7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

नहेम्याह 5

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यरूशलेम की दीवार बन रही थी। पत्थर पर पत्थर रखे जा रहे थे। पर एक दिन शहर में रोने की बड़ी आवाज़ सुनाई दी। गरीब लोग चिल्लाने लगे।

“हमारे बहुत बच्चे हैं,” कुछ लोग कहते थे, “हमें रोटी चाहिए, वरना हम भूखे मर जाएँगे।”

दूसरे कहते थे, “हमने अपने खेत और अंगूर के बाग गिरवी रख दिए हैं, ताकि अन्न मिल सके।”

फिर कुछ और लोग बोले, “हमने राजा को कर चुकाने के लिए अपने ही भाइयों से रुपया उधार लिया। अब हम अपने बेटे-बेटियों को दास बना रहे हैं। हमारी कोई-कोई बेटी तो दासी बन चुकी है। हम कुछ नहीं कर सकते, हमारे खेत औरों के हाथ में चले गए हैं।”

यह सुनकर नहेम्याह बहुत क्रोधित हो गए। उन्होंने यह बात अपने मन में बहुत सोची। फिर उन्होंने अमीर सरदारों को बुलाकर एक बड़ी सभा बनाई, और उन्हें डाँटते हुए कहा, “तुम अपने ही भाइयों से ब्याज ले रहे हो?”

सब चुप रह गए। कोई जवाब नहीं दे सका।

नहेम्याह ने फिर कहा, “जो तुम कर रहे हो वह अच्छा नहीं है। क्या तुम्हें परमेश्वर का भय नहीं? हमारे शत्रु हम पर हँसेंगे! आज ही उनके खेत, बाग और घर लौटा दो। जो ब्याज तुमने लिया है, वह भी वापस करो।”

सरदारों ने कहा, “हम वैसा ही करेंगे, जैसा आप कहते हैं।” नहेम्याह ने याजकों को बुलाया और उनसे शपथ खिलाई। फिर उन्होंने अपने कपड़े की छोर झाड़ते हुए कहा, “जो यह वचन पूरा न करे, परमेश्वर उसे ऐसे ही झाड़ दें और वह कंगाल हो जाए।”

पूरी सभा ने कहा, “आमीन!” और उन्होंने यहोवा की स्तुति की। सचमुच, लोगों ने वैसा ही किया।

इसका क्या मतलब है?

नहेम्याह सिर्फ दीवार नहीं बना रहे थे। वे यह भी देख रहे थे कि उनके लोग एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। जब उन्होंने सुना कि अमीर लोग गरीबों को सता रहे हैं, तो उनसे चुप नहीं रहा गया। उन्होंने सच बोलने का साहस किया, चाहे सामने ताकतवर लोग ही क्यों न हों। यह दिखाता है कि परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक-दूसरे का ख्याल रखें, खासकर उनका जो कमज़ोर हैं।

नहेम्याह खुद भी एक उदाहरण बने। वे बारह साल तक हाकिम रहे, पर उन्होंने कभी अपने हक़ का भोजन नहीं लिया। हर दिन उनकी मेज पर डेढ़ सौ लोग खाते थे, फिर भी उन्होंने लोगों पर बोझ नहीं डाला, “क्योंकि मैं यहोवा का भय मानता था।”

समान सूत्र

नहेम्याह ने अपने भाइयों को छुड़ाया था जो दूसरी जातियों के हाथ बिक गए थे। बहुत बाद में, यीशु मसीह भी आए ताकि हमें छुड़ाएँ, पर उन्होंने चाँदी से नहीं, अपने प्राण देकर हमें मुक्त किया। परमेश्वर हमेशा से वही परमेश्वर हैं, जो कमज़ोरों की चिल्लाहट सुनते हैं और उन्हें बचाने के लिए किसी को भेजते हैं।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हारे घर या स्कूल में कोई है जिसके पास कम है? शायद उसके पास खिलौने कम हों, या खाने को कुछ अच्छा न मिले। नहेम्याह की तरह तुम भी कुछ कर सकते हो, अपना कुछ बाँट सकते हो, या उसके लिए दयालु बन सकते हो। परमेश्वर देखते हैं जब हम दूसरों का ख्याल रखते हैं।

बातचीत के लिए

नहेम्याह को सरदारों से डटकर बात करने का साहस कहाँ से मिला होगा?

तुम किसी के साथ आज कैसे दयालु बन सकते हो?

एक साथ प्रार्थना

हे परमेश्वर, नहेम्याह की तरह हमें भी साहस दीजिए सच बोलने का। हमें ऐसा दिल दीजिए जो गरीबों और कमज़ोरों का ख्याल रखे। धन्यवाद कि आप हमारी पुकार सुनते हैं। यीशु के नाम में, आमीन।

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नहेम्याह 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नहेम्याह 5 किस विषय में है?
यरूशलेम की दीवार बन रही थी। पत्थर पर पत्थर रखे जा रहे थे। पर एक दिन शहर में रोने की बड़ी आवाज़ सुनाई दी। गरीब लोग चिल्लाने लगे।
नहेम्याह 5 क्या कहता है?
फिर कुछ और लोग बोले, “हमने राजा को कर चुकाने के लिए अपने ही भाइयों से रुपया उधार लिया। अब हम अपने बेटे-बेटियों को दास बना रहे हैं। हमारी कोई-कोई बेटी तो दासी बन चुकी है। हम कुछ नहीं कर सकते, हमारे खेत औरों के हाथ में चले गए हैं।”
नहेम्याह 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सरदारों ने कहा, “हम वैसा ही करेंगे, जैसा आप कहते हैं।” नहेम्याह ने याजकों को बुलाया और उनसे शपथ खिलाई। फिर उन्होंने अपने कपड़े की छोर झाड़ते हुए कहा, “जो यह वचन पूरा न करे, परमेश्वर उसे ऐसे ही झाड़ दें और वह कंगाल हो जाए।”
बच्चे नहेम्याह 5 से क्या सीख सकते हैं?
नहेम्याह खुद भी एक उदाहरण बने। वे बारह साल तक हाकिम रहे, पर उन्होंने कभी अपने हक़ का भोजन नहीं लिया। हर दिन उनकी मेज पर डेढ़ सौ लोग खाते थे, फिर भी उन्होंने लोगों पर बोझ नहीं डाला, “क्योंकि मैं यहोवा का भय मानता था।”
नहेम्याह 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
नहेम्याह को सरदारों से डटकर बात करने का साहस कहाँ से मिला होगा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

दीवार बन रही थी, और उसी बीच एक और आवाज़ उठी: "हम अपने बेटे-बेटियों समेत बहुत जन हैं; इसलिए हमें अन्न मिलना चाहिए, कि खाकर जीवित रहें।" काम बड़ा था, पर भूख भी उतनी ही सच्ची थी। नहेम्याह ने उस रोने को काम में बाधा समझकर नहीं टाला। कहीं तेरी सेवा इतनी व्यस्त तो नहीं कि पास खड़े भूखे की आवाज़ सुनाई ही न दे?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

दीवार बाहर से बन रही थी, और भीतर से दरार पड़ रही थी। "तब लोगों ने और उनकी स्त्रियों ने अपने यहूदी भाइयों के विरुद्ध बड़ी चिल्लाहट मचाई।" दुश्मन बाहर था, पर दर्द घर के भीतर से उठा। कभी कभी सबसे गहरी चोट अपनों से ही लगती है। आज ठहरकर पूछ: मेरे पास जो है, कहीं वह मेरे भाई के आंसुओं की कीमत पर तो नहीं?

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