लैव्यव्यवस्था 26
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्यवस्थाविवरण नहीं, लैव्यव्यवस्था 26 की कहानी
The Explanation
परमेश्वर ने मूसा के द्वारा इस्राएल के लोगों से बात की। उन्होंने कहा, "तुम अपने लिये मूरतें न बनाना।" क्यों? क्योंकि वे ही उनके परमेश्वर यहोवा थे, जो उन्हें मिस्र से बाहर निकाल लाए थे।
फिर परमेश्वर ने एक वादा किया। उन्होंने कहा, "यदि तुम मेरी विधियों पर चलो, तो मैं तुम्हारे लिये समय पर मेंह बरसाऊँगा।" खेत भर जाएँगे, पेड़ फल देंगे, लोग पेट भर खाएँगे। कोई उन्हें डराएगा नहीं। वे चैन से सोएँगे। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हारे मध्य चला फिरा करूँगा, और तुम्हारा परमेश्वर बना रहूँगा।"
पर फिर परमेश्वर ने एक दूसरी बात भी कही, एक कठिन चेतावनी। उन्होंने कहा, "यदि तुम मेरी न सुनोगे, और मेरी वाचा को तोड़ोगे, तो मुश्किल दिन आएँगे।" खेत सूखे पड़ेंगे, शत्रु हावी हो जाएँगे, लोगों का दिल डर से काँपेगा, यहाँ तक कि पत्ते की आवाज़ से भी वे भाग खड़े होंगे।
यह सुनकर एक बच्चा पूछ सकता है, "क्या परमेश्वर सच में इतने नाराज़ हो सकते हैं?" हाँ, क्योंकि प्रेम सच्चा होता है जब वह गलत बात को गलत कहता है।
पर कहानी वहीं नहीं रुकती। परमेश्वर ने आगे कहा, "यदि वे अपने अधर्म को मान लेंगे, और अपने अधर्म के दण्ड को अंगीकार करेंगे, तब जो वाचा मैंने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बाँधी थी, उसको मैं स्मरण करूँगा।" और अंत में परमेश्वर ने एक बड़ा वादा दिया, "मैं उनका सर्वनाश नहीं करूँगा, और न अपनी वाचा को तोड़ूँगा, क्योंकि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूँ।"
What Does This Mean?
यह अध्याय एक चेतावनी जैसा लगता है, पर असल में यह परमेश्वर के दिल की कहानी है। वे अपने लोगों से इतना प्रेम करते हैं कि चाहते हैं वे उनकी बात सुनें, उनके पास रहें। जब लोग दूर भाग जाते हैं, तब परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। वे प्रतीक्षा करते हैं कि वे वापस आएँ। एक राजा जो अपनी प्रजा से प्रेम करता है, वह चाहता है कि वे सुरक्षित रहें, पर वह झूठ भी नहीं बोलता कि गलत काम का कोई नतीजा नहीं होगा।
The Common Thread
यह वाचा, जो परमेश्वर ने अब्राहम, इसहाक और याकूब से बाँधी थी, कभी टूटी नहीं। सालों बाद, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु मसीह को भेजा। यीशु ने वह सज़ा अपने ऊपर ली, जो हमें मिलनी चाहिए थी। इस तरह परमेश्वर ने अपना वादा पूरा किया, "मैं तुम्हारा सर्वनाश नहीं करूँगा।" यीशु के द्वारा परमेश्वर आज भी अपने लोगों के बीच चलते फिरते हैं, जैसे उन्होंने कहा था।
For You
जब तुम कुछ गलत करते हो, और फिर उसे मान लेते हो, परमेश्वर तुम्हें भगाते नहीं। वे पास आ जाते हैं। आज तुम कोशिश करो किसी एक बात में परमेश्वर की सुनो, जैसे अपने भाई-बहन के साथ अच्छे से बोलना, या जब गलती हो जाए तो सच बोल देना।
Talk About It
क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर तब भी प्रेम करते हैं जब हम गलती करते हैं?
इस कहानी में तुम्हें सबसे अच्छी बात कौन सी लगी?
Praying Together
हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें कभी नहीं छोड़ते। हमें मदद कीजिए कि हम आपकी सुनें और आपके पास रहें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
लैव्यव्यवस्था 26 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
लैव्यव्यवस्था 26 किस विषय में है?
लैव्यव्यवस्था 26 क्या कहता है?
लैव्यव्यवस्था 26 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे लैव्यव्यवस्था 26 से क्या सीख सकते हैं?
लैव्यव्यवस्था 26 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जितने दिन वह उजाड़ रहेगा उतने दिन उसको विश्राम मिलेगा।" ज़मीन को वह विश्राम मिला ही, पर तब, जब लोग निर्वासन में थे। जो सब्त वे खुशी से मना सकते थे, वही उन्हें खोकर मिला।
सोच, तेरा शरीर, तेरा मन भी विश्राम माँग रहा है। जो आराम तू आज परमेश्वर के हाथ से नहीं लेता, वह कल बीमारी या थकान बनकर तुझसे लिया जा सकता है।
तुम रखा हुआ पुराना अनाज खाओगे, और नये के लिये पुराने को निकालोगे।" ज़रा सोचो, परमेश्वर की आशीष इतनी बहती है कि समस्या कमी की नहीं, जगह की हो जाती है। पर पुराने को निकालने के लिए भरोसा चाहिए। क्या तू अब भी कल के अनाज को कसकर पकड़े है, जबकि वह नया देने खड़ा है? भण्डार खाली करना भी विश्वास का काम है।
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