3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लैव्यव्यवस्था 24

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्यवस्थाविवरण की कहानी

समझाना

अंधेरी रात थी। तम्बू के अंदर सब चुप था। पर वहाँ एक छोटा दीपक था। हारून उस दीपक में तेल डालता था। बहुत अच्छा तेल, जैतून से निकाला हुआ। हारून हर शाम दीपक जलाता था। हर सुबह तक दीपक जलता रहता था। यह दीपक कभी नहीं बुझता था।

और वहाँ एक मेज़ भी थी। साफ, चमकती मेज़। उस पर बारह रोटियाँ रखी थीं। एक, दो, तीन, सब तक बारह। रोटियाँ गरम गरम, ताज़ी ताज़ी। हारून उन्हें प्रभु के सामने रखता था। हर हफ्ते नई रोटियाँ। यह मेज़ कभी खाली नहीं रहती थी।

इससे क्या समझ मिलती है?

प्रभु ने कहा, "यह दीपक नित्य जलता रहे।" नित्य, यानी हमेशा। हारून का काम था दीपक जलाना। रोज़, रोज़, रोज़। और रोटियाँ भी हमेशा वहाँ होती थीं। प्रभु के सामने। यह दिखाता था, प्रभु का घर कभी अंधेरा नहीं। प्रभु की मेज़ कभी खाली नहीं।

फिर एक दिन कुछ बुरा हुआ। छावनी में दो लोग लड़ पड़े। एक ने प्रभु का नाम लेकर बुरी बात कही। लोग डर गए। वे उसे मूसा के पास ले गए। मूसा ने प्रभु से पूछा, "अब क्या करें?" प्रभु ने उत्तर दिया। प्रभु का नाम बहुत बड़ा है। बहुत पवित्र है। उसका मज़ाक नहीं बनाना चाहिए।

बड़ी कहानी से जुड़ाव

वह दीपक जो कभी नहीं बुझता था, वह एक बात याद दिलाता है। परमेश्वर का उजियाला कभी खत्म नहीं होता। बहुत बाद में, यीशु आए। यीशु ने कहा, "मैं दुनिया की ज्योति हूँ।" वह दीपक यीशु की एक झलक था। और वे बारह रोटियाँ, हमेशा मेज़ पर, वे भी एक झलक थीं। यीशु ने बाद में कहा, "मैं जीवन की रोटी हूँ।" यीशु हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते। उनका उजियाला बुझता नहीं। उनकी रोटी कभी खत्म नहीं होती।

तुम्हारे लिए

तुम रात में सोते हो, है ना? कभी कभी अंधेरा डरावना लगता है। पर याद रखो, यीशु का उजियाला हमेशा जलता रहता है। जैसे वह दीपक, बुझता नहीं। और जब तुम भूखे होते हो, यीशु तुम्हें भी खिलाते हैं। जैसे वह रोटी, हमेशा तैयार।

बात करने के लिए

तुम्हें अंधेरे में सबसे ज़्यादा किसकी याद आती है?

क्या तुम्हें पता है यीशु को "जीवन की रोटी" क्यों कहा गया?

प्रार्थना

प्रिय प्रभु, धन्यवाद कि आपका उजियाला कभी नहीं बुझता। धन्यवाद कि आप हमें कभी भूखा नहीं छोड़ते। मुझे रात में डर न लगे। मुझे पता है, आप मेरे साथ हैं। आमीन।

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लैव्यव्यवस्था 24 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 24 किस विषय में है?
अंधेरी रात थी। तम्बू के अंदर सब चुप था। पर वहाँ एक छोटा दीपक था। हारून उस दीपक में तेल डालता था। बहुत अच्छा तेल, जैतून से निकाला हुआ। हारून हर शाम दीपक जलाता था। हर सुबह तक दीपक जलता रहता था। यह दीपक कभी नहीं बुझता था।
लैव्यव्यवस्था 24 क्या कहता है?
और वहाँ एक मेज़ भी थी। साफ, चमकती मेज़। उस पर बारह रोटियाँ रखी थीं। एक, दो, तीन, सब तक बारह। रोटियाँ गरम गरम, ताज़ी ताज़ी। हारून उन्हें प्रभु के सामने रखता था। हर हफ्ते नई रोटियाँ। यह मेज़ कभी खाली नहीं रहती थी।
लैव्यव्यवस्था 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
प्रभु ने कहा, "यह दीपक नित्य जलता रहे।" नित्य, यानी हमेशा। हारून का काम था दीपक जलाना। रोज़, रोज़, रोज़। और रोटियाँ भी हमेशा वहाँ होती थीं। प्रभु के सामने। यह दिखाता था, प्रभु का घर कभी अंधेरा नहीं। प्रभु की मेज़ कभी खाली नहीं।
नन्हे बच्चे लैव्यव्यवस्था 24 से क्या सीख सकते हैं?
फिर एक दिन कुछ बुरा हुआ। छावनी में दो लोग लड़ पड़े। एक ने प्रभु का नाम लेकर बुरी बात कही। लोग डर गए। वे उसे मूसा के पास ले गए। मूसा ने प्रभु से पूछा, "अब क्या करें?" प्रभु ने उत्तर दिया। प्रभु का नाम बहुत बड़ा है। बहुत पवित्र है। उसका मज़ाक नहीं बनाना चाहिए।
लैव्यव्यवस्था 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
वह दीपक जो कभी नहीं बुझता था, वह एक बात याद दिलाता है। परमेश्वर का उजियाला कभी खत्म नहीं होता। बहुत बाद में, यीशु आए। यीशु ने कहा, "मैं दुनिया की ज्योति हूँ।" वह दीपक यीशु की एक झलक था। और वे बारह रोटियाँ, हमेशा मेज़ पर, वे भी एक झलक थीं। यीशु ने बाद में कहा, "मैं जीवन की रोटी हूँ।" यीशु हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते। उनका उजियाला बुझता नहीं। उनकी रोटी कभी खत्म नहीं होती।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

फिर यदि कोई किसी को चोट पहुँचाए, तो जैसा उसने किया हो वैसा ही उससे भी किया जाए।" यह नियम बदला लेने की छूट नहीं था, बल्कि बदले पर लगाम थी। एक थप्पड़ के बदले पूरा घर जला देने की आग को परमेश्वर ने यहीं रोक दिया। आज खुद से पूछ, जिसने तुझे दुख दिया, क्या तेरे मन में उसके लिए सज़ा उसके किए से बड़ी नहीं हो गई?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

जो कोई अपने परमेश्वर को श्राप दे उसको अपने पाप का भार उठाना पड़ेगा।" ध्यान दे, यह बात उस समय कही गई जब लोग रेगिस्तान में भूखे और थके हुए थे। दर्द में मुँह से निकली बात भी हल्की नहीं होती। परमेश्वर तेरी शिकायत सुनने को तैयार है, पर वह तुझसे कहता है कि मेरे विषय में तेरे शब्दों का वजन है। आज तेरी थकान किस लहजे में बोल रही है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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