लूका 17
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यीशु और उनके चेले यरूशलेम की ओर जा रहे थे। रास्ते में वे एक गाँव के पास पहुँचे। वहाँ दस लोग खड़े थे, पर वे दूर ही रहे। उनकी चमड़ी पर भयानक कोढ़ रोग था। इस रोग के कारण उन्हें कोई पास नहीं आने देता था। न परिवार, न दोस्त। वे अकेले रहते थे।
जब उन्होंने यीशु को देखा, तो ऊँची आवाज़ में चिल्लाए, "हे यीशु, हे स्वामी, हम पर दया कर!" सोचो, कितनी उम्मीद से वे चिल्लाए होंगे। यीशु ने उनकी बात सुनी और कहा, "जाओ, अपने आपको याजकों को दिखाओ।" और जाते-जाते, रास्ते में ही, उनका कोढ़ अच्छा हो गया।
क्या तुम कल्पना कर सकते हो, अचानक तुम्हारी चमड़ी फिर से सही हो जाए? दसों दौड़े होंगे, खुशी से। पर उनमें से केवल एक लौटा। वह यीशु के पास आया, ज़ोर से परमेश्वर की स्तुति करता हुआ। वह उनके पाँवों पर झुक गया और धन्यवाद दिया। यह व्यक्ति सामरी था, यानी एक विदेशी, जिसे यहूदी लोग अक्सर पराया मानते थे।
यीशु ने पूछा, "क्या दसों शुद्ध न हुए? तो फिर वे नौ कहाँ हैं?" फिर उन्होंने उस सामरी से कहा, "उठकर चला जा, तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है।"
आगे यीशु ने अपने चेलों को एक और बात समझाई। फरीसियों ने पूछा था कि परमेश्वर का राज्य कब आएगा। यीशु ने कहा कि यह राज्य ऐसा नहीं है जिसे तुम अपनी आँखों से किसी जगह पर ढूँढ सको। यह तो उनके बीच में ही था, क्योंकि यीशु स्वयं वहाँ खड़े थे।
फिर यीशु ने एक गंभीर बात कही। एक दिन वे लौटेंगे, अचानक, जैसे आकाश में बिजली चमकती है। उन्होंने नूह की कहानी याद दिलाई, जब लोग खाते-पीते थे और कुछ नहीं सोचते थे, तब जलप्रलय आ गया। और लूत के दिनों की भी, जब आग अचानक बरसी। यीशु ने चेतावनी दी, "लूत की पत्नी को स्मरण रखो!" वह पीछे मुड़कर देखने लगी थी और वहीं रह गई।
इसका क्या अर्थ है?
दस लोग चंगे हुए, पर केवल एक लौटकर धन्यवाद देने आया। यह कितना अजीब है, है ना? चंगाई पाना आसान लगता है, पर धन्यवाद देना भूल जाना भी बहुत आसान है। यीशु उन नौ लोगों के लिए दुखी हुए जिन्होंने पीछे मुड़कर देखा भी नहीं।
यह कहानी हमें दिखाती है कि परमेश्वर से मिलने वाली भलाई को पहचानना ज़रूरी है। वह सामरी व्यक्ति, जिसे लोग पराया समझते थे, वही सच्चे दिल से धन्यवाद देने वाला निकला।
समान सूत्र
यीशु ने कहा कि परमेश्वर का राज्य उनके बीच में ही है। यही तो पूरी बाइबल की बड़ी कहानी है। परमेश्वर ने वादा किया था कि वे अपने लोगों के पास आएँगे, और यीशु में वह वादा पूरा हुआ। जिस सामरी को चंगाई मिली, उसे यीशु में परमेश्वर का प्यार साफ़ दिखाई दिया, इसलिए वह झुक गया।
तुम्हारे लिए
आज जब कोई तुम्हारी मदद करे, चाहे माता-पिता हों या दोस्त, तुरंत धन्यवाद कहो। और जब परमेश्वर तुम्हारी प्रार्थना सुनें, याद रखो लौटकर उन्हें धन्यवाद देना, जैसे वह सामरी लौटा था। क्या तुम आज रात परमेश्वर को एक छोटी सी बात के लिए धन्यवाद दे सकते हो?
आपस में बात करें
अगर तुम उन दस में से एक होते, क्या तुम लौटकर धन्यवाद देते?
तुमने आज किसके लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिया है?
संगति में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमारी सुनते हैं जब हम आपको पुकारते हैं। हमें भी उस सामरी जैसा दिल दीजिए, जो लौटकर धन्यवाद देता है। आमीन।
लूका 17 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
लूका 17 किस विषय में है?
लूका 17 क्या कहता है?
लूका 17 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे लूका 17 से क्या सीख सकते हैं?
लूका 17 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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