7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

गिनती 12

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

मूसा परमेश्वर के लोगों का अगुआ था, और वह बहुत जिम्मेदारी उठाता था। उसके भाई हारून और उसकी बहन मिर्याम भी उसके साथ अगुआई करते थे। परन्तु इस अध्याय में हम देखते हैं कि उन दोनों के मन में मूसा के लिए जलन पैदा हो गई। कारण था मूसा की कूशी पत्नी। मिर्याम और हारून ने इसे लेकर मूसा की निन्दा करना शुरू किया, और उन्होंने कहा, "क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं? क्या उसने हम से भी बातें नहीं की?" असली बात पत्नी नहीं थी, असली बात यह थी कि वे भी वैसा ही सम्मान चाहते थे जैसा मूसा को मिला था।

परमेश्वर ने यह सुन लिया। वे तीनों को मिलापवाले तम्बू के पास बुलाए, और बादल के खम्भे में उतरकर स्वयं बोले। परमेश्वर ने साफ कहा कि मूसा अलग है। दूसरे भविष्यद्वक्ताओं से वे स्वप्न या दर्शन में बात करते हैं, परन्तु मूसा से वे आमने-सामने और प्रत्यक्ष होकर बातें करते हैं। मूसा परमेश्वर के सारे घराने में विश्वासयोग्य था। परमेश्वर का क्रोध भड़का, और जब बादल उठ गया, मिर्याम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई।

हारून घबरा गया और मूसा से गिड़गिड़ाया कि यह पाप उन पर न लगने दिया जाए। मूसा ने, जो इससे पहले "पृथ्वी भर के रहनेवाले सब मनुष्यों से बहुत अधिक नम्र स्वभाव का था," अपनी ही बहन के लिए परमेश्वर से दुहाई दी: "हे परमेश्वर, कृपा कर, और उसको चंगा कर।" परमेश्वर ने उसकी सुनी, परन्तु मिर्याम को सात दिन छावनी के बाहर रहना पड़ा, जैसे किसी को शर्म के कारण दूर रहना पड़ता। उसके बाद ही लोग आगे बढ़े।

What Does This Mean?

यह कहानी हमें दिखाती है कि जलन कितनी गहरी चोट पहुंचा सकती है। मिर्याम और हारून मूसा से प्रेम करते थे, वे भाई-बहन थे, फिर भी उनके मन में यह विचार आया कि "हमें भी वैसा ही सम्मान मिलना चाहिए।" यह विचार धीरे-धीरे शब्दों में बदल गया, और शब्द परमेश्वर के कानों तक पहुंच गए। परमेश्वर के लिए यह छोटी बात नहीं थी, क्योंकि मूसा को जो जिम्मेदारी दी गई थी, वह परमेश्वर ने खुद दी थी।

यहाँ एक कठिन बात भी है। हारून ने भी वही निन्दा की थी जो मिर्याम ने की, पर सजा केवल मिर्याम पर आई। पवित्रशास्त्र यह नहीं बताता कि ऐसा क्यों हुआ। शायद मिर्याम ने बात शुरू की थी, या शायद यह पाठ हमें सब कुछ नहीं बताना चाहता। यह ठीक है कि हम यह सवाल पूछें और मान लें कि इसका जवाब हमें नहीं दिया गया।

The Common Thread

मूसा को परमेश्वर ने "विश्वासयोग्य" कहा, यह शब्द बहुत भारी है। पूरे बाइबल में परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक वाचा में बंधे रहते हैं, यानी एक ऐसा वादा जो वे कभी नहीं तोड़ते, चाहे लोग कैसे भी व्यवहार करें। मूसा उस वाचा का सेवक था। पर बाइबल की कहानी में एक और भी विश्वासयोग्य दास आया, जिसका नाम यीशु मसीह है। इब्रानियों की पत्री कहती है कि मूसा घराने में सेवक की तरह विश्वासयोग्य था, परन्तु यीशु मसीह पुत्र की तरह उस घराने के ऊपर विश्वासयोग्य हैं। मूसा ने अपनी बहन के लिए दुहाई दी, "हे परमेश्वर, कृपा कर।" यीशु मसीह ने भी हमारे लिए, जो जलन और घमंड से भरे होते हैं, पिता से क्षमा मांगी, और अपनी जान तक दे दी।

For You

तुम भी कभी सोचते होगे, "उसे क्यों ज्यादा तवज्जो मिलती है, और मुझे नहीं?" यह भावना गलत नहीं है कि आ जाए, पर जो तुम उसके साथ करते हो, वही मायने रखता है। मिर्याम और हारून की गलती यह नहीं थी कि उन्हें बुरा लगा, बल्कि यह कि उन्होंने उस भावना को शब्दों में बदल दिया और मूसा को नीचा दिखाया। अगली बार जब तुम्हें लगे कि किसी और को ज्यादा सराहा जा रहा है, याद रखना कि परमेश्वर हर एक को अलग जिम्मेदारी और अलग जगह देते हैं। और ध्यान देना कि मूसा ने अपनी बहन से बदला नहीं लिया, बल्कि उसके लिए प्रार्थना की। यही सच्ची नम्रता है, जिसकी बात यह अध्याय शुरू में करता है।

Talk About It

तुम्हें क्या लगता है, हारून को सजा क्यों नहीं मिली, जबकि उसने भी वही बात कही थी जो मिर्याम ने कही?

कभी तुम्हारे मन में भी किसी और के लिए जलन आई है? उस समय तुमने क्या किया, और मूसा जैसा करना कैसा होता?

Praying Together

हे परमेश्वर, आप हर एक को अलग जिम्मेदारी देते हैं, और हमें यह मानना कठिन लगता है। जब हमारे मन में जलन आए, तो हमें मूसा जैसी नम्रता दीजिए, कि हम दूसरों के लिए बुरा न बोलें, बल्कि उनके लिए प्रार्थना करें। धन्यवाद कि आप हमें आज भी सुनते और चंगा करते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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गिनती 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

गिनती 12 किस विषय में है?
मूसा परमेश्वर के लोगों का अगुआ था, और वह बहुत जिम्मेदारी उठाता था। उसके भाई हारून और उसकी बहन मिर्याम भी उसके साथ अगुआई करते थे। परन्तु इस अध्याय में हम देखते हैं कि उन दोनों के मन में मूसा के लिए जलन पैदा हो गई। कारण था मूसा की कूशी पत्नी। मिर्याम और हारून ने इसे लेकर मूसा की निन्दा करना शुरू किया, और उन्होंने कहा, "क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं?
गिनती 12 क्या कहता है?
हारून घबरा गया और मूसा से गिड़गिड़ाया कि यह पाप उन पर न लगने दिया जाए। मूसा ने, जो इससे पहले "पृथ्वी भर के रहनेवाले सब मनुष्यों से बहुत अधिक नम्र स्वभाव का था," अपनी ही बहन के लिए परमेश्वर से दुहाई दी: "हे परमेश्वर, कृपा कर, और उसको चंगा कर।" परमेश्वर ने उसकी सुनी, परन्तु मिर्याम को सात दिन छावनी के बाहर रहना पड़ा, जैसे किसी को शर्म के कारण दूर रहना पड़ता। उसके बाद ही लोग आगे बढ़े।
गिनती 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यहाँ एक कठिन बात भी है। हारून ने भी वही निन्दा की थी जो मिर्याम ने की, पर सजा केवल मिर्याम पर आई। पवित्रशास्त्र यह नहीं बताता कि ऐसा क्यों हुआ। शायद मिर्याम ने बात शुरू की थी, या शायद यह पाठ हमें सब कुछ नहीं बताना चाहता। यह ठीक है कि हम यह सवाल पूछें और मान लें कि इसका जवाब हमें नहीं दिया गया।
बच्चे गिनती 12 से क्या सीख सकते हैं?
तुम भी कभी सोचते होगे, "उसे क्यों ज्यादा तवज्जो मिलती है, और मुझे नहीं?" यह भावना गलत नहीं है कि आ जाए, पर जो तुम उसके साथ करते हो, वही मायने रखता है। मिर्याम और हारून की गलती यह नहीं थी कि उन्हें बुरा लगा, बल्कि यह कि उन्होंने उस भावना को शब्दों में बदल दिया और मूसा को नीचा दिखाया। अगली बार जब तुम्हें लगे कि किसी और को ज्यादा सराहा जा रहा है, याद रखना कि परमेश्वर हर एक को अलग जिम्मेदारी और अलग जगह देते हैं। और ध्यान देना कि मूसा ने अपनी बहन से बदला नहीं लिया, बल्कि उसके लिए प्रार्थना की। यही सच्ची नम्रता है, जिसकी बात यह अध्याय शुरू में करता है।
गिनती 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी तुम्हारे मन में भी किसी और के लिए जलन आई है? उस समय तुमने क्या किया, और मूसा जैसा करना कैसा होता?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

मरियम और हारून जब मूसा के विरुद्ध बोले, मूसा ने अपनी सफाई नहीं दी। परमेश्वर ने खुद कहा, "मेरा दास मूसा ऐसा नहीं है; वह तो मेरे सारे घर में विश्वासयोग्य है।" ध्यान दे, परमेश्वर ने उसकी चमत्कारी शक्ति की तारीफ नहीं की, उसकी विश्वासयोग्यता की की। जहाँ तू खड़ा है, वहीं छोटी बातों में सच्चा रह। तेरी सफाई देने वाला कोई और है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

मरियम ने मूसा के विरुद्ध जो बातें छिपकर कहीं थीं, वे उसकी त्वचा पर दिखने लगीं। "हारून ने मरियम की ओर देखा, और क्या देखा कि वह कोढ़िन हो गई है।" जो शब्द हम पीठ पीछे बोलते हैं, वे कहीं जाते नहीं। सोचो, अगर तुम्हारी कल की बातें आज तुम्हारे चेहरे पर लिखी होतीं, तो तुम किसकी आँखों में देखने से डरते?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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