3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लैव्यव्यवस्था 26

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाना

एक बार परमेश्वर ने अपने लोगों से बात की। उनका नाम था यहोवा। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।"

परमेश्वर ने कहा, "तुम मेरी बात सुनना।" उन्होंने कहा, "अगर तुम मेरी सुनोगे, तो मैं तुम्हें बहुत आशीष दूँगा।" बारिश बरसेगी। ठंडी, ताज़ी बारिश। खेतों में अन्न उगेगा। पेड़ों पर फल लगेंगे, मीठे-मीठे फल। लोग खाएँगे और उनका पेट भरेगा।

परमेश्वर ने कहा, "तुम चैन से सोओगे। कोई तुम्हें डराएगा नहीं।" सोचो, रात को अंधेरा है। पर कोई डर नहीं। सब शांत। सब सुरक्षित। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हारे बीच चला-फिरा करूँगा।" जैसे कोई पिता अपने घर में चलता है।

इसका क्या मतलब है?

पर परमेश्वर ने एक और बात भी कही। उन्होंने कहा, "अगर तुम मेरी न सुनो, तो दुख आएगा।" यह सुनना कठिन है। बारिश नहीं आएगी। खेत सूखे रहेंगे। पेट भरेगा नहीं।

परमेश्वर को यह दुख देना पसंद नहीं था। पर परमेश्वर सच बोलते हैं। वे कभी झूठ नहीं बोलते। जब लोग उनसे दूर भागते, तो कुछ टूट जाता। जैसे जब बच्चा अपने पापा का हाथ छोड़ देता है, और अकेला हो जाता है।

एक ही सिलसिला

पर सुनो, यह सबसे अच्छी बात है। परमेश्वर ने कहा, "मैं याकूब को, इसहाक को, अब्राहम को याद करूँगा।" परमेश्वर भूलते नहीं। कभी नहीं।

भले लोग दूर भाग जाएँ, परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। वे कहते हैं, "मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।" यह वादा कभी नहीं टूटता।

बहुत साल बाद, परमेश्वर ने अपना बेटा भेजा। उनका नाम यीशु था। यीशु ने दिखाया, परमेश्वर कितना प्यार करते हैं। यीशु हमेशा हमारे पास रहना चाहते हैं। जैसे परमेश्वर ने कहा था, "मैं तुम्हारे बीच चला-फिरा करूँगा।"

तुम्हारे लिए

तुम आज सुबह उठे। सूरज चमक रहा था। किसी ने तुम्हें खाना दिया। यह परमेश्वर की तरफ से है।

जब तुम परमेश्वर की सुनते हो, तुम्हारा दिल खुश रहता है। जैसे धूप में बैठना अच्छा लगता है, वैसे ही परमेश्वर के पास रहना अच्छा लगता है।

बात करें

क्या तुम्हें बारिश की आवाज़ पसंद है? परमेश्वर ने वह बारिश दी।

कौन हमेशा तुमसे प्यार करता है, चाहे कुछ भी हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आप हमारे साथ रहते हैं। आप हमें नहीं भूलते। हमें आपकी सुनने में मदद करें। धन्यवाद कि आप हमें प्यार करते हैं। आमीन।

यह बाइबल कहानी साझा करें

अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

लैव्यव्यवस्था 26 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 26 किस विषय में है?
एक बार परमेश्वर ने अपने लोगों से बात की। उनका नाम था यहोवा। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।"
लैव्यव्यवस्था 26 क्या कहता है?
परमेश्वर ने कहा, "तुम चैन से सोओगे। कोई तुम्हें डराएगा नहीं।" सोचो, रात को अंधेरा है। पर कोई डर नहीं। सब शांत। सब सुरक्षित। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हारे बीच चला-फिरा करूँगा।" जैसे कोई पिता अपने घर में चलता है।
लैव्यव्यवस्था 26 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर को यह दुख देना पसंद नहीं था। पर परमेश्वर सच बोलते हैं। वे कभी झूठ नहीं बोलते। जब लोग उनसे दूर भागते, तो कुछ टूट जाता। जैसे जब बच्चा अपने पापा का हाथ छोड़ देता है, और अकेला हो जाता है।
नन्हे बच्चे लैव्यव्यवस्था 26 से क्या सीख सकते हैं?
भले लोग दूर भाग जाएँ, परमेश्वर उन्हें छोड़ते नहीं। वे कहते हैं, "मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।" यह वादा कभी नहीं टूटता।
लैव्यव्यवस्था 26 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम आज सुबह उठे। सूरज चमक रहा था। किसी ने तुम्हें खाना दिया। यह परमेश्वर की तरफ से है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 35

जितने दिन वह उजाड़ रहेगा उतने दिन उसको विश्राम मिलेगा।" ज़मीन को वह विश्राम मिला ही, पर तब, जब लोग निर्वासन में थे। जो सब्त वे खुशी से मना सकते थे, वही उन्हें खोकर मिला।

सोच, तेरा शरीर, तेरा मन भी विश्राम माँग रहा है। जो आराम तू आज परमेश्वर के हाथ से नहीं लेता, वह कल बीमारी या थकान बनकर तुझसे लिया जा सकता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

तुम रखा हुआ पुराना अनाज खाओगे, और नये के लिये पुराने को निकालोगे।" ज़रा सोचो, परमेश्वर की आशीष इतनी बहती है कि समस्या कमी की नहीं, जगह की हो जाती है। पर पुराने को निकालने के लिए भरोसा चाहिए। क्या तू अब भी कल के अनाज को कसकर पकड़े है, जबकि वह नया देने खड़ा है? भण्डार खाली करना भी विश्वास का काम है।

थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?

हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network