सवाल कठिन हों। तुम कह सकते हो, "मुझे समझ नहीं आता। आप ऐसा क्यों होने देते हैं?" यह पाप नहीं है। यह विश्वास है।

और एक बात और: कभी-कभी हम अय्यूब के दोस्तों जैसे हो जाते हैं। कोई दुःख में होता है, और हम जल्दी से कहते हैं, "यह तेरी गलती है," या "बस प्रार्थना कर, सब ठीक हो जाएगा।" कभी-कभी सबसे अच्छी बात होती है चुप रहना और साथ बैठना। अय्यूब ने खुद कहा: "भला होता, कि तुम बिल्कुल चुप रहते।"

Talk About It

क्या तुम्हें कभी परमेश्वर पर गुस्सा आया है या तुमने उनसे कोई कठिन सवाल पूछा है? क्या तुम्हें लगा कि यह ठीक है या नहीं?

जब तुम्हारा कोई दोस्त दुःख में हो, तो अय्यूब के दोस्तों से अलग करके तुम क्या कर सकते हो?

Praying Together

हे परमेश्वर, कभी-कभी हमें आपकी बातें समझ नहीं आतीं। कभी-कभी हम दुःखी होते हैं और सवाल पूछते हैं। धन्यवाद कि आप हमारे कठिन सवाल भी सुनते हैं। धन्यवाद कि यीशु हमारे और आपके बीच खड़े हैं। हमें सिखाइए कि हम आपसे ईमानदारी से बात करें, और दूसरों के दुःख में उनके साथ प्यार से बैठें। आमीन।

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दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय

At his lowest point Job says: though He slay me, yet will I hope in Him. That is not optimism. That is faith that has passed through the darkness. I always thought faith was something that makes things lighter, but with Job it is something that holds you when everything goes dark.

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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