7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यहोशू 21

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

यहोशू अध्याय 21 की कहानी

The Explanation

लेवी गोत्र के लोग दूसरे गोत्रों से अलग थे। उन्हें कोई अपनी जमीन नहीं मिली थी। परमेश्वर ने पहले ही मूसा से कहा था, लेवियों को रहने के लिए नगर मिलेंगे, और उनके पशुओं के लिए चराई भी मिलेगी।

अब वह समय आ गया था। एलीआजर याजक और यहोशू, और सब गोत्रों के मुखिया एक साथ इकट्ठे हुए। लेवी लोग उनके पास आए और बोले, "यहोवा ने हमें बसने के लिए नगर देने की आज्ञा दी थी।" क्या वे अपनी बात भूल गए होंगे? नहीं। इस्राएलियों ने तुरंत अपने-अपने भाग में से नगर दिए, जैसा यहोवा ने कहा था।

चिट्ठी डाली गई, यानी पर्ची निकाली गई, ताकि पता चले किसको कौन सा नगर मिलेगा। हारून के वंश के याजकों को तेरह नगर मिले, जिनमें हेब्रोन भी था, वही नगर जो कभी कालेब को दिया गया था। बाकी कहाती लेवियों को दस नगर मिले। गेर्शोनी लेवियों को तेरह नगर मिले। मरारी लेवियों को बारह नगर मिले।

इनमें कुछ खास नगर भी थे, जिन्हें "शरणनगर" कहा गया। अगर किसी से गलती से किसी की मृत्यु हो जाती, तो वह वहाँ भाग सकता था और सुरक्षित रह सकता था। हेब्रोन, शेकेम, गोलन, गलील का केदेश, रामोत, ये सब शरणनगर थे। सोचो, कोई डरा हुआ आदमी भाग रहा है, और उसे पता है कि एक नगर है जहाँ वह सुरक्षित रहेगा।

कुल मिलाकर लेवियों को अड़तालीस नगर मिले, हर एक अपनी चराई के साथ। और फिर लिखा है, यहोवा ने इस्राएलियों को वह सारा देश दिया जिसकी शपथ उसने उनके पूर्वजों से खाई थी। उनके शत्रुओं में से कोई भी उनके सामने टिक न सका। जितनी भलाई की बातें यहोवा ने कही थीं, उनमें से कोई भी बात न छूटी। सब की सब पूरी हुईं।

What Does This Mean?

यह अध्याय गिनती और नामों से भरा लगता है, पर इसके पीछे एक बड़ी बात छिपी है। परमेश्वर ने जो वचन दिया था, वह निभाया। बरसों पहले मूसा से की गई बात, अब पूरी हुई। एक भी शब्द खाली नहीं गया।

याद रखो, लेवी लोग कमजोर नहीं थे क्योंकि उनकी अपनी जमीन नहीं थी। परमेश्वर ने खुद उनका ध्यान रखा। वह उन्हें भूला नहीं। और शरणनगर दिखाते हैं, परमेश्वर डरे हुओं और भटके हुओं के लिए भी जगह बनाते हैं।

The Common Thread

यह वचन हमें याद दिलाता है, परमेश्वर अपनी बात कभी नहीं तोड़ते। जो वचन उन्होंने अब्राहम, मूसा और इस्राएल से किया, वह पूरा हुआ। यही परमेश्वर बाद में एक और बड़ा वचन निभाते हैं, जब वे यीशु मसीह को भेजते हैं। जैसे शरणनगर डरे हुए को सुरक्षा देता था, वैसे ही यीशु मसीह हर उस व्यक्ति के लिए शरण हैं जो उनके पास दौड़कर आता है।

For You

जब तुम डरे हो, या तुमसे कोई गलती हो गई हो, तो याद रखो, तुम्हारे पास भी एक शरणस्थान है। तुम प्रार्थना में यीशु मसीह के पास दौड़ सकते हो। और जैसे परमेश्वर ने लेवियों को नहीं भुलाया, वैसे ही वे तुम्हें भी नहीं भूलते, भले तुम्हारे पास बड़ा घर हो या छोटा।

Talk About It

अगर तुम्हें शरणनगर की तरह भागने की जगह चाहिए होती, कहाँ भागते?

परमेश्वर ने अपनी बात पूरी निभाई। क्या तुम्हें कोई वादा याद है जो तुमने निभाया?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप अपनी बात हमेशा निभाते हैं। धन्यवाद कि आप हमें भी नहीं भूलते। जब हम डरें, हमें याद दिलाइए कि यीशु मसीह हमारी शरण हैं। आमीन।

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यहोशू 21 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहोशू 21 किस विषय में है?
लेवी गोत्र के लोग दूसरे गोत्रों से अलग थे। उन्हें कोई अपनी जमीन नहीं मिली थी। परमेश्वर ने पहले ही मूसा से कहा था, लेवियों को रहने के लिए नगर मिलेंगे, और उनके पशुओं के लिए चराई भी मिलेगी।
यहोशू 21 क्या कहता है?
चिट्ठी डाली गई, यानी पर्ची निकाली गई, ताकि पता चले किसको कौन सा नगर मिलेगा। हारून के वंश के याजकों को तेरह नगर मिले, जिनमें हेब्रोन भी था, वही नगर जो कभी कालेब को दिया गया था। बाकी कहाती लेवियों को दस नगर मिले। गेर्शोनी लेवियों को तेरह नगर मिले। मरारी लेवियों को बारह नगर मिले।
यहोशू 21 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
कुल मिलाकर लेवियों को अड़तालीस नगर मिले, हर एक अपनी चराई के साथ। और फिर लिखा है, यहोवा ने इस्राएलियों को वह सारा देश दिया जिसकी शपथ उसने उनके पूर्वजों से खाई थी। उनके शत्रुओं में से कोई भी उनके सामने टिक न सका। जितनी भलाई की बातें यहोवा ने कही थीं, उनमें से कोई भी बात न छूटी। सब की सब पूरी हुईं।
बच्चे यहोशू 21 से क्या सीख सकते हैं?
याद रखो, लेवी लोग कमजोर नहीं थे क्योंकि उनकी अपनी जमीन नहीं थी। परमेश्वर ने खुद उनका ध्यान रखा। वह उन्हें भूला नहीं। और शरणनगर दिखाते हैं, परमेश्वर डरे हुओं और भटके हुओं के लिए भी जगह बनाते हैं।
यहोशू 21 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम डरे हो, या तुमसे कोई गलती हो गई हो, तो याद रखो, तुम्हारे पास भी एक शरणस्थान है। तुम प्रार्थना में यीशु मसीह के पास दौड़ सकते हो। और जैसे परमेश्वर ने लेवियों को नहीं भुलाया, वैसे ही वे तुम्हें भी नहीं भूलते, भले तुम्हारे पास बड़ा घर हो या छोटा।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

गेर्शोनियों को जो दो नगर मिले, उनमें से एक था "शरणनगर बाशान का गोलान।" सोचो, जिनके पास अपनी कोई भूमि न थी, उन्हीं के हाथ में परमेश्वर ने शरण का नगर सौंपा। जो भागा हुआ, डरा हुआ आदमी वहाँ पहुँचता, उसे लेवीय मिलते, परमेश्वर के सेवक।

तेरे पास भी शायद बहुत कुछ न हो। पर क्या तेरा घर किसी थके हुए के लिए शरण बन सकता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

लेवियों के पास अपनी कोई भूमि नहीं थी। यहूदा और शिमोन ने अपने ही भाग में से नगर देकर उन्हें बसाया, "ये नगर जिनके नाम लिखे हैं दिए गए।" ध्यान दो, परमेश्वर ने लेवियों की जरूरत स्वर्ग से नहीं, उनके भाइयों के हाथों से पूरी की। जो थोड़ा तुम्हारे पास है, हो सकता है वह किसी और के लिए ठिकाना बनने को दिया गया हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

याजकों को कोई अपना भाग नहीं मिला, बस तेरह नगर और उनके चारों ओर चराइयाँ। न सीमाएँ, न प्रदेश। क्योंकि उनका भाग यहोवा स्वयं था। फिर भी परमेश्वर ने उनकी गायों बकरियों के लिए चराई की भूमि भी गिनवाई। जो कहता है "मैं ही तेरा भाग हूँ", वही तेरी छोटी ज़रूरतों को भी भूलता नहीं। तू किस चीज़ को अपनी सुरक्षा समझे बैठा है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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