1 यूहन्ना 4
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यूहन्ना अब बूढ़ा हो चुका है। वह उन लोगों को चिट्ठी लिख रहा है जिन्हें वह "हे प्रियों" कहकर पुकारता है, यानी "मेरे प्यारो"। उनके बीच एक समस्या खड़ी हो गई थी: कुछ लोग आकर कहते थे कि परमेश्वर ने उन्हें कुछ नया बताया है। पर वे सब एक ही बात नहीं कह रहे थे। तो कौन सच बोल रहा है?
यूहन्ना कहता है: हर एक आत्मा पर विश्वास मत करो, वरन् परखो। परखना यानी जाँचना, जैसे तुम किसी सिक्के को उलट-पलटकर देखते हो कि असली है या नकली। और वह एक बिल्कुल साफ कसौटी देता है: जो मानता है कि यीशु मसीह सचमुच शरीर में होकर आया, वह परमेश्वर की ओर से है। यानी यीशु कोई सपना या परछाईं नहीं थे। उनकी हड्डियाँ थीं, उनका खून था, उनके पाँव धूल में चलते थे।
फिर यूहन्ना का सुर बदल जाता है। वह डराता नहीं, वह हिम्मत देता है: "तुम परमेश्वर के हो… क्योंकि जो तुम में है, वह उससे जो संसार में है, बड़ा है।"
और उसके बाद वह एक ही शब्द के इर्द-गिर्द घूमता रहता है: प्रेम। तीन छोटे शब्दों में वह सब कुछ कह देता है, "परमेश्वर प्रेम है।" ध्यान दो, वह यह नहीं कहता कि परमेश्वर प्रेम करते हैं, बल्कि यह कि परमेश्वर प्रेम हैं। यह उनका स्वभाव है, उनका होना ही यही है।
पर यूहन्ना इसे हवा में नहीं छोड़ता। वह पूछता है: यह प्रेम दिखा कहाँ? और जवाब देता है, इसमें कि परमेश्वर ने अपने इकलौते पुत्र को जगत में भेजा, हमारे पापों के प्रायश्चित के लिए। प्रायश्चित का मतलब है: जो गलत हो गया, उसका दाम चुकाना, ताकि रिश्ता फिर जुड़ जाए।
इसका क्या अर्थ है?
पद 10 में एक बात है जो पूरी चिट्ठी को उलट देती है: "प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्वर से प्रेम किया पर इसमें है, कि उसने हम से प्रेम किया।" शुरुआत हमारी तरफ से नहीं हुई। परमेश्वर ने पहला कदम उठाया, तब भी जब हम उनकी ओर देख तक नहीं रहे थे।
फिर आता है वह वाक्य जो शायद सबसे राहत देने वाला है: "प्रेम में भय नहीं होता, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है।" यूहन्ना जानता है कि विश्वासी भी डरते हैं, खासकर न्याय के दिन के बारे में सोचकर। वह कहता है: अगर तुम जानते हो कि परमेश्वर तुमसे प्रेम करते हैं, तो उस दिन तुम्हें साहस होगा।
और एक बात जो चुभती भी है। पद 20 कहता है कि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर से प्रेम नहीं रख सकता। यानी परमेश्वर से प्रेम को नापने का तरीका आसमान में नहीं, तुम्हारे बगल में बैठे इंसान में है।
ईमानदारी से एक बात: यूहन्ना यह नहीं समझाता कि "आपस में प्रेम रखो" उस व्यक्ति के साथ कैसे काम करता है जो तुम्हें चोट पहुँचाता है। वह सवाल पाठ खुला छोड़ देता है, और मेरे पास भी उसका पूरा जवाब नहीं है।
जोड़ने वाला धागा
पूरे बाइबल में परमेश्वर बार-बार अपने लोगों के पास आते हैं: वादों के साथ, संदेशवाहकों के साथ, भविष्यद्वक्ताओं के साथ। यूहन्ना कहता है कि आखिर में वे खुद आए, अपने पुत्र में, शरीर में होकर। इसीलिए वह "शरीर में होकर आया" वाली बात पर इतना ज़ोर देता है। हमारा विश्वास किसी अच्छे विचार पर नहीं, बल्कि एक असली व्यक्ति पर टिका है, जिसे यूहन्ना ने अपनी आँखों से देखा था: "हमने देख भी लिया और गवाही देते हैं कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता होने के लिए भेजा है।"
तुम्हारे लिए
तुम्हारे आसपास बहुत सी आवाज़ें हैं। वीडियो, दोस्त, इंटरनेट, सब कुछ न कुछ कहते हैं कि सच क्या है। यूहन्ना तुम्हें डरने को नहीं कहता, वह तुम्हें परखने को कहता है। एक अच्छा सवाल यह है: यह बात यीशु के बारे में क्या कहती है?
और दूसरा हिस्सा और भी ठोस है। कल स्कूल में वह लड़का या लड़की होगी जिसके साथ कोई नहीं बैठना चाहता। परमेश्वर से प्रेम वहीं दिखता है, न कि सिर्फ़ प्रार्थना के शब्दों में। तुम्हें प्रेम इसलिए नहीं करना है ताकि परमेश्वर तुमसे प्रेम करने लगें। उल्टा है: "हम इसलिए प्रेम करते हैं, क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया।"
इस पर बात करो
अगर परमेश्वर प्रेम हैं, तो फिर भी लोग कभी-कभी परमेश्वर से डरते क्यों हैं? तुम्हें क्या लगता है?
तुम्हारे आसपास ऐसा कौन है जिससे प्रेम करना तुम्हें सचमुच मुश्किल लगता है, और इस हफ़्ते एक छोटा कदम क्या हो सकता है?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु परमेश्वर, आपने पहले हमसे प्रेम किया, तब भी जब हम आपको जानते तक नहीं थे। धन्यवाद कि आपने अपने पुत्र यीशु को सचमुच इस दुनिया में भेजा। हमें समझ दीजिए कि किसकी आवाज़ सच है। और हमारे डर को अपने प्रेम से हटा दीजिए, ताकि हम दूसरों से भी प्रेम कर सकें। आमीन।
1 यूहन्ना 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 यूहन्ना 4 किस विषय में है?
1 यूहन्ना 4 क्या कहता है?
1 यूहन्ना 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 यूहन्ना 4 से क्या सीख सकते हैं?
1 यूहन्ना 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हे बालकों, तुम परमेश्वर के हो और तुमने उन पर जय पाई है, क्योंकि जो तुममें है, वह उससे जो संसार में है, बड़ा है।"
ध्यान दे, यूहन्ना कहता है "जय पाई है", भविष्य में नहीं, बीत चुके काम की तरह। और यह बात उसने उन्हें बालक कहकर कही, मजबूत योद्धा कहकर नहीं। तेरी जीत तेरी ताकत पर नहीं, तुझमें बसे हुए उस एक पर टिकी है। आज डर किस बात का है?
इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन साहस हो।" सोचो, न्याय के दिन की बात हो रही है, और यूहन्ना डर की नहीं, साहस की बात करता है। जिस परमेश्वर से तुम छिपना चाहते हो, उसी का प्रेम तुम्हें उसके सामने सिर उठाकर खड़ा करता है। और वह प्रेम कहाँ सिद्ध होता है? वहीं, जहाँ तुम आज किसी मुश्किल इंसान से प्रेम करना चुनते हो। "जैसा वह है वैसे ही संसार में हम भी हैं।
जो कोई यह मान लेता है कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है, परमेश्वर उसमें बना रहता है, और वह परमेश्वर में।" ध्यान दे, यह रिश्ता दोनों तरफ़ से खुलता है। सिर्फ़ तू उसमें नहीं बसता, वह भी तुझमें बसता है। जिन लोगों को यूहन्ना लिख रहा था, उनके लिए यह अंगीकार करना महँगा पड़ता था। आज तू किन जगहों पर चुप रह जाता है?
प्रेम में भय नहीं होता, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय का सम्बन्ध दण्ड से होता है।" गौर कीजिए, यूहन्ना कहता है कि डर हमेशा सज़ा की आशा रखता है। अगर आप आज भी परमेश्वर के सामने आते हुए सिकुड़ जाते हैं, मानो कोई वार होने वाला है, तो सवाल यह नहीं कि उसका प्रेम कम है। सवाल यह है कि आपने उसे अपने भीतर कितनी गहराई तक उतरने दिया है।
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