6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

लैव्यव्यवस्था 24

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

परमेश्वर ने मूसा से कहा, इस्राएली लोग मेरे लिये शुद्ध जैतून का तेल लाएं। यह तेल दीपक में डाला जाएगा। हारून हर शाम इस दीपक को जलाएगा, और वह सारी रात जलता रहेगा, मिलापवाले तम्बू में, परमेश्वर के सामने। यह दीपक कभी नहीं बुझना चाहिए।

फिर परमेश्वर ने रोटी के बारे में कहा। बारह रोटियाँ बनाई जाएं, एक-एक इस्राएल के हर गोत्र के लिये। उन्हें मेज पर दो पंक्तियों में रखा जाए, परमेश्वर के सामने। हर सब्त के दिन ताज़ी रोटी रखी जाए। यह रोटी हारून और उसके पुत्रों के लिये थी, वे उसे पवित्रस्थान में खाते थे।

फिर कहानी अचानक बदल जाती है। छावनी में एक लड़ाई हो गई। एक आदमी, जिसकी माँ इस्राएली थी पर पिता मिस्री था, किसी इस्राएली पुरुष से लड़ने लगा। लड़ते-लड़ते उसने गुस्से में परमेश्वर के नाम को श्राप दिया। लोग चौंक गए। क्या किया इसने? उन्होंने उसे पकड़कर मूसा के पास ले गए और उसे बंद कर दिया, जब तक परमेश्वर खुद न बताएं कि क्या करना है।

परमेश्वर ने मूसा से कहा, उसे छावनी से बाहर ले जाओ। जिन लोगों ने यह सुना था, वे अपने हाथ उसके सिर पर रखें। फिर सारी मंडली उस पर पत्थर फेंके। यह गंभीर दंड था, क्योंकि परमेश्वर का नाम पवित्र है।

परमेश्वर ने यह भी कहा, अगर कोई किसी को मार डाले, तो उसे भी मार डाला जाए। अगर कोई किसी का पशु मार डाले, तो उसे बदले में पशु देना होगा। अगर कोई किसी को चोट पहुंचाए, आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत, वैसा ही बदला दिया जाए। और यह नियम सबके लिये बराबर था, चाहे इस्राएली हो या परदेशी।

मूसा ने यह बात इस्राएलियों को बताई। उन्होंने उस आदमी को छावनी से बाहर ले जाकर उस पर पत्थर फेंके, ठीक वैसे ही जैसे परमेश्वर ने आज्ञा दी थी।

इसका क्या मतलब है?

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर के सामने दो बातें हमेशा ताज़ा रहनी चाहिए थीं, रोशनी और रोटी। दीपक कभी नहीं बुझता था, रोटी कभी बासी नहीं होती थी। यह दिखाता था कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ हमेशा रहते हैं, उन्हें उजियाला देते हैं और उनकी देखभाल करते हैं।

लेकिन फिर वह कठिन घटना आती है। उस आदमी ने गुस्से में परमेश्वर के नाम का अपमान किया। यह छोटी बात नहीं थी। परमेश्वर का नाम पवित्र है, और जो उसे हल्के में लेता है, वह बहुत बड़ी बात करता है। परमेश्वर ने यह भी दिखाया कि उनके नियम सबके लिये एक समान थे, चाहे कोई कितना भी बड़ा या छोटा हो। कोई किसी को चोट पहुंचाए तो उसे खुद भी वैसी ही सज़ा मिले, यह दिखाता है कि परमेश्वर अन्याय से नफरत करते हैं।

बड़ी कहानी की एक कड़ी

यह दीपक जो कभी नहीं बुझता, हमें यीशु मसीह की याद दिलाता है, जिन्होंने खुद कहा था, मैं जगत की ज्योति हूँ। वह रोटी जो हमेशा परमेश्वर के सामने रखी रहती थी, हमें याद दिलाती है कि यीशु मसीह ने खुद कहा, मैं जीवन की रोटी हूँ। परमेश्वर हमेशा अपने लोगों के लिये उजियाला और भोजन तैयार रखते हैं।

और वह कठोर न्याय, आँख के बदले आँख, हमें दिखाता है कि पाप का दाम चुकाना पड़ता है। लेकिन यीशु मसीह आए और उन्होंने खुद वह दाम चुकाया, ताकि हम क्षमा पा सकें।

तुम्हारे लिये

जब तुम गुस्सा होते हो, तुम्हारे मुँह से क्या निकलता है? उस आदमी ने गुस्से में बुरी बात कही। तुम भी कभी गुस्से में कुछ कह देते हो, जो बाद में पछताते हो। परमेश्वर से मांगो कि वे तुम्हारी जीभ को थामे रखें। और जब कोई तुम्हारे साथ अन्याय करे, तो याद रखो, परमेश्वर न्यायी हैं, वे सब कुछ देखते हैं।

बात करने के लिये

जब तुम बहुत गुस्सा होते हो, तब तुम्हारे मुँह से क्या निकलता है?

परमेश्वर ने दीपक को कभी न बुझने की आज्ञा क्यों दी होगी?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु, हमारी जीभ को थामे रखिए, ताकि हम गुस्से में बुरी बातें न कहें। आप ही हमारी रोशनी और हमारी रोटी हैं। हमें सिखाइए कि हम आपके नाम का आदर करें। आमीन।

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लैव्यव्यवस्था 24 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 24 किस विषय में है?
परमेश्वर ने मूसा से कहा, इस्राएली लोग मेरे लिये शुद्ध जैतून का तेल लाएं। यह तेल दीपक में डाला जाएगा। हारून हर शाम इस दीपक को जलाएगा, और वह सारी रात जलता रहेगा, मिलापवाले तम्बू में, परमेश्वर के सामने। यह दीपक कभी नहीं बुझना चाहिए।
लैव्यव्यवस्था 24 क्या कहता है?
परमेश्वर ने मूसा से कहा, उसे छावनी से बाहर ले जाओ। जिन लोगों ने यह सुना था, वे अपने हाथ उसके सिर पर रखें। फिर सारी मंडली उस पर पत्थर फेंके। यह गंभीर दंड था, क्योंकि परमेश्वर का नाम पवित्र है।
लैव्यव्यवस्था 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर के सामने दो बातें हमेशा ताज़ा रहनी चाहिए थीं, रोशनी और रोटी। दीपक कभी नहीं बुझता था, रोटी कभी बासी नहीं होती थी। यह दिखाता था कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ हमेशा रहते हैं, उन्हें उजियाला देते हैं और उनकी देखभाल करते हैं।
बच्चे लैव्यव्यवस्था 24 से क्या सीख सकते हैं?
और वह कठोर न्याय, आँख के बदले आँख, हमें दिखाता है कि पाप का दाम चुकाना पड़ता है। लेकिन यीशु मसीह आए और उन्होंने खुद वह दाम चुकाया, ताकि हम क्षमा पा सकें।
लैव्यव्यवस्था 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे प्रभु, हमारी जीभ को थामे रखिए, ताकि हम गुस्से में बुरी बातें न कहें। आप ही हमारी रोशनी और हमारी रोटी हैं। हमें सिखाइए कि हम आपके नाम का आदर करें। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

फिर यदि कोई किसी को चोट पहुँचाए, तो जैसा उसने किया हो वैसा ही उससे भी किया जाए।" यह नियम बदला लेने की छूट नहीं था, बल्कि बदले पर लगाम थी। एक थप्पड़ के बदले पूरा घर जला देने की आग को परमेश्वर ने यहीं रोक दिया। आज खुद से पूछ, जिसने तुझे दुख दिया, क्या तेरे मन में उसके लिए सज़ा उसके किए से बड़ी नहीं हो गई?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

जो कोई अपने परमेश्वर को श्राप दे उसको अपने पाप का भार उठाना पड़ेगा।" ध्यान दे, यह बात उस समय कही गई जब लोग रेगिस्तान में भूखे और थके हुए थे। दर्द में मुँह से निकली बात भी हल्की नहीं होती। परमेश्वर तेरी शिकायत सुनने को तैयार है, पर वह तुझसे कहता है कि मेरे विषय में तेरे शब्दों का वजन है। आज तेरी थकान किस लहजे में बोल रही है?

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