गिनती 6
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
गिनती अध्याय 6 में परमेश्वर मूसा को एक खास नियम बताते हैं, जो किसी भी इस्राएली पुरुष या स्त्री के लिए था। कोई व्यक्ति चाहे तो "नाज़ीर की मन्नत" मान सकता था, यानी वह अपने आप को कुछ समय के लिए खास तौर पर यहोवा के लिए अलग करने का वादा करता था। यह उसकी अपनी मर्ज़ी से होता था, कोई उसे मजबूर नहीं करता था।
जो ऐसी मन्नत मानता, उसे तीन बातें माननी होती थीं। पहली, वह दाखमधु और उससे बनी हर चीज़ से दूर रहता, यहाँ तक कि दाख भी नहीं खाता था। दूसरी, वह अपने बाल नहीं कटवाता, बाल उसके अलग होने का निशान बन जाते थे। तीसरी, वह किसी भी मरे हुए शरीर के पास नहीं जाता, चाहे वह उसके अपने माता-पिता या भाई-बहन ही क्यों न हों।
अगर अचानक, बिना चाहे, कोई उसके पास मर जाता और उसकी मन्नत टूट जाती, तो वह गंदा नहीं रहता, बल्कि एक रास्ता दिया गया था। सातवें दिन वह अपना सिर मुँड़वाता, आठवें दिन याजक के पास बलिदान लाता, और फिर से अपने दिन गिनना शुरू करता। जब मन्नत के दिन पूरे हो जाते, तो वह मिलापवाले तम्बू के द्वार पर जाकर होमबलि, पापबलि और मेलबलि चढ़ाता, अपने बाल मुँड़ाकर आग में डालता, और उसके बाद फिर से दाखमधु पी सकता था।
अध्याय के आखिर में एक सुंदर आशीर्वाद दिया गया है, जो हारून और उसके पुत्रों को इस्राएलियों पर बोलने के लिए दिया गया: "यहोवा तुझे आशीष दे और तेरी रक्षा करे, यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे और तुझे शान्ति दे।"
What Does This Mean?
नाज़ीर की मन्नत कोई सज़ा नहीं थी, बल्कि एक तरीका था जिससे एक साधारण इंसान कह सकता था, "मैं कुछ समय के लिए विशेष रूप से परमेश्वर का हो जाना चाहता हूँ।" यह दिखाता है कि परमेश्वर के करीब आने की चाहत केवल याजकों तक सीमित नहीं थी, हर कोई इसे चुन सकता था।
पर ध्यान दो, यह नियम कितना ईमानदार है। बाइबल यह नहीं छिपाती कि कोई अचानक मर सकता है और मन्नत बीच में टूट सकती है। जीवन में ऐसा होता है, चीज़ें हमारी योजना के बाहर चली जाती हैं। परमेश्वर इसके लिए सज़ा नहीं देते, बल्कि शुद्ध होने और फिर से शुरू करने का रास्ता देते हैं। यह हमें कुछ सिखाता है, टूटी हुई मन्नत का मतलब परमेश्वर से दूर हो जाना नहीं है।
और वह आशीर्वाद के शब्द, वे सिर्फ अच्छी बातें नहीं हैं, वे बताते हैं कि परमेश्वर अपना मुख अपने लोगों की ओर करते हैं। सोचो, एक राजा का मुख अपनी ओर होना कितना बड़ा सम्मान है।
The Common Thread
बाइबल में आगे चलकर हम पढ़ते हैं कि शिमशोन और भविष्यद्वक्ता शमूएल भी नाज़ीर की तरह जन्म से ही परमेश्वर के लिए अलग किए गए थे। और यीशु मसीह के जन्म की खबर देने वाला स्वर्गदूत भी ऐसी ही बातें कहता है, "वह दाखमधु या किसी भी प्रकार की मदिरा न पीएगा।"
यीशु मसीह पूरी तरह से परमेश्वर के लिए अलग किए गए थे, हर एक दिन, हर एक पल। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी पिता परमेश्वर को समर्पित कर दी, बिना किसी मन्नत के टूटने के। और उस आशीर्वाद के शब्द, "यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे," वे यीशु मसीह में पूरी तरह सच हुए। उन्हीं के ज़रिए परमेश्वर अपना चेहरा हमारी ओर करते हैं, बिना डर के, बिना शर्म के।
For You
तुम भी कभी किसी से वादा करते हो, शायद अपने आप से, शायद परमेश्वर से। कभी वह वादा निभा पाते हो, कभी नहीं। यह अध्याय दिखाता है कि टूटा हुआ वादा आखिरी बात नहीं है। परमेश्वर के पास हमेशा नए सिरे से शुरू करने का रास्ता होता है।
शायद तुम सोचो, "मैं परमेश्वर के लिए कुछ खास क्यों करूँ?" यह ज़रूरी नहीं कि तुम बाल बढ़ाओ या दाख न खाओ, पर तुम रोज़ चुन सकते हो कि आज का दिन किस तरह परमेश्वर के करीब बिताया जाए। और जब तुम गिरते हो, याद रखो, वह आशीर्वाद आज भी सच है, परमेश्वर अपना मुख तुम्हारी ओर करते हैं।
Talk About It
अगर मन्नत अचानक टूट सकती थी, तो तुम्हें क्या लगता है, क्या परमेश्वर यह नियम इसलिए देते हैं ताकि हम डरें, या ताकि हमें उम्मीद मिले?
वह आशीर्वाद, "यहोवा अपना मुख तेरी ओर करे," तुम्हें कैसा महसूस कराता है, जब तुम सोचते हो कि परमेश्वर सच में तुम्हारी ओर देख रहे हैं?
Praying Together
प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें अपने करीब बुलाते हैं। जब हमारे वादे टूट जाते हैं, तो हमें फिर से शुरू करने का रास्ता दीजिए। अपना मुख हमारी ओर कीजिए, हमें आशीष दीजिए, और हमें अपनी शान्ति दीजिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
गिनती 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
गिनती 6 किस विषय में है?
गिनती 6 क्या कहता है?
गिनती 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे गिनती 6 से क्या सीख सकते हैं?
गिनती 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
नाज़ीर ने अपनी मन्नत पूरी की, बाल नहीं कटवाए, दाखमधु नहीं छुआ, सब कुछ ठीक से निभाया। और फिर भी अंत में याजक "उसके पापबलि और होमबलि को चढ़ाए।" सोचो, सबसे समर्पित जीवन भी बिना बलिदान के परमेश्वर के सामने खड़ा नहीं हो सकता। तेरी सेवा, तेरा उपवास, तेरी ईमानदारी सुंदर है, पर तुझे बचाती नहीं। मसीह का लहू ही तुझे खड़ा रखता है।
नाज़ीर की मन्नत लेने वाला अपने माता, पिता, भाई या बहन की मृत्यु पर भी अशुद्ध नहीं हो सकता था। अपने सबसे प्रियजन के शव के पास भी नहीं जा सकता था, क्योंकि "उसके परमेश्वर की मन्नत का चिन्ह उसके सिर पर होता है।"
सोचिए, कितनी कठिन बात है। जिस पिता ने उसे पाला, जिस माँ ने उसे जन्म दिया, उनके अंतिम संस्कार में भी वह सामान्य रीति से शामिल नहीं हो सकता। परमेश्वर के लिए अलग किया जाना कभी कभी हमारे सबसे कोमल रिश्तों से भी ऊँची कीमत माँगता है। क्या आप उस कीमत को पहचानते हैं जो आपका समर्पण आपसे माँग रहा है?
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